देश के पहले ‘चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ’ बने जनरल बिपिन रावत को जानिए !

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 30 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारतीय थलसेना के प्रमुख जनरल बिपिन रावत को रिटायरमेंट से एक दिन पहले 30 दिसंबर 2019 सोमवार को नई जिम्मेदारी मिल गई। केन्द्र सरकार ने उन्हें देश का पहला ‘चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS)’ नियुक्त किया है। जनरल रावत 31 दिसंबर 2019 को सेना प्रमुख के पद से सेवा निवृत्त हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गत 15 अगस्त को सीडीएस का नया पद तैयार करने की घोषणा की थी। इस पद के लिये वैसे तो कई सेनाधिकारियों का नाम रेस में था, परंतु रावत का नाम सबसे आगे चल रहा था। केन्द्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने इस नियुक्ति की जानकारी दी। इस पद पर नियुक्ति के बाद कई मंत्रियों और सेनाधिकारियों ने जनरल रावत को सीडीएस बनने की बधाई दी।

तीनों सेनाओं के बीच सामंजस्य की जिम्मेदारी निभाएँगे CDS

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसी साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश की सुरक्षा की मजबूती के लिये तीनों सेनाओं थलसेना, वायुसेना और नौसेना के बीच सामंजस्य बैठाने के लिये चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का नया पद तैयार करके उस पर सुयोग्य अधिकारी की नियुक्ति करने की घोषणा की थी। सोमवार को जनरल बिपिन रावत के नाम पर मुहर लगते ही देश के प्रथम सीडीएस बनने का तमगा उनके नाम हो गया। इस पद के लिये पहले रिटायरमेंट की उम्र सीमा 62 वर्ष तय की गई थी, परंतु बाद में इसे बढ़ाकर 65 वर्ष कर दिया गया है। इस प्रकार इस पद का कार्यकाल 3 साल बढ़ाया गया है। इस पद की रेस में जनरल रावत के अलावा लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवणे, उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह और दक्षिणी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सतिंदर कुमार सैनी के नाम भी शामिल थे। सरकार ने तय किया था कि यह पद फोर स्टार वाले सैन्य अधिकारी को दिया जाएगा। सीडीएस भी अन्य सेना प्रमुखों के समान ही होंगे। केवल प्रोटोकॉल की सूची में सीडीएस को सेना प्रमुखों से वरिष्ठ बनाया गया है। उनका वेतन भी सेना प्रमुख के समान ही होगा। सीडीएस सैन्य मामलों के विभाग के प्रमुख होंगे, जो रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत तैयार किया जाएगा, वह इसके सचिव के रूप में काम करेंगे। अन्य देशों से युद्ध की स्थिति में तीनों सेनाओं के बीच सीडीएस प्रभावी समन्वय स्थापित करेंगे, ताकि दुश्मनों से सक्षम तरीके से निपटा जा सके। दरअसल, पूर्व में सशस्त्र बलों की ऑपरेशनल प्लानिंग में कई बार खामियों को देखते हुए यह नया पद तैयार किया गया है। सीडीएस नये सैन्य उपकरण की खरीद को लेकर उठने वाले विवादों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। सीडीएस अपने विवेक और अनुभव के आधार पर यह सुनिश्चित करेंगे कि तीनों में से किस सेना को पहले और कितने सैन्य उपकरणों की जरूरत है।

कौन हैं नये सीडीएस ?

जनरल बिपिन रावत 16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में जन्मे हैं। उनका परिवार कई पीढ़ियों से सेना में जुड़कर देश की सेवा कर रहा है। उनके पिता लक्ष्मण सिंह रावत भी सेना में लेफ्टिनेंट जनरल रह चुके हैं। रावत की स्कूली शिक्षा देहरादून के कैंब्रियन हॉल स्कूल, सेंट एडवर्ड स्कूल शिमला, नेशनल डिफेंस अकादमी खडकवासला और इंडियन मिलिट्री अकैडमी देहरादून में हुई है। उन्होंने डिफेंस सर्विसेज़ स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन, हायर कमांड एंड नेशनल डिफेंस कॉलेज के कोर्सेज में ग्रेज्युशन किया है और फोर्ट लीववर्थ, यूएसए में कमांड एंड जनरल स्टाफ कोर्स में भी भाग ले चुके हैं। उन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी से डिफेंस स्टडीज़ में एमफिल, मैनेजमेंट में और कंप्यूटर स्टडीज़ में डिप्लोमा किया है। 2011 में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ में सैन्य मीडिया शैक्षिक अध्ययन पर शोध के लिये उन्हें डॉक्टरेट ऑफ फिलॉसफी से सम्मानित किया गया था। 16 दिसंबर 1978 को उन्हें 11 गोरखा राइफल्स की 5वीं बटालियन में कमीशन किया गया था। यह यूनिट उनके पिता की ही थी। जनरल बिपिन रावत आईएमए देहरादून से स्वॉर्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित हो चुके हैं। उन्होंने अपने करियर में यूआईएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम, एसएम, वीएसएम के साथ वीरता और विशिष्ट सेवा के मेडल भी प्राप्त किये हैं। उन्होंने यूनाइटेड नेशन के साथ सेवारत् रहते हुए दो बार फोर्स कमांडर के कमेंडेशन से सम्मानित किया जा चुका है। आतंकवाद के विरुद्ध सैन्य अभियानों को संचालित करने का उनके पास बेहतरीन अनुभव है। उन्होंने जीवन के 10 साल ऐसे क्षेत्रों में बिताये हैं। वे 1986 में वे पूर्वी क्षेत्र में चीन के विरुद्ध ऑपरेशन में भी शामिल रहे हैं।

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