‘जमादार’ बनने को क्यों आतुर हैं ट्रम्प, जबकि भारत के पास पहले ही अपना ‘चौकीदार’ है ?

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 23 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। अपने शक्तिशाली सामर्थ्य की धौंस पूरी दुनिया पर जमाने के लिए सदैव आतुर रहने वाला अमेरिका और उसके सभी राष्ट्रपति अक्सर दुनिया भर के देशों में अपनी चोंच लड़ाते रहे हैं। अमेरिका का पूरा इतिहास दुनिया के अलग-अलग देशों में दखल देने, वहाँ अपनी सेना भेजने और लड़ाइयाँ लड़ने का रहा है। वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी अपने पूर्वाधिकारियों की तर्ज पर ही काम कर रहे हैं और दक्षिण कोरिया-उत्तर कोरिया, ईरान, अफग़ानिस्तान से लेकर दक्षिण एशिया के अधिकांश देशों में दखल देते आए हैं।

यही कारण है कि डोनाल्ड ट्रम्प के मन में भी पूर्व राष्ट्रपतियों की तरह जगत जमादार बनने का भूत सवार है। ट्रम्प पर यह भूत इस कदर सवार है कि वे झूठ बोलने से भी नहीं कतराते। जब ट्रम्प ने पिछले दिनों पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ वॉशिंगटन में मुलाक़ात के बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की, तब ट्रम्प ने पाकिस्तान और इमरान को खुश करने के लिए सरासर झूठ बोल दिया, ‘भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुझसे कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करने को कहा है।’ ट्रम्प की पोल उनके ही अमेरिकी प्रशासन ने खोल दी और साफ किया कि कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है। भारत ने भी ट्रम्प को करार तमाचा जड़ते हुए कहा कि मोदी ने मध्यस्थता की कोई पेशकश नहीं की थी।

कर लो मोदी से चर्चा, हासिल कुछ नहीं होगा

कश्मीर पर मध्यस्थता का झूठा दावा कर मुँह की खाने के बाद भी डोनाल्ड ट्रम्प के मनो-मस्तिष्क में जमादार बनने की कीड़ा शांत नहीं हो रहा। उन्होंने फिर एक बार नहीं, बल्कि दो-तीन बार कहा कि वे कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने को तैयार हैं। ट्रम्प ने यहाँ तक कहा कि जी-7 देशों के सम्मेलन में वे मोदी से कश्मीर मुद्दे पर चर्चा करेंगे। दरअसल भारत-पाकिस्तान के बीच बंदरबाँट की फिराक़ में है और चाहता है कि दोनों देश उसे न्यायाधीश बना दें, ताकि वह दोनों देशों से जुड़े अपने निजी हित साध सकें, परंतु ट्रम्प की दाल गलने वाली नहीं है। ट्रम्प मोदी से कितनी ही चर्चा कर लें, कुछ हासिल नहीं होने वाला है। यह नरेन्द्र मोदी है, कोई जवाहरलाल नेहरू नहीं हैं, जो कश्मीर पर एक के बाद एक भूल करते ही जाएँ। मोदी को भारत के पास मौजूद कश्मीर ही नहीं, अपितु पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) और चीन के कब्जे वाले कश्मीर अक्साइ चिन (COK) को भी भारत में मिलाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ट्रम्प के रोके रुकने वाले नहीं हैं मोदी।

भारत में चौकीदार मौजूद, जमादार की जरूरत नहीं

नरेन्द्र मोदी ने गुजरात से लेकर देश की राजनीति में अक्सर स्वयं को जनता का चौकीदार बताया है। लोकसभा चुनाव 2019 में तो तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी के विरुद्ध ‘चौकीदार चोर है’ का नारा छेड़ा था, परंतु जनता को अपने चौकीदार पर पूरा विश्वास था और जब जनता ने मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के बाद कश्मीर से धारा 370 हटाने से लेकर पी. चिदंबरम की गिरफ्तारी तक के घटनाक्रमों को देखा, तो उसे अब मोदी पर पक्का विश्वास हो गया है कि मोदी देश के असली चौकीदार हैं। ऐसे में जबकि भारत में चौकीदार के रूप में नरेन्द्र मोदी पहले से ही मौजूद हैं, तब भारत को ट्रम्प जैसे जमादार की क्या जरूरत हो सकती है ?

स्वामी का कटाक्ष, ‘चलो अफग़ानिस्तान’

डोलाल्ड ट्रम्प की कश्मीर पर मध्यस्थता करने की पहल पर भारत पहले ही करारा जवाब दे चुका है और वह अपने इस कड़े रुख पर भी कायम है कि कश्मीर का मसला भारत और पाकिस्तान के बीच का द्विपक्षीय मुद्दा है तथा इसमें किसी तीसरे देश का दखल भारत कभी स्वीकार नहीं करेगा। इस बीच भाजपा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने एक ट्वीट कर डोनाल्ड ट्रम्प पर निशाना साधा। ट्रम्प ने ट्वीट कर कहा, ‘ट्रम्प सही हैं। हमें अफग़ानिस्तान की ओर जाना चाहिए, जहाँ तालिबान भारत समर्थकों और भारत शिक्षित अफग़ानों की वर्षों से हत्या कर रहे हैं। तालिबान पीओके होते हुए अमेरिका पर हमला करने को तैयार है। अत: अमेरिका से कहिए कि यदि आप अपने सामरिक भंडार हमारे लिए खोल दें, तो हम अफग़ानिस्तान को तालिबान से मुक्त कर दें।’

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