सावधान सावंत ! गोवा में ‘आरे कॉलोनी कांड’ दोहराने से पहले जान लीजिए एक पेड़ की कीमत…

Written by

* 3 इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स के लिए 50,000 पेड़ काटने का प्रस्ताव

विशेष रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 3 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। मुंबई का आरे कॉलोनी कांड बहुचर्चित है। यहाँ मुंबई मेट्रो का शेड बनाने के लिए 2141 पेड़ काट दिए गए। पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक लोगों के कारण मामला उच्चतम् न्यायालय (SC) तक पहुँचा और फिलहाल आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई रोक दी गई है। मेट्रो शेड के लिए 27000 पेड़ों को काटा जाना था और राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) तथा मुंबई उच्च न्यायालय (HC) से हरी झंडी मिलते ही प्रशासन ने 40 घण्टों में ही 2 हजार 141 पेड़ काट डाले थे। इसका अर्थ यह हुआ कि आरे कॉलोनी में हर मिनट 1 पेड़ काटा गया।

ख़ैर, फिलहाल हम आरे कॉलोनी विवाद की बात नहीं करने जा रहे, अपितु महाराष्ट्र के पड़ोसी राज्य गोवा में आरे कॉलोनी कांड जैसा कांड न हो, उसके प्रति आगाह करने जा रहे हैं। युवाPRESS स्वयं भी इस बात को लेकर प्रतिबद्ध और वचनबद्ध है कि चाहे कितना ही बड़ा भौतिक लाभ क्यों न हो रहा हो, परंतु उसके लिए एक भी पेड़ की कटाई नहीं होनी चाहिए, क्योंकि एक पेड़ की कीमत 15 करोड़ रुपए तक होती है। हम गोवा में संभावित आरे कॉलोनी कांड दोहराए जाने को लेकर चेतावनी इसलिए दे रहे हैं, क्योंकि गोवा सरकार के समक्ष इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स के लिए 50,0000 (जी हाँ, पचास हज़ार) पेड़ों को काटने का प्रस्ताव आया है।

गोवा में मुख्यमंत्री प्रमोद कुमार सावंत के नेतृत्व वाली भाजपा गठबंधन सरकार है और हम इस आलेख के माध्यम से सावंत सरकार को सावधान करना चाहते हैं कि वे विकास के नाम पर महामूल्यवान 50,000 पेड़ों को काटने के प्रस्ताव को स्वीकृति देने से पहले एक पेड़ के सेवा मूल्य को अच्छी तरह समझ लें। कलकत्ता युनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. तारक मोहन दास ने 1979 में पेड़ों पर अध्ययन किया था और एक पेड़ की कीमत 2 लाख डॉलर आँकी थी। यदि 1979 की कीमत की महंगाई दर को ध्यान में रखते हुए आज के आधार पर गणना की जाए, तो एक पेड़ अपने औसत 50 वर्ष के जीवन में मानव सहित समग्र पृथ्वी को 15 करोड़ रुपए की सेवाएँ देता है। डॉ. दास के अध्ययन के अनुसार एक पेड़ अपने जीवन में ऑक्सीजन का उत्सर्जन, भू-क्षरण नियंत्रण, मिट्टी को उर्वरक बनाने, पानी रिसायकल करने और हवा शुद्ध करने जैसी अनेक सेवाएँ देता है। डॉ. दास ने 1979 में एक पेड़ की सेवाओं की कीमत 2 लाख डॉलर आँकी थी, जो आज के अनुसार 5 करोड़ रुपए बैठती है। दिल्ली के एक स्वैच्छिक संगठन (NGO) ग्रीन्स के 2013 के अध्ययन के मुताबिक एक स्वस्थ पेड़ वर्ष में जितनी ऑक्सीजन देता है, उस ऑक्सीजन की कीमत 30 लाख रुपए से अधिक बैठती है।

क्या यह पाप करेगी सावंत सरकार ?

वास्तव में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद कुमार सावंत की अध्यक्षता में सोमवार को राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक हुई। इस बैठक में राज्य में तीन प्रस्तावित इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए 50,000 पेड़ों को काटने का प्रस्ताव किया गया। यद्यपि मंगलवार को अधिकारियों ने बताया कि इस बैठक में पेड़ों को काटने को लेकर कोई निर्णय नहीं किया गया। बैठक में दक्षिण गोवा में दक्षिण-पश्चिम रेलवे ट्रैक पर कास्टलररॉक-कॉलेमरगाँव रेलवे लाइन को चौड़ा करने, अनमोड-मॉलेम सीमा क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन करने और मोलेम स्थित भगवान महावीर वन्य जीव अभयारण्य में नई ट्रांसमिशन लाइन के प्रोजेक्टों पर विचार किया गया, परंतु अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से मुख्यमंत्री को बताया कि यदि इन तीन विकास परियोजनाओं पर आगे बढ़ना है, तो सरार को कम से कम 50 हजार पेड़ काटने पड़ेंगे। अधिकारियों के अनुसार रेलवे मार्ग के लिए 135 एकड़ वन्य भूमि की आवश्यकता पड़ेगी, जहाँ 21,000 पेड़ काटने पड़ेंगे। राष्ट्रीय राजमार्ग प्रोजेक्ट के लिए 33 हेक्टेयर ज़मीन की ज़रूरत पड़ेगी और 12,097 पेड़ों को काटना पड़ेगा। इसी प्रकार ट्रांसमिशन लाइन प्रोजेक्ट के लिए 48 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित करनी होगी, जिस पर लगे 16,000 पेड़ काटने पड़ेंगे। अधिकारियों ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी और युवाPRESS ने विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार एक पेड़ की कीमत 15 करोड़ रुपए बता दी है। ऐसे में यदि 50,000 पेड़ काटे गए, तो उनकी कीमत 750 अरब रुपए होगी, जिसकी भरपाई करना असंभव है। ऐसे में सावंत सरकार का एक भी पेड़ को काटना महापाप से कम नहीं होगा। प्रश्न यह उठता है कि क्या सावंत सरकार पेड़ों को काटने का पाप करेगी ? क्या विकास परियोजनाओं के नाम पर जंगलों की यूँ सफाई ग्लोबल वॉर्मिंग और क्लाइमेट चेंज के ख़तरनाक परिणामों के दौर में उचित कहलाएगी ? हमने सावंत सरकार को सावधान कर दिया है। अब देखना यह होगा कि सरकार क्या करती है, परंतु आरे कॉलोनी कांड के बाद इतना तो निश्चित है कि यदि सावंत सरकार ने पेड़ों को काटने का निर्णय किया, तो पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक लोग मुंबई के बाद पणजी में भी प्रचंड विरोध करेंगे।

Article Categories:
News

Comments are closed.

Shares