EXCLUSIVE : PM नरेन्द्र मोदी को क्यों लुभाते हैं कांग्रेस के ये ‘गांधी-सरदार’ ?

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* क्यों प्रणव दा और मनमोहन को सिर-मत्थे बैठाते हैं मोदी ?

* नेहरू-इंदिरा को कभी नहीं, पर राव को श्रद्धांजलि देना क्यों नहीं भूले मोदी ?

* कांग्रेस ने ‘परिवार’ के बाहर ‘चमकते हीरों’ की क्यों की अवहेलना ?

* सरदार-अंबेडकर को भारत रत्न नेहरू-इंदिरा-राजीव के बाद क्यों ?

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 28 जून, 2019 (युवाप्रेस.कॉम)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रखर-अनुशासित कार्यकर्ता, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) के कर्मठ कार्यकर्ता, गुजरात के पूर्व दीर्घकालीन मुख्यमंत्री और देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संघ और भाजपा से जुड़े अपने पुरोधा लुभाएँ, इसमें कुछ भी अनुचित नहीं है। पीएम मोदी पंडित दीनदयाल उपाध्याय, श्यामाप्रसाद मुखर्जी से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी तक के नाम गौरव और गर्व से लें, तो यह अत्यंत सहज बात है, परंतु मोदी उस समय अपनी धुर-विरोधी पार्टी कांग्रेस और उसके नेताओं को असहज कर देते हैं, जब वे अपने मुखारविंद से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल से लेकर वर्तमान दिग्गज कांग्रेस नेताओं प्रणव मुखर्जी, डॉ. मनमोहन सिंह और दिवंगत पी. वी. नरसिंह राव की प्रशंसा में फूल बरसाते हैं।

एक दल विशेष के नेता होने के बावजूद देश के प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी का राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का सम्मान करना तनिक भी अटपटा नहीं लगता, क्योंकि महात्मा गांधी और सरदार पटेल भले ही कांग्रेस के नेता थे, परंतु स्वतंत्रता के बाद ये दोनों किसी दल विशेष के नेता न रहते हुए राष्ट्र पुरुष बन गए। यहाँ तक तो ठीक है, परंतु आश्चर्य तब होता है, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पूर्व राष्ट्रपति और दिग्गज कांग्रेस नेता प्रवण मुखर्जी का मान-सम्मान करते और प्रशंसा करते देखा जाता है। इतना ही नहीं, 2014 में भी पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने शपथ ग्रहण करने से पहले अपने पूर्वाधिकारी प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से भेंट की थी, जो दिग्गज कांग्रेस नेता हैं। इसके बाद भी मोदी समय-समय पर मनोहन से मशविरा लेते रहते हैं और हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने भी बजट प्रस्तुत करने से पहले प्रखर अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह से विचार-विमर्श करने के लिए उनसे मुलाकात की।

मोदी के ‘नेहरू-गांधी’ परिवार से संबंध न रखने वाले दिग्गज कांग्रेस नेताओं के प्रति उमड़ते इस प्रेम की पराकाष्ठा तो तब हो गई, जब पीएम ने पूर्व प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिंहा राव की 98वीं जयंती पर ट्वीट कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। स्वतंत्रता के बाद से जवाहरलाल नेहरू और उनके बाद इंदिरा, संजय, राजीव, सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी के इर्ग-गिर्द घूमने वाली कांग्रेस और उसके हर बड़े नेता को नेहरू, इंदिरा, राजीव की जयंती और पुण्यतिथि अच्छी तरह याद रहती है, तो सोनिया, राहुल व प्रियंका के जन्म दिवस पर भी बधाइयों का ताँता लग जाता है, परंतु पीएम मोदी ने यह ट्वीट कर उस कांग्रेसी नेता को याद किया, जो नेहरू-गांधी परिवार से बाहर का व्यक्ति होने के बावजूद प्रधानमंत्री बना।

मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को उनकी जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि देता हूँ। वे एक महान नेता, विद्वान, अनुभवी प्रशासक थे, जिन्होंने महत्वपूर्ण समय पर देश के विकास में योगदान दिया। उनके योगदान को देश हमेशा याद रखेगा।’ उल्लेखनीय है कि राव 21 जून, 1991 से 16 मई, 1996 तक देश के प्रधानमंत्री रहे थे। उन्हें देश में हुए आर्थिक सुधारों, लाइसेंस राज साप्ति के लिए जाना जाता है।

कांग्रेस नेताओं को हथियार बना रहे मोदी

इससे पूर्व भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण के प्रति धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का उत्तर देते हुए कांग्रेस के परिवारवाद पर जम कर हमला बोला था और दोनों ही सदनों में प्रवण मुखर्जी का उल्लेख किया था। मोदी ने कहा था कि कांग्रेस अभी भी अपने परिवार के दायरे से बाहर नहीं आई है, जो अपने वरिष्ठ नेताओं का सम्मान करना नहीं जानती। कांग्रेस ने अपने पिछले लम्बे शासनकाल में प्रणवदा को भारत रत्न से सम्मानित किया, जबकि हमने किया। मोदी का इशारा यहाँ स्पष्ट है कि वे कांग्रेस को यह अहसास दिलाना चाहते हैं कि कांग्रेस पार्टी में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, परंतु पार्टी परिवार से ऊपर उठ कर देखना ही नहीं चाहती। मोदी ने तो मनमोहन और नरसिंह राव का भी सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने लम्बे शासनकाल के दौरान परिवारवाद से ऊपर उठ कर कभी भी अपनी ही पार्टी के हीरों की कद्र नहीं की। यही कारण है कि भारत का संविधान बनाने वाले कांग्रेस नेता डॉ. बाबासाहब अंबेडकर को स्वतंत्रता को स्वतंत्रता के 43 साल बाद यानी 1990 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया और वह भी ग़ैर-कांग्रेसी सरकार की ओर से, तो कांग्रेस के ही एक और नेता लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को भारत रत्न देने में कांग्रेस ने 44 साल लगा दिए। नरसिंह राव सरकार ने 1991 में सरदार पटेल को भारत रत्न से सम्मानित किया, जबकि कांग्रेस सरकारों ने सरदार-अंबेडकर से जूनियर नेता इंदिरा गांधी को 1971 में ही और नरसिंह राव से जूनियर नेता राजीव गांधी को 1991 में भारत रत्न दे दिया।

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