सिर्फ दिमाग ही नहीं Batteries के लिए भी फायदेमंद है अखरोट

Kashmir Walnut Carbon Batteries

कश्मीर अपने खूबसूरत पहाड़ों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। इसके साथ ही वहां पैदा होने वाले अखरोट (Kashmir Walnut) भी अपने बेजोड़ स्वाद के कारण आज पूरी दुनिया में कश्मीर की पहचान बन गए हैं। चूंकि कश्मीर में बड़े पैमाने पर अखरोट की खेती है, इस वजह से अखरोट के खोल का Waste भी ज्यादा होता है, जिसका निस्तारण (Disposal) भी एक समस्या बन गया है। लेकिन अब भारतीय वैज्ञानिकों ने इसका उपाय खोज लिया है, दरअसल अखरोट के बाहरी खोल से अब Carbon Batteries बनाने की तैयारी की जा रही है।

कश्मीरी वैज्ञानिक ने खोजा तरीका

बता दें कि अखरोट के खोल से कार्बन बैट्री बनाने का आइडिया कश्मीर के एक वैज्ञानिक वाहिद मलिक को आया, जो कि Institute of Science, Education and Research (IISER) में कार्यरत हैं। दरअसल वाहिद मलिक कुछ समय पहले अपने घर कश्मीर गए हुए थे। इसी दौरान उन्हें अखरोट के Waste से कार्बन बैट्री बनाने का आइडिया आया। जिसके बाद IISER के वैज्ञानिक सतीशचंद्र ओगाले के नेतृत्व में अखरोट के Waste से कार्बन बैट्री बनाने की दिशा में काम शुरु हो गया है।

कश्मीर में Organic Waste एक बड़ी समस्या

गौरतलब है कि कश्मीर में 63000 हेक्टेयर जमीन पर अखरोट की खेती की जाती है। अखरोट निकालने के बाद इसके खोल से करीब 15000 टन Organic Waste निकलता है। वहीं कश्मीर में कुल ऑर्गेनिक वेस्ट करीब 36000 टन होता है। ऐसे में इतनी बड़ी मात्रा में इस ऑर्गेनिक वेस्ट (Organic Waste) का निस्तारण (Disposal) कश्मीर के लोगों के लिए बड़ी समस्या है। कुल Organic Waste में से 5-10% वेस्ट से पैकेजिंग प्रोडक्ट का निर्माण किया जाता है, वहीं बाकी वेस्ट को जलाना पड़ता है। इससे पर्यावरण को भी नुकसान होता है। ऐसे हालात में इस Organic Waste से कार्बन बैट्री बनाने की योजना बेहद फायदेमंद हो सकती है।

Kashmir Walnut Carbon Batteries

कैसे बनेगी Kashmir Walnut Carbon Batteries

वैज्ञानिकों का कहना है कि अखरोट में प्राकृतिक रुप से कार्बन की काफी मात्रा होती है। अखरोट के खोल से कार्बन बैट्री बनाने के लिए सबसे पहले इसके वेस्ट को केमीकल से साफ किया जाता है। उसके बाद इस वेस्ट को 1000 डिग्री सेल्सियस पर 4-5 घंटे के लिए गर्म किया जाता है। इसके बाद इस वेस्ट से निकले कार्बन को पाउडर या पेस्ट के रुप में इकट्ठा कर लिया जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कार्बन, लीथियम की अपेक्षा सस्ता भी होता है। ऐसे में कार्बन से बनी बैट्रियां सस्ती भी होगी।

बहरहाल इस तकनीक के सफल होने के बाद जहां Batteries सस्ती हो जाएंगी, वहीं कश्मीर के किसानों को भी इसका फायदा मिलेगा। एक तो किसानों को अखरोट के वेस्ट को जलाने की जरुरत नहीं पड़ेगी, दूसरा इससे किसानों की अतिरिक्त आय भी हो जाएगी।

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