मार्केट में आए गाय के गोबर के दीये, ये है खासियत

Written by

दिवाली आने में अभी कई दिन बाकी हैं, लेकिन लोग अभी से ही इसकी तैयारी में जुट गए हैं। Markets और shops तरह-तरह के दीये से सज गए हैं। लेकिन इस बार गोबर के दिये लोगों के बीच आकर्षण के केंद्र बने हुए हैं। इसके लिए महिलाएं लगातार गोबर के दीये बना रही हैं, ताकि दिवाली पर ग्राहकों की demand पूरी की जा सके। कहा जा रहा है कि गोबर के दीये Eco-Friendly हैं। इनसे Environment का कोई नुकसान नहीं होगा। ये मिट्टी में आसानी से मिल जाएंगे, जिससे जमीन की उर्वरक शक्ति और बढ़ जाएगी।

Rajasthan में इस बार गोबर के दिये की मांग खूब हो रही है। यही वजह है कि राजधानी Jaipur में गाय के गोबर से महिलाओं का एक समूह Eco-friendly दीये तैयार कर रहा है। हर दिन 100 महिलाएं 1000 दिये तैयार कर रही हैं। एक महिला ने कहा कि आजकल China के बने Items का इस्तेमाल Diwali में ज्यादा किया जाने लगा है। इससे Atmosphere में Pollution बढ़ रहा है, क्योंकि ये आसानी से विघटित नहीं होते हैं।

लेकिन गाय के गोबर को हिन्दू परंपरा में शुद्ध माना जाता है। ये आसानी से विघटित हो जाता है। यही वजह है कि गोबर को खाद के रूप में उपयोग किया जाता है। ऐसे में गोबर के बने इन दीयों का उपयोग करने के बाद खाद के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

Diwali पर China के बने Items को टक्कर देने, गौशालाओं की आय का साधन बनाने और गाय के गोबर का महत्व लोगों तक पहुंचाने के मकसद से Kamadhenu Deepavali Campaign शुरु किया गया है। यह अभियान राष्ट्रीय कामधेनु आयोग ने शुरु किया है। इस अभियान के तहत दीवाली से जुड़े 12 आइटम खासतौर से गाय के गोबर से बनाए गए हैं। महिला समूहों को जोड़कर पहले उनहें सामान बनाने की Training दी गई। उसके बाद समूहों को शहर-शहर में मौजूद गौशालाओं से जोड़ा गया। सामान तैयार किया गया। तैयार सामान आपसी जनसंपर्क और लोकल बाज़ार की मदद से लोगों के बीच बेचा रहा है।

Article Tags:
Article Categories:
News

Comments are closed.

Shares