क्या राहुल वह कर पाएँगे, जो उनकी दादी से न हो सका ?

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज एक बड़ा चुनावी दाव चला। राहुल ने देश के गरीबों को लुभाने के लिए बड़ा ऐलान किया और दावा किया कि यदि कांग्रेस सत्ता में आई, तो देश से गरीबी समाप्त हो जाएगी।

राहुल गांधी ने न्यूनतम् आय योजना (NYAY) की घोषणा करते हुए देश के 25 करोड़ गरीबों से वायदा किया कि यदि लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस की सरकार आई, तो 20 प्रतिशत गरीबों को हर वर्ष वार्षिक 72 हजार रुपए दिए जाएँगे।

किसानों और बेरोजागारों के मुद्दे पर कांग्रेस के आक्रमक तेवर से बैकफुट पर आई मोदी सरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और उसके बाद एयर स्ट्राइक के चलते अचानक फ्रंटफुट पर आ गई। अचानक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ फिर चढ़ने लगा।

ऐसे में राहुल गांधी ने NYAY के रूप में मोदी और भाजपा के खिलाफ तगड़ा दाव चला है। राहुल गांधी ने इस योजना के तहत देश के 25 करोड़ गरीबों को साधने की कोशिश की है, जो गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन कर रहे हैं।

राहुल गांधी के अनुसार ‘न्याय’ योजना के तहत कांग्रेस सरकार यह निर्धारित करेगी कि देश के हर वयस्क व्यक्ति की मासिक न्यूनतम् आय 12000 रुपए हो। जिस व्यक्ति की आय इससे कम होगी, उसकी भरपाई कांग्रेस की संभावित सरकार न्याय योजना के तहत करेगी।

वैसे राहुल गांधी दावा कर रहे हैं कि कांग्रेस ने यह योजना बड़े-बड़े आर्थिक विशेषज्ञों से राय लेकर तैयार की है, परंतु क्या राहुल गांधी गरीबी निर्मूलन का अपना वादा पूरा कर सकेंगे, जो उनकी दादी इंदिरा गांधी से न हो सका?

वास्तव में राहुल की आज की घोषणा ने उनकी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की याद दिला दी, जिन्होंने सन् 1971 के आम चुनाव में गरीबी हटाओ का नारा दिया था, लेकिन 48 वर्षों के बाद इंदिरा, उनके पुत्र राजीव गांधी, नरसिंह राव और मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकारों ने देश पर राज किया, परंतु गरीबी आज भी जस कि तस है।

वर्तमान प्रधानंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने कार्यकाल में गरीबी हटाओ को ही मिशन बनाया और उन्हें इस मिशन में सफलता भी मिली। वर्ल्ड डाटा बैंक (WDB) के अनुसार भारत में दैनिक 135 रुपए से कम में गुजारा करने वालों की संख्या महज 5 करोड़ रह गई है। भारत में अब केवल 3.7 प्रतिशत ऐसे लोग हैं, जिनकी दैनिक आय 135 रुपए से कम है। इसका सीधा मतलब यह है कि भारत में पिछले 7 वर्षों में गरीबों की संख्या में 19 प्रतिशत की कमी आई है और इसमें मोदी सरकार तथा उनकी नीतियों व योजनाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

इंदिरा गांधी ने 1971 में देश में दारूण गरीबी देख कर उसे हटाने को ही चुनावी नारा बना लिया, लेकिन इंदिरा गांधी का यह सपना वह स्वयं भी पूरा न कर सकीं। जब इंदिरा गांधी ने 1971 में इस नारे के दम पर जीत हासिल कर सत्ता संभाली, तब देश में 45 प्रतिशत लोगों की दैनिक आय मात्र 3.30 रुपए थी, लेकिन इंदिरा गांधी 1984 तक प्रधानमंत्री रहीं। उनके बाद पांच साल राजीव गांधी ने सरकार चलाई। कांग्रेस नेता नरसिंह राव ने 5 साल और मनमोहन सिंह ने 10 साल सरकार चलाई, लेकिन 48 वर्षों बाद भी इंदिरा का संजोया सपना पूरा न हो सका।

ऐसे में सवाल यही उठता है कि गरीबों को गरीबी हटाने के नाम पर रुपयों की पेशकश करने जैसे चुनावी वायदे कितने उचित हैं? क्यक्या सरकार केवल रुपए देकर ही गरीबी हटा सकती है। क्या सरकारों को ऐसी नीतियाँ अख्तियार नहीं करनी चाहिए, जिससे हर गरीब अपनी गरीबी से उबरने का सपना देखे और उसे साकार भी कर सके। ऐसा नहीं है कि राहुल गांधी ने बिना सोचे-समझे ‘न्याय’ का वायदा किया है, लेकिन उसे साकार करने के लिए उन्हें मनरेगा जैसी अन्य कई योजनाओं का सहारा लेना पड़ेगा। अन्यथा यदि सरकार प्रत्येक गरीब को 12000 रुपए मासिक आय सुनिश्चित करने के लिए अपना खजाना ही खाली करने लगेगी, तो देश की अर्थ व्यवस्था चौपट हो जाएगी।

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