नापाक हरकतों ने कच्छ की खाड़ी के एक हिस्से को बना दिया ‘हरामी नाला !’

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 30 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। पाकिस्तान शुरू से ही भारत से मुँह की खाता आया है, परंतु अपनी नापाक हरकतों से बाज़ आने का नाम नहीं ले रहा। पहले पंजाब में खालिस्तान के नाम पर उसने आतकंवादी गतिविधियों को अंजाम दिया, वहाँ से मात खाने के बाद जम्मू कश्मीर पर नापाक नज़र डाली। अब जब भारत ने वहाँ भी उसे पीछे धकेल दिया तो अब वह भारत में आतंकियों की घुसपैठ के लिये नये रास्ते तलाश रहा है। इसी बीच भारतीय गुप्तचर एजेंसियों को खबर मिली है कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने पानी के अंदर से आतंकी हमला करने के लिये कुछ कमांडो को तैयार किया है। इन कमांडो को दूर तक तैरने और पानी के अंदर से घुसपैठ करने के साथ-साथ पानी के अंदर से ही आतंकी हमला करने की विशेष ट्रेनिंग दी गई है। गुप्तचर एजेंसियों को यह भी पता चला है कि ऐसे कुछ कमांडो कच्छ की खाड़ी में स्थित सर क्रिक क्षेत्र में हरामी नाला के रास्ते भारत में घुसपैठ कर सकते हैं अथवा घुस चुके हो सकते हैं। इस खबर से गुजरात के समुद्री तट पर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और इन कमांडो की तलाश में जुट गई हैं।

सबसे पहले तो यह सवाल उठता है कि कच्छ की खाड़ी में सर क्रिक और हरामी नाला क्या हैं ? इसका जवाब है कि अरब सागर में स्थित कच्छ की खाड़ी में 96 किलोमीटर लंबा दलदली इलाका सर क्रीक कहलाता है और इसी इलाके में 22 किलोमीटर लंबा समुद्री क्षेत्र ‘हरामी नाला’ कहलाता है। चूँक इस क्षेत्र में समुद्री पानी का स्तर घटता-बढ़ता रहता है, इसलिये यह हरामी नाला नामक इलाका तस्करों और घुसपैठियों के लिये आसान टारगेट बन गया है। इन्हीं हरकतों की वजह से गुजराती प्रजा ने इस 22 कि.मी. लंबे इलाके को ‘हरामी नाला’ नाम दिया है।

कच्छ की खाड़ी के दलदली इलाके सर क्रीक पर विवाद

सर क्रीक इलाका पश्चिम में पाकिस्तान के सिंध प्रदेश की सीमा से जुड़ा है, जबकि पूर्व में भारत के गुजरात प्रदेश में स्थित कच्छ जिले से जुड़ा है। भारत और पाकिस्तान के बीच इसी सर क्रीक इलाके की सीमा का विवाद है, परंतु यह विवाद चर्चा में बहुत कम ही आता है। दरअसल यह विवाद कच्छ के रेगिस्तान में स्थित 96 किलोमीटर लंबे मुहाने को लेकर है, जो गुजरात को पाकिस्तान के सिंध प्रांत से अलग करता है। अंग्रेज शासन के दौरान ईस्ट इंडिया कंपनी के सेनापति चार्ल्स नैपियर ने 1842 में सिंध प्रांत को जीतने के बाद उसका प्रशासनिक संचालन मुंबई राज्य को सौंप दिया था। इसके साथ ही अंग्रेज हुकूमत ने सिंध और मुंबई प्रांत के बीच सीमा रेखा भी खींची थी। यह रेखा कच्छ के बीच से गुजरती थी। इसमें पूरी खाड़ी सिंध प्रांत में दिखाई गई थी। अर्थात् कच्छ के मूल प्रदेश से इस खाड़ी को अलग करके सिंध में जोड़ दिया गया था। दूसरी तरफ दिल्ली स्थित अंग्रेज सरकार ने अपने अधिकृत नक्शे में सिंध और कच्छ के बीच की सीमा रेखा को कच्छ के रण तक खींचने के बाद खाड़ी प्रदेश के पास रोक दिया था। स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान ने खाड़ी प्रदेश पर हक जताया। इसके जवाब में भारत का प्रस्ताव था कि कच्छ के रेगिस्तान से लेकर खाड़ी के मुख तक की एक सीधी रेखा को सीमा रेखा मान लिया जाए, परंतु पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव को मंजूर नहीं किया। इस कारण सिर की खाड़ी का लगभग 650 वर्ग किलोमीटर हिस्सा विवादित क्षेत्र बना हुआ है। इस क्षेत्र से पाकिस्तानी रेंजरों द्वारा भारतीय मछुआरों का अपहरण करके ले जाने की खबरें अक्सर आती रहती हैं।

हरामी नाला क्या है ?

भारत और पाकिस्तान के बीच 96 किलोमीटर लंबे विवादित सर क्रीक समुद्री भाग में 22 किलोमीटर लंबा हरामी नाला क्षेत्र है। यहाँ ऋतुओं के अनुसार समुद्री पानी का स्तर घटने-बढ़ने के साथ-साथ लगातार जल स्तर में बदलाव होता है। इसी कारण यह समुद्री क्षेत्र तस्करों और घुसपैठियों के लिये स्वर्ग समान बन गया है। तस्करी और घुसपैठ की हरकतों के कारण गुजराती प्रजा ने इस 22 किलोमीटर लंबे समुद्री इलाके को ‘हरामी नाला’ नाम दिया है।

2008 में जब मुंबई पर 26/11 का आत्मघाती आतंकी हमला हुआ था, तब भी लश्करे-तैयबा के आतंकी इसी हरामी नाला के रास्ते गुजरात की समुद्री सीमा में घुसे थे और पोरबंदर के मछुआरों की हत्या करके उनकी कुबेर नामक बोट लेकर मुंबई गये थे। इसी कारण इस क्षेत्र को अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। अब एक बार फिर देश की गुप्तचर एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने पानी के अंदर से आतंकी हमला करने के लिये कुछ कमांडो को तैयार किया है, जिन्हें पानी के अंदर दूर तक तैरने और पानी के अंदर से ही आतंकी हमलों को अंजाम देने की विशेष तालीम दी गई है। गुप्तचर एजेंसियों को यह भी पता चला है कि ऐसे कुछ प्रशिक्षित कमांडो हरामी नाला के रास्ते गुजरात में घुसपैठ कर सकते हैं अथवा कदाचित कर चुके हैं। इस इनपुट के बाद राज्य के 1600 किलोमीटर लंबे समुद्री तट पर हर जगह चौकसी बढ़ा दी गई है। विशेषकर आतंकी बंदरगाहों को निशाना न बना सकें, इसके लिये कांडला बंदरगाह समेत सभी सरकारी और निजी बंदरगाहों को सतर्क कर दिया गया है तथा भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल, तटीय पुलिस, पोर्ट प्राधिकरण और सामान्य पुलिस के अलावा कस्टम को भी अलर्ट रखा गया है। सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों की तलाश में तटीय क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन भी चला रही हैं।

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