क्या है मनी लॉन्ड्रिंग का जाल, जिसमें फँसते जा रहे हैं कांग्रेसी ?

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 8 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा, फिर कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम, इसके बाद कर्नाटक में कांग्रेस के संकट मोचक कहलाने वाले वरिष्ठ नेता डी. के. शिवकुमार और अब इस फेहरिस्त में एक और नाम जुड़ गया है गुजरात के सीनियर कांग्रेसी नेता अहमद पटेल के बेटे फैज़ल पटेल का। यह सभी कांग्रेसी नेता मनी लॉन्ड्रिंग के केसों का सामना कर रहे हैं या कर चुके हैं। अब स्टर्लिंग बायोटेक केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अहमद पटेल के बेटे फैज़ल पटेल को पूछताछ के लिये हाजिर होने का आदेश दिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या है यह मनी लॉन्ड्रिंग का मामला, जिसके जाल में एक के बाद एक कांग्रेसी नेता फँसते चले जा रहे हैं। आज हम इसी सवाल का जवाब देंगे।

अब अहमद पटेल के बेटे पर ईडी ने कसा शिकंजा

उससे पहले यह जान लेते हैं कि कांग्रेस के गुज्जू नेता अहमद पटेल के खिलाफ क्या मामला है और क्यों जाँच एजेंसियाँ अब उन पर अपना शिकंजा कस रही हैं। दरअसल केन्द्रीय जाँच एजेंसियाँ लोन घोटाला करने वाली गुजरात की फार्मा सेक्टर की कंपनी स्टर्लिंग बायोटेक के संचालकों से अहमद पटेल के बेटे और दामाद इरफान सिद्दीकी के संबंधों की जाँच कर रही हैं। इसी सिलसिले में ईडी की टीम पहले भी फैज़ल पटेल से पूछताछ कर चुकी है और अब एक बार फिर उसने फैज़ल पटेल को पूछताछ के लिये पेश होने का आदेश दिया है। स्टर्लिंग बायोटेक कंपनी का संचालन वड़ोदरा के संदेसरा परिवार के हाथों में है। इस फार्मा कंपनी के प्रमोटर संदेसरा बंधुओं नितिन और चेतन के अलावा दीप्ति संदेसरा पर 14,500 करोड़ रुपये का बैंक लोन घोटाला करने का आरोप है। पकड़े जाने के डर से यह देश छोड़ कर भाग गये हैं। सरकार ने उन्हें भगोड़ा घोषित किया है। यह संदेसरा बंधु अपनी शानो-शौकत के लिये भी जाने जाते थे। उनके घर पर बॉलीवुड हस्तियों के साथ होने वाली पार्टियाँ खूब सुर्खियाँ बटोरती थी। कारोबार बढ़ाने के नाम पर संदेसरा बंधुओं ने स्टर्लिंग बायोटेक के नाम से 5,383 करोड़ रुपये का लोन लिया था। यह लोन आंध्रा बैंक की अगुवाई वाले बैंकों के समूह ने दिया था। हालाँकि बाद में जान-बूझ कर संदेसरा बंधुओं ने लोन नहीं चुकाया। इसके बाद बैंकों की शिकायत पर सीबीआई ने अक्टूबर-2017 में इस कंपनी और उसके प्रमोटरों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने दर्ज एफआईआर में कहा था कि, एक विश्वसनीय स्रोत से सूचना मिली है कि स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड, उसके निदेशक व अन्य लोगों ने मिल कर गलत नीयत आंध्रा बैंक व सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य बैंकों को धोखा देने के इरादे से आपराधिक षड़यंत्र रचा था। ईडी ने अपनी जाँच में पाया कि स्टर्लिंग बायोटेक ने बैंकों से कर्ज लेने के लिये अपनी प्रमुख कंपनियों की बैलेंस शीट में आँकड़ों की हेराफेरी की। कर्ज लेने के बाद उन्होंने पैसा विभिन्न शैल कंपनियों के जरिए उन कामों में लगाया, जिसके लिये लोन नहीं दिया गया था। इस मामले में ईडी अभी तक अहमद पटेल के बेटे से तीन बार पूछताछ कर चुकी है। जुलाई महीने में ईडी अहमद पटेल के दामाद इरफान सिद्दीकी का बयान भी रिकॉर्ड कर चुका है। संदेसरा समूह के एक कर्मचारी सुनील यादव से भी केन्द्रीय जाँच एजेंसी पूछताछ कर चुकी है। इस कर्मचारी ने ही संदेसरा बंधुओं के राजनीतिक संबंध होने की बात कही थी। फैज़ल पटेल, इरफान सिद्दीकी की संदेसरा बंधुओं के साथ लेन-देन के बारे में बात की थी। ईडी संदेसरा बंधुओं के साथ संबंधों और उनके साथ लेन-देन को लेकर ही फैज़ल पटेल और इरफान सिद्दीकी से पूछताछ कर रही है। अहमद पटेल गुजरात के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हैं, वह गुजरात से राज्यसभा के सांसद हैं और कांग्रेस के कोषाध्यक्ष भी हैं।

