सोशल मीडियाः थोड़ा रुककर सोचने की जरुरत

Social Media

सोशल मीडिया इस सदी के सबसे क्रांतिकारी अविष्कारों में से एक है। सोशल मीडिया का जादू कुछ ऐसा रहा कि इसने बड़े ही कम समय में पूरी दुनिया को अपनी जद में ले लिया है। खासकर  युवा पीढ़ी ताजा हालात को देखते हुए शायद सोशल मीडिया के बिना अपनी जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकती है। सोशल मीडिया ने इस दुनिया को कमाल की चीजें दी हैं, लेकिन जिस तरह लोग सोशल मीडिया के आदि होते जा रहे हैं, उससे समाज में कई तरह की चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं। सोशल मीडिया के कारण हमारी पूरी जीवन शैली ही बदल गई है, जिसका काफी बुरा असर हमारे जीवन पर दिखाई दे रहा है।

समाज को खतरा

इंसान एक सामाजिक प्राणी है, इस सामाजिकता के बूते ही इंसान आज वहां तक पहुंचा है, जहां वह आज है। लेकिन सोशल मीडिया के आने के बाद जो सबसे बुरा असर समाज पर हुआ है, वो ये है कि लोग समाज से ही कटते जा रहे हैं। लोग अब बस अपने मोबाइल के साथ ही इतने व्यस्त हैं कि उनके आस-पास क्या घट रहा है, उससे लोगों को मतलब ही नहीं रह गया है। एक तरह से कहें तो दुनिया भर में सामाजिक संरचना छिन्न-भिन्न हो रही है, जो कि इंसान के अस्तित्व के लिए बहुत बड़ा खतरा है।

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संवेदनशीलता घटी

इस सामाजिक अलगाव का ही नतीजा है कि लोगों में संवेदनशीलता घटी है। लोग जब अपने आस-पास के माहौल से जुड़ाव महसूस नहीं करेंगे तो स्वाभाविक सी बात है कि लोगों में संवेदनशीलता घटेगी। सोशल मीडिया के आने के बाद अब यही हो रहा है। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि इंसान मानवीय संवेदनाओं से भी खाली होता जा रहा है। ऐसी कितनी ही घटनाएं हमें आजकल सुनने और देखने को मिलती हैं, जहां लोग दुर्घटनाओं के बाद सड़क पर तड़पते रहते हैं और लोग पीड़ित की मदद करने के बजाए वीडियो बनाने में लगे होते हैं। ऐसी प्रवृत्ति हमारे समाज और दुनिया के लिए बेहद खतरनाक है, जहां इंसान के इंसान होने का मतलब ही नहीं रह जाए ?

दुष्प्रचार का सबसे बड़ा माध्यम

सोशल मीडिया पर हर  किसी को अपनी बात कहने की आजादी है। जहां ये बात सुखद भी है तो खतरनाक भी। क्योंकि बीमार मानसिकता का इंसान इस माध्यम का गलत फायदा उठा सकता है और बल्कि ये कहना सही है कि गलत फायदा उठा रहे हैं। आज  के समय में सोशल मीडिया पर तथ्यों को तरोड़-मरोड़कर गलत  तरीके से पेश किए जा रहा हैं। जिनसे लोग गुमