कौन हैं ये 3 अधिकारी, जिन्होंने वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम की ‘मनमानी’ का ‘कच्चा चिट्ठा’ खोला ?

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 24 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। देश के पूर्व वित्त मंत्री, पूर्व गृह मंत्री, वरिष्ठ अर्थशास्त्री और दिग्गज कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम की मुश्किलें आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं। भले ही चिदंबरम को फिलहाल उच्चतम् न्यायालय (SC) से यह राहत मिल गई हो कि वित्तीय अनियमितताओं की जाँच करने वाला प्रवर्तन निदेशालय (ED) चिदंबरम को अगले आदेश तक गिरफ्तार न करे, परंतु यह कहना कि इससे चिदंबरम की आगे की राह आसान हो जाएगी, अतिश्योक्ति होगा।

दरअसल वित्त मंत्री रहते हुए पी. चिदंबरम ने अपने रसूख का ऐसा दुरुपयोग किया, जिसने वित्त मंत्रालय से जुड़े कई विभागों और उनके अधिकारियों को मौन रहने पर विवश कर दिया। एक वित्त मंत्री के आगे भला कोई अधिकारी क्या, कितना और कैसे कुछ बोल सकता है ? चूँकि अब चिदंबरम वित्त मंत्री नहीं हैं, तब उनके कार्यकाल के दौरान उनके अधीन काम करने वाले 3 अधिकारियों ने चिदंबरम के विरुद्ध ऐसे बयान दिए हैं, जो चिदंबरम पर ट्रिपल अटैक करेंगे और उन्हें सीबीआई और ईडी के बुने गए जाल में मजबूती से फँसा देंगे।

31 घण्टों तक फरार रहने के बाद चिदंबरम फिलहाल INX मीडिया केस और अवैध धन शोधन जैसे मामलों में केन्द्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) की हिरासत में हैं, परंतु ईडी भी चिदंबरम को शीघ्र ही शिकंजे में लेगा। सुप्रीम कोर्ट से मार्ग प्रशस्त होने की प्रतीक्षा कर रहे ईडी के पास चिदंबरम को फँसाने वाले जाल को और मजबूत बनाने के लिए वित्त मंत्रालय के उन तीन अधिकारियों के बयान रिकॉर्ड हैं, जो चिदंबरम के वित्त मंत्री रहते हुए वित्त मंत्रालय में सेवारत् थे।

कौन हैं ये 3 टॉप अधिकारी ?

वित्त मंत्रालय में काम कर चुके शीर्षस्थ तीन अधिकारियों के नाम हैं डी. सुब्बाराव, डी. के. सिंह और पी. के. बग्गा। इन तीन पूर्व वित्त अधिकारियों ने ईडी के समक्ष जो बयान रिकॉर्ड करवाए हैं, वे चिदंबरम की सभी दलीलों को ध्वस्त कर सकते हैं। इन तीनों अधिकारियों ने चिदंबरम की वित्त मंत्री के रूप में की गई मनमानी का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है। इन तीनों की गवाही चिदंबरम के इर्द-गिर्द बुने गए ईडी के जाल को मजबूत बनाएगी और चिदंबरम किसी भी तरह इस जाल से निकल नहीं पाएँगे।

FIPB के निर्देशों का उल्लंघन

जब आईएनएक्स घोटाला हो रहा था, तब वित्त मंत्री चिदंबरम के मातहत काम करने वाले आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव डी. सुब्बाराव ने ईडी को दिए अपने बयान में कहा, ‘विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) इकाई को आईएनएक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड से इस बात की पुष्टि की जानी चाहिए थी कि क्या वास्तव में आईएनएक्स न्यूज़ प्राइवेट लिमिटेड में डाउनस्ट्रीम इनवेस्टमेंट हुआ है ? यदि इसकी पुष्टि हो जाती, तो यह सीधा-सीधा एफआईपीबी के निर्देशों के उल्लंघन का मामला था। उस समय एफआईपीबी इकाई का उत्तरदायित्व था कि वह उचित निर्णय के लिए एफआईपीबी को इस मामले से अवगत कराए, परंतु ऐसा नहीं किया गया।’

RBI को रखा गया अंधेरे में

चिदंबरम पर शिकंजा कसने वाला एक और बयान एफआईपीबी के तत्कालीन अध्यक्ष डी. के. सिंह ने दिया है। सिंह ने ईडी के समक्ष दिए बयान में कहा, ‘आईएनएक्स मीडिया को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) से केवल 4.62 करोड़ रुपये प्राप्त करने की अनुमति मिली थी। ऐसे में अनुमति से अधिक एफडीआई मंगाने और एफआईपीबी मंजूरी के बिना 305 करोड़ रुपए के डाउनस्ट्रीम इन्वेस्टमेंट की शिकायत भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) से की जानी चाहिए थी, जो नहीं की गई।’

चिदंबरम करते रहे मनमानी

सुब्बाराव और सिंह के बयानों से स्पष्ट है कि वित्त मंत्री के रूप में पी. चिदंबरम मनमानी करते रहे और कोई अधिकारी उनके रसूख के आगे कुछ बोल न सका। आरबीआई को तो चिदंबरम की नाक के नीचे हो रहे कथित भ्रष्टाचार की भनक तक नहीं लगने दी गई। चिदंबरम के मातहत वित्त मंत्रालय में पूंजी बाजार और निवेश विभाग के विशेष कार्याधिकारी (OSD) के रूप में काम कर चुके पी. के. बग्गा ने कहा कि आईएनएक्स मीडिया केस ही नहीं, अपितु प्राप्त अनुमति से इतर या अधिक निवेश प्राप्त करने जैसी किसी भी तरह की गतिविधि की जानकारी आरबाई को दी जानी चाहिए थी, परंतु चिदंबरम ने एक सोची-समझी रणनीति या साज़िश के तहत इस पूरे मामले में आरबीआई को लगातार अंधेरे में रखा।

अब अधिकारियों को ज़िम्मेदार ठहरा रहे चिदंबरम

ईडी की जाँच में पाया गया कि एफआईपीबी इकाई को आयकर विभाग (IT DEPARTMENT) और आईएएक्स मीडिया से मिले जवाबों में डाउनस्ट्रीम इन्वेस्टमेंट की जानकारी मिल गई थी, परंतु एफआईपीबी इकाई ने न तो एफआईपीबी को और न ही आरबीआई को जानकारी दी, उसने उल्टे आईएनएक्स मीडिया को डाउनस्ट्रीम इन्वेस्टमेंट के लिए अलग से मंजूरी देने के लिए कहा। परिणामस्वरूप आईएनएक्स मीडिया ने एफआीपीबी से डाउनस्ट्रीम इन्वेस्टमेंट की मंजूरी मांगी और उसे मिल भी गई। इस क्रम में यह तथ्य जान-बूझ कर छिपाया गया। दूसरी तरफ चिदंबरम इन तमाम चूकों के लिए अधिकारियों को उत्तरदायी ठहरा कर उन्हें ही जेल में डालने की बात कह रहे हैं। सीबीआई की विशेष अदालत में चिदंबरम के वरिष्ठ वकील ने मांग की कि एफआईपीबी अप्रूवल 6 सचिवों ने दिया था। यदि सीबीआई को एफआईपीबी के निर्देशों का उल्लंघन पता चला है, तो वह उन सचिवों को गिरफ्तार करे।

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