इससे पहले शिवकुमार पर कसा शिकंजा

इससे पहले इसी महीने 3 सितंबर को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता डीके शिवकुमार को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी से पहले ईडी ने उनसे 4 बार पूछताछ की थी। शिवकुमार के दिल्ली स्थित निवास सहित 60 जगहों पर 2017 में आयकर विभाग ने छापे मारे थे, इन छापों में उनके पास से लगभग 11 करोड़ की नकद रकम मिली थी और करोड़ों रुपये की संपत्ति का पता चला था। इसके बाद ईडी ने उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का भी मुकदमा दर्ज किया था। जाँच के दौरान एजेंसी को पता चला था कि डीके शिवकुमार के इशारे पर उनके कुछ करीबी दिल्ली के चांदनी चौक से कैश बैग में भर कर बताए गये पतों पर पहुँचाने का काम करते थे, यानी कि शिवकुमार के तार हवाला से जुड़े थे। इसके अलावा उनके खिलाफ जाँच में करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी का मामला भी सामने आया था। बताया जाता है कि शिवकुमार के खिलाफ कर्नाटक बीजेपी की ओर से मामला दर्ज कराया गया था।

तिहाड़ जेल में बंद हैं पी. चिदंबरम

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता, पेशे से वकील और पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबर आईएनएक्स (INX) मीडिया के भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किये गये हैं। गुरुवार को कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जिसके बाद उन्हें तिहाड़ जेल के उस हिस्से में रखा गया है, जहाँ सामान्यतः प्रवर्तन निदेशालय के मामलों से जुड़े आरोपियों को रखा जाता है। उन्हें तिहाड़ की जेल संख्या 7 के उसी विशेष सेल में रखा गया है, जहाँ उनके बेटे कार्ति चिदंबरम को भी 12 दिनों के लिये रखा गया था। दोनों पिता-पुत्र के खिलाफ एक मामले में अलग-अलग आरोप दर्ज हैं। इस केस में चिदंबरम को 21 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें अदालत ने 5 दिन की सीबीआई की हिरासत में सौंपा था। इसके बाद 26 अगस्त को 4 दिन की कस्टडी में भेजा। इसके बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। आईएनएक्स मीडिया को 326 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा के निवेश के लिये फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रोमोशनल बोर्ड से अवैध तरीके से स्वीकृति दिलाने के लिये पी. चिदंबरम पर रिश्वत लेने का आरोप लगा है। उनकी और उनके बेटे की संपत्ति देश-विदेश तक फैली है।

सोनिया गांधी के दामाद भी कर चुके मनी लॉन्ड्रिंग का सामना

सोनिया गांधी के दामाद, राहुल गांधी के बहनोई और प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा भी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में ईडी की पूछताछ का सामना कर चुके हैं। उनके खिलाफ लंदन में 12 ब्रायनस्टन स्क्वायर पर 19 लाख पाउंड की संपत्ति की खरीद में कथित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच की गई थी।

क्या है मनी लॉन्ड्रिंग ?

अवैध ढंग से कमाए गये काले धन को वैध तरीके से कमाए गये धन के रूप में परिवर्तित करने को मनी लॉन्ड्रिंग कहा जाता है। मनी लॉन्ड्रिंग काले धन को छुपाने का एक तरीका है। काले धन को सफेद कर देने से सरकार को करोड़ों रुपये के टैक्स की चपत लगती है, क्योंकि सरकार के पास इस धनराशि का कोई लेखा-जोखा नहीं होता है। भारत में मनी लॉन्ड्रिंग को हवाला लेनदेन के रूप में भी जाना जाता है। इसके अंतर्गत फर्जी कंपनियाँ बनाकर पैसों का निवेश किया जाता है, जिन्हें शैल कंपनियाँ भी कहते हैं, जो केवल कागजों पर ही होती हैं। भारत में मनी लॉन्ड्रिंग कानून 2002 में अधिनियमित किया गया था, परंतु इसमें 3 बार (2005, 2009 तथा 2012 में) संशोधन किया जा चुका है। 2012 के अंतिम संशोधन को जनवरी-3, 2013 को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त हुई थी और यह कानून 15 फरवरी-2013 से लागू हुआ था।

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