कौन है यह ब्रिटिश वकील, जिसने कश्मीर मुद्दा ICJ में ले जाने के लिए पाकिस्तान के कान भरे !

Written by

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 22 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। संयुक्त राष्ट्र (UN), अमेरिका (US) और चीन की शह पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) तक कश्मीर मुद्दा उठाने के बाद भी पाकिस्तान के हाथ जब खाली के खाली रहे, तो छटपहाट में उसने अब कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय न्यायिक न्यायालय (ICJ) में ले जाने का निर्णय किया है। पाकिस्तान की सूचना एवं प्रसारण मंत्री आशिक़ अवान ने कहा कि पाकिस्तान आईसीजे में कश्मीर का मुद्दा मानवाधिकारों के हनने को आधार बनाते हुए उठाएगा।

भारत ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 क्या हटाई, पाकिस्तान पूरी तरह बौखला गया। राष्ट्रपति आरिफ अल्वी से लेकर प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगी गत 5 अगस्त से कश्मीर मुद्दे पर जल-भुन रहे हैं। इमरान सरकार ने भारत के विरुद्ध कई कूटनीतिक कदम उठाए, जो पाकिस्तान पर ही भारी पड़े। पाकिस्तान सदैव यह चाहता है कि कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण किया जाए, जबकि भारत हर मंच से कह चुका है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न अंग और आंतरिक मामला है, परंतु पाकिस्तान की राजनीति ही पूरी तरह कश्मीर पर केन्द्रित है। इसीलिए जब चहुँओर से शिकस्त मिली, तो अब पाकिस्तानी हुक़्मरानों ने आईसीजे का रुख करने का निर्णय किया है।

पाकिस्तान में एकराय नहीं, पर इमर्सन ने कान भरे

इमरान सरकार के कश्मीर में मानवाधिकारों के हनन को आधार बना कर इस मुद्दे को आईसीजे में ले जाने के फ़ैसले पर पाकिस्तान में ही एकराय नहीं थी। प्रधानमंत्री इमरान खान, विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी, विधि मंत्री आशिक़ अवान और पाकिस्तान में मौजूद अंतरराष्ट्रीय कानूनों के जानकार असमंजस में थे, परंतु ब्रिटिश बैरिस्टर बेन इमर्सन की सलाह पर पाकिस्तान ने अंतत: आईसीजे में कश्मीर में मानवाधिकारों के हनन का मुद्दा उठाने का निर्णय किया। पीटीआई के अनुसार बेन इमर्सन ने ही इमरान मंत्रिमंडल के एक सदस्य को कश्मीर मुद्दे को आईसीजे में उठाने की सलाह दी। इसके बाद विदेश मंत्री क़ुरैशी ने कश्मीर मुद्दे को आईसीजे में ले जाने की घोषणा की।

कौन हैं बेन इमर्सन ?

बेन इमर्सन ब्रिटेन के बैरिस्टर हैं और संयुक्त राष्ट्र में काउंटर टेररिज़्म एण्ड ह्यूमन राइट्स मुद्दों पर विशेष दूत रह चुके हैं। कदाचित बेन इमर्सन को भी यही लगता है कि कश्मीर में बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। वे 2011 से 2017 तक यूएन में आतंक निरोध व मानवाधिकारों के मुद्दों के विशेष दूत रहे हैं। बेन इमर्सन हाल में युगोस्लाविया और रवांडा के लिए संयुक्त राष्ट्र की ओर से बैठाए गए क्रिमिनल ट्रिब्यूनल्स के अपील्स चैम्बर जज हैं। इससे पहले वे अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत (ICC) के विशेष सलाहकार तथा कम्बोडिया स्थित यूएन-बैक्ड ख्मेर रफ ट्रिब्यूनल (ECCC) की अपील्स चैम्बर के विशेष सलाहकार के रूप में काम कर चुके हैं।

इमरान-इमर्सन का भ्रम तोड़ती तसवीरें

इस बीच कश्मीर घाटी के त्राल से आज कुछ ऐसी तसवीरें आईं, जिन्हें देख कर इमरान खान और बेन इमर्सन के मन में पैदा हुए मानवाधिकारों के उल्लंघन का भ्रम टूट जाएगा। इन तसवीरों में त्राल के स्थानीय युवकों को शांत माहौल में क्रिकेट खेलते हुए देखा जा सकता है। ये तसवीरें बुधवार की हैं, जहाँ त्राल के कुछ युवा क्रिकेट खेलते नज़र आ रहे हैं। इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए त्राल के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से उम्मीद जताई कि वे कश्मीर के विकास के लिए श्रेष्ठ कार्य करेंगे।

Article Categories:
News

Comments are closed.

Shares