जानिए दादर का यह ‘कोहिनूर’ कैसे ‘दाद’ बन गया राज ठाकरे के लिए ?

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 22 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। वित्तीय अनियमितताओं पर निगरानी रखने वाला प्रवर्तन निदेशालय (ED) पिछले कुछ वर्षों से अत्यंत सक्रिय हो गया है। विशेषकर केन्द्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद ईडी के पास मानो मामलों का ढेर लग गया है। एक तरफ ईडी मंगलवार और बुधवार यानी दो दिनों तक लोप्रोफाइल आईएनएक्स मीडिया घोटाले के हाईप्रोफाइल आरोपी नेता पी. चिदंबरम को शिकंजे में लेने की मशक्कत करता रहा, वहीं दूसरी ओर उसने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे को भी नोटिस भेज कर महाराष्ट्र की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया।

महाराष्ट्र में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में भारतीय जनता पार्टी (BJP-भाजपा) के नेतृत्व वाली मोदी सरकार देश में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के प्रयासों के तहत पूरी तरह एक्शन में है। इस एक्शन का नतीजा यह हुआ है कि ईडी ने कोहिनूर सीटीएनएल मामले में एमएनएस अध्यक्ष राज ठाकरे पर शिकंजा कसा है। इस मामले में महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी शिवसेना के वरिष्ठ नेता मनोहर जोशी के पुत्र उन्मेश जोशी भी आरोपी हैं। एमएनएस ने जहाँ राज ठाकरे को ईडी के नोटिस को बदले की कार्रवाई बताया, वहीं शिवेसना नेता उद्धव ठाकरे ने आशा जताई कि राज ठाकरे से पूछताछ में ईडी को कुछ हासिल नहीं होगा।

पिछले तीन दिनों से देश की जाँच एजेंसियाँ ईडी और केन्द्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) काफी व्यस्त और चर्चा में हैं। दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद ईडी और सीबीआई के सामने कांग्रेस के दिग्गज नेता, पूर्व केन्द्रीय गृह व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को शिकंजे में लेने की बड़ी चुनौती थी, वहीं आज महाराष्ट्र में एमएनएस नेता राज ठाकरे से पूछताछ न केवल ईडी के लिए, अपितु महाराष्ट्र की देवेन्द्र फडवणीस सरकार के लिए भी चुनौती समान घटनाक्रम है, क्योंकि एमएनएस कार्यकर्ता अपनी तथाकथित गुंडागर्दी के लिए कुख्यात हैं। यही कारण है कि एक तरफ राज ठाकरे ने कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने की अपील की है, वहीं महाराष्ट्र शासन-प्रशासन दोनों ही किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए पहले से ही तैयार हैं।

क्या है कोहिनूर स्क्वेयर ?

दरअसल मुंबई के दादर में कोहिनूर स्क्वेयर नामक एक सेमी ट्विन टावर है। इसका निर्माण 13 साल पहले हुआ था। दिखने में अमेरिका के इतिहास बन चुके वर्ल्ड ट्रेड सेंटर जैसा है, परंतु ऊँचाई कम है। कोहिनूर स्क्वेयर 52 व 35 मंजिलों की मिक्स्ड स्काईस्क्रेपर इमारत है, जो कोहिनूर सीटीएनएल नामक कंपनी की सम्पत्ति है। कोहिनूर स्क्वेयर की पाँच मंजिलों पर एक आलिशान मॉल है। जिस ज़मीन पर कोहिनूर स्क्वेयर खड़ा है, उस ज़मीन की खरीदारी में वित्तीय घोटाले का आरोप है।

किसने खरीदी थी ज़मीन ?

जिस जमीन पर कोहिनूर स्क्वेयर का निर्माण किया गया है, उसे राज ठाकरे, उन्मेश जोशी और राजेन्द्र शिरोडकर ने खरीदा था। यहाँ पहले कोहिनूर मिल हुआ करती थी। कोहिनूर मिल की इस ज़मीन का सौदा 13 साल पहले 421 करोड़ में हुआ था। कहा जाता है कि खरीदारों ने कौड़ियों के दाम में यह ज़मीन खरीदी। इसके लिए उस समय राज ठाकरे की आलोचना भी हुई थी। लोगों ने मराठी अस्मिता की राजनीति करने वाले राज को मराठी मज़दूरों का रोजगार छीनने के लिए ज़िम्मेदार ठहराया था। इन आलोचनाओं का राज ठाकरे ने कुछ यह तोड़ निकाला। उन्होंने कोहिनूर मिल की ज़मीन पर कोहिनूर स्क्वेयर के शिलान्यास समारोह में घोषणा की कि 100 मिल मजदूरों के एक-एक पुत्र को इस आलिशान प्रोजेक्ट में नौकरी दी जाएगी। घोषणा तो हो गई और यह एक-दो दिन में लागू होने वाली घोषणा थी नहीं। समय बीता और राज ठाकरे 2009 में अपने शेयर बेच कर इस प्रोजेक्ट से अलग हो गए।

ईडी ने क्यों दखल दिया ?

यहाँ तक तो मामला राज ठाकरे सहित तीन ज़मीन खरीदारों और मिल मज़दूरों के बीच का था, परंतु ईडी को इस कोहिनूर स्क्वेयर के निर्माण में लिए गए लोन को लेकर दखल देना पड़ा। इस ज़मीन को खरीदने के लिए आईएल एण्ड एफएस नामक कंपनी से लोन लिया गया था। यह इन्फ्रा, फाइनांस और ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़ी नॉन-बैंकिंग फाइनांस कंपनी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आईएल एण्ड एफएस ने कोहिनूर स्क्वेयर प्रोजेक्ट में 225 करोड़ रुपए लगाए थे, जिसमें उसे 135 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा। बताया जाता है कि राज ठाकरे के बाद इस कंपनी ने भी 2008 में ही अपने शेयर महज़ 90 करोड़ में सरेंडर कर दिए थे। बाद में कंपनी ने प्रोजेक्ट के लिए लोन भी दिया, जो कोहिनूर सीटीएनएल न चुका सकी। पिछले साल आईएल एंड एफएस नकदी संकट में घिर गई और उस पर 91,000 करोड़ रुपए का क़र्ज़ हो गया। कंपनी के डूबने की नौबत आई, सरकार को मामले में दखल देना पड़ा। फिर ईडी मनी लॉण्ड्रिंग की जाँच करने लगा। ईडी ने पिछले हफ्ते मुंबई की विशेष अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल की, जिसके अनुसार आईएल एंड एफएस के अधिकारियों ने कई निजी कंपनियों को डिफॉल्ट के बावजूद ऋण दिए। ऐसी ही एक कंपनी है कोहिनूर सीटीएनएल, जिससे कभी राज ठाकरे जुड़े हुए थे। इसी कारण ईडी ने राज ठाकरे को पूछताछ के लिए बुलाया।

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