‘BREXIT KING’ बन सकेंगे ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ?

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* डेविड कैमरन और थेरेसा मे रहे विफल

* दोनों प्रधानमंत्रियों को देना पड़ा त्यागपत्र

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 23 जुलाई, 2019 (युवाPRESS)। ब्रिटेन 2010 से सत्तारूढ़ कंज़र्वेटिव पार्टी के लिए ब्रेग्ज़िट सिरदर्द बन चुका है। यूरोपिय संघ (EU) से ब्रिटेन को बाहर करने के इस प्रस्ताव पर सफलता नहीं मिल पाने के कारण 11 जुलाई, 2010 को प्रधानमंत्री बने डेविड कैमरन को 13 जुलाई, 2016 को त्यागपत्र देना पड़ा। इसके बाद 13 जुलाई, 2016 को थेरेसा मे ने सत्ता की बागडोर संभाली, परंतु मे को भी सफलता नहीं मिली और उन्होंने गत 7 जून को त्यागपत्र दे दिया था। अब ब्रिटेन की कंज़र्वेटिव पार्टी ने नए प्रधानमंत्री के रूप में बोरिस जॉनसन का चुनाव किया है, जो बुधवार को शपथ ग्रहण करने वाले हैं। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या जॉनसन ब्रेग्ज़िट प्रस्ताव पर सहमति बना कर ब्रेक्ज़िट किंग सिद्ध होंगे या उन्हें भी कैमरन और मे की तरह त्यागपत्र देना पड़ेगा ?

ब्रिटेन की ईयू के साथ ब्रेग्ज़िट डील कराने के मामले में विफल रहने के बाद थेरेसा मे ने त्यागपत्र दिया था और तब से वे कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनी हुई थीं। मे के त्यागपत्र के बाद कंजर्वेटिव पार्टी में नए प्रधानमंत्री के लिए चुनाव हुआ, जिसमें 1.60 लाख कार्यकर्ताओं ने मतदान किया। इस मतदान के बाद बोरिस जॉनसन ने अपने निकटतम् प्रतिद्वंद्वी जेरेमी हंट को परास्त कर दिया। इसके साथ ही बोरिस जॉनसन के ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया। जॉनसन और हंट के बीच लगभग एक महीने से प्रधानमंत्री पद के लिए रेस चल रही थी, जिसमें जॉनसन की जीत हुई।

कौन हैं बोरिस जॉनसन ?

19 जून, 1964 को मेनहट्टन में जन्मे बोरिस जॉनसन 2015 से ब्रिटेन की संसद के सांसद हैं। वे 2001 से 2008 के दौरान भी सांसद रहे। 2008 से 2016 तक जॉनसन लंदन के महापौर (MAYOR-मेयर) के पद पर कार्यरत् रहे। ब्रिटेन की कंजर्वेटिव पार्टी सरकार के कार्यकाल के दौरान उन्होंने विदेश सचिव के रूप में भी सेवा दी। ब्रेग्ज़िट को लेकर अत्यंत कड़ा रुख अपनाने वाले जॉनसन ने थेरेसा मे के त्यागपत्र के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए प्रबल दावेदारी दर्ज कराई। उन्होंने तीन महीने के भीतर ब्रेग्ज़िट डील को डन कराने की प्रतिज्ञा ले रखी है। थेरेसा मे भी यह डील डन नहीं करा पाई थीं, जिसके चलते जॉनसन ने विदेश सचिव पद से त्यागपत्र दे दिया था। अब बोरिस जॉनसन के समक्ष ब्रेग्ज़िट डील को डन कराना ही सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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