महाराष्ट्र की महाभारत : उद्धव का ‘सत्ता मोह’ शिवसेना के पतन का कारण बनेगा ?

* शिवसेना के ‘पाप’ में जनता देगी साथ

* ट्विटर सुना रहा महाराष्ट्र का महासंदेश

विशेष टिप्पणी : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 11 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। महाभारत शब्द सुनते ही हमारे चित्त में द्वापर युग में कुरुक्षेत्र में पांडवों और कौरवों के बीच हुए युद्ध के दृश्य उभर आते हैं। यद्यपि महाभारत एक ग्रंथ है, जिसमें युद्ध के बीच शांति का महान संदेश देने वाली श्रीमद् भगवद गीता भी समाहित है, परंतु कालांतर में महाभारत शब्द युद्ध के दृश्य का पर्याय बन गया और आज भी बना हुआ है। इसीलिए भारत में जब-जब किसी मुद्दे पर बड़ा विवाद या झगड़ा होता है, तो उसे महाभारत कहा जाता है।

कुछ ऐसी ही महाभारत इन दिनों महाराष्ट्र में छिड़ी हुई है, जहाँ की जनता 21 अक्टूबर को वोट डाल कर 24 अक्टूबर को घोषित किए गए अपने स्पष्ट बहुमत वाली सरकार के जनादेश के किए जा रहे अपमान से आहत है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 में जनता के समक्ष मुख्य रूप से दो विकल्प थे। एक तरफ सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP)-शिवसेना गठबंधन, तो दूसरी तरफ कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-NCP) गठबंधन। जनता ने अपने मतदान से भाजपा-शिवसेना गठबंधन को स्पष्ट बहुमत दिया और राज्य में नई सरकार बनाने का मार्ग प्रशस्त किया, परंतु आज परिणाम घोषित होने के 19 दिनों के बाद भी लोगों को नई सरकार नहीं मिल पाई है।

महाराष्ट्र के लोगों ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन को स्पष्ट बहुमत दिया। इसके बावजूद यदि वहाँ राजनीतिक महाभारत का युद्ध छिड़ा है, तो इसके पीछे भी द्वापर युग की महाभारत का कारण बना पुत्र मोह ही उत्तरदायी है। द्वापर की महाभारत में हस्तिनापुर के राजा धृतराष्ट्र अपने पुत्र दुर्योधन के मोह में इतने उलझे हुए थे कि पांडवों को पाँच गाँव तक देने पर सहमत नहीं हुए। ठीक इसी तरह वर्तमान महाराष्ट्र की महाभारत में उद्धव ठाकरे भी पुत्र मोह में न केवल अपनी विचारधारा से जुड़ुी हुई भाजपा का साथ छोड़ने को, अपितु अपनी विचारधारा के विपरीत और जिनके विरुद्ध चुनाव लड़ा, उनके साथ गठबंधन करने को आतुर हैं।

ट्विटर पर शिवसेना की जम कर हो रही धुनाई

जनता के हाथ में केवल मतदान वाला एक दिन होता है, परंतु महाराष्ट्र की जनता ने सोचा भी नहीं होगा कि स्पष्ट जनादेश देने के बावजूद उसे वह सरकार नहीं मिलेगी, जिसके पक्ष में उसने वोट डाला है, अपितु एक ऐसी अनचाही सरकार का सामना करने की स्थिति उत्पन्न होगी, जिसके विरोध में उसने वोट डाला है। सीधी बात है कि महाराष्ट्र की जनता अब अपनी बात सोशल मीडिया पर रख रही है और ट्विटर पर लोग शिवसेना के सत्तालोलूप रवैये की जम कर आलोचना कर रहे हैं। लोगों को शिवसेना का मुख्यमंत्री पद के लिए विरोधाभासी विचारधारा वाले राजनीतिक दलों कांग्रेस और एनसीपी से गठबंधन के लिए तैयार हो जाना रास नहीं आ रहा और लोग कह रहे हैं कि शिवसेना महाराष्ट्र को ठग रही है। यही कारण है कि ट्विटर पर आज #ShivSenaCheatsMaharashtra ज़ोरों से ट्रेंड कर रहा है। यद्यपि #MaharashtraWithShivsena भी ट्रेंड कर रहा है, परंतु दोनों हैशटैग पर किए जा रहे ट्वीट्स की संख्या में अंतर महाराष्ट्र के अंतर्मन को व्यक्त कर रहा है। #ShivSenaCheatsMaharashtra पर लोग भारी संख्या में ट्वीट कर रहे हैं और यह समाचार लिखे जाने तक इस हैशटैग पर 1,27,000 ट्वीट्स किए जा चुके हैं, जबकि #ShivSenaCheatsMaharashtra पर केवल 16 हजार 600 ट्वीट्स ही किए गए हैं। इससे सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि महाराष्ट्र के लोग यह नहीं चाहते कि शिवसेना कांग्रेस-एनसीपी के साथ मिल कर सरकार बनाए।

आत्मघाती सिद्ध हो सकता है शिवसेना का ‘पाप’

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणामों के आने के बाद जब ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा से बात नहीं बनी, तो शिवसेना नेता संजय राउत कई बार यह कहते दिखे कि भाजपा ने यदि ढाई साल का मुख्यमंत्री पद नहीं दिया, तो शिवसेना कांग्रेस-एनसीपी के साथ अपवित्र गठबंधन करने का पाप करने से नहीं हिचकिचाएगी। यह घोर आश्चर्य की बात है कि शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे सहित पूरी पार्टी यह मानती-जानती है कि उनका हित और उनकी विचारधारा भाजपा से जुड़े हुए हैं और कांग्रेस-एनसीपी से गठबंधन पाप है, इसके बावजूद केवल मुख्यमंत्री पद के लिए वे यह पाप करने को तैयार हैं। यदि शिवसेना स्वयं अपनी इस तरह की करतूत को पाप मानती है, तो जनता क्या ऐसे पाप को क्षमा करेगी ? महाराष्ट्र में यदि भाजपा-शिवसेना गठबंधन से इतर कोई भी सरकार बनी, तो यह निश्चित है कि वह अधिक दिन नहीं टिकेगी और राज्य को फिर एक बार चुनाव में जाना पड़ेगा। उन परिस्थितियों में जनता शिवसेना को उसके द्वारा ही कहे और किए गए पाप का प्रायश्चित करवा सकती है। शिवसेना के लिए कांग्रेस-एनसीपी से गठबंधन राजनीतिक पतन का कारण भी बन सकता है।

You may have missed