इस तकनीक से कुछ ही समय में साफ हो सकती है दिल्ली की हवा

पिछले कुछ दिनों में दिल्ली की हवा खतरनाक तरीके से प्रदूषित हो गई है। हालात देखकर ऐसा लगता है कि दिल्ली एक गैस चैम्बर में तब्दील हो गई है, जहां लोग जहरीली हवा में सांस लेने के लिए मजबूर हैं। स्थिति सुधारने के लिए सरकार के स्तर पर छिटपुट कोशिशें की जा रही हैं। लेकिन इन कोशिशों का असर लंबे समय तक होगा, इसकी उम्मीद कम ही है। इसी बीच जर्मनी की एक  कंपनी ने ऐसा अविष्कार किया है, जो दिल्ली ही नहीं बल्कि दुनिया में बढ़ते वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए बड़ा कारगर सिद्ध हो सकता है।

“मॉस वॉल”

दरअसल जर्मनी की कंपनी “ग्रीन सिटी सोल्यूशन” ने एक ऐसी अनोखी दीवार का निर्माण किया है, जो कि बड़े स्तर पर वायु प्रदूषण को रोक सकती है। हैरानी की बात है कि यह दीवार इतना प्रदूषण रोक सकती है, जितना कि एक छोटा जंगल रोकता है। ऐसे में जब पूरी दुनिया में जगह की कमी होती जा रही है, तो यह मॉस वॉल एक क्रांतिकारी अविष्कार है, जो भविष्य में बड़ा रोल अदा कर सकती है।

Moss Wall

कैसे करती है काम

मॉस वॉल दरअसल काई या शैवाल की एक दीवार है, जिसे कंपनी ने “सिटी ट्री” का नाम दिया है। इस सिटी ट्री में शैवाल के लिए जरुरी नमी बनाए रखने के लिए पानी की व्यवस्था के साथ सोलर पॉवर की भी व्यवस्था की गई है। बताया जा रहा है कि शैवाल की यह एक दीवार करीब 275 पेड़ों के बराबर शक्तिशाली है और इसकी खास बात  है कि सुविधानुसार इसे एक जगह से दूसरी जगह भी ले जाया जा सकता है।

ट्री वॉल बनाने वाली कंपनी का दावा है कि यह वॉल हवा में फैले पर्टिकुलेट मैटर, नाइट्रोजन ऑक्साइड, ओजोन और कार्बन डाई-ऑक्साइड को अब्जोर्ब कर ऑक्सीजन प्रोड्यूस करती है। इसके अविष्कारकों का कहना है कि शैवाल से बने होने के कारण इस ट्री वॉल में पत्तियों का घनत्व किसी भी अन्य पेड़ से ज्यादा है, जिस कारण यह ट्री वॉल पेड़ों के मुकाबले ज्यादा वायु प्रदूषण को रोकती है।

Moss Wall

इस दीवार के अविष्कारकों का कहना है कि यह ट्री वॉल एक साल में करीब 90 किलो पर्टिकुलेट मैटर और 240 मीट्रिक टन कार्बन डाई-ऑक्साइड को अब्जोर्ब कर सकती है। इतना ही नहीं वाष्पीकरण तकनीक की मदद से यह ट्री वॉल 5 मीटर के इलाके की हवा को 17 डिग्री सेल्सियत तक ठंडा कर सकती है। ऐसे में धरती के बढ़ते तापमान के हालात में यह ट्री वॉल कमाल का फायदा दे सकती है। मेन्टिनेंस की बात करें तो यह ट्री वॉल बेहद कम मेन्टिनेंस मांगती है। साथ ही वाई-फाई सेंसर से लैस होने के कारण इस ट्री वॉल की सेहत का पता लगाना भी आसान है।

ट्री वॉल की खासियत देखते हुए यह आधुनिक समय का खास अविष्कार साबित हो सकता है, जोकि धरती को साफ और हरा-भरा बनाए रखने में काफी अहम रोल निभा सकता है। बता दें कि दुनिया के कई शहरों में बाकायदा इस ट्री वॉल का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में जब दिल्ली की हवा सांस लेने लायक नहीं बची है तो सरकार को भी ट्री वॉल के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए। हालांकि पेड़ों का शायद ही कोई विकल्प हो, लेकिन इमरजेंसी के हालात में ट्री वॉल एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है।

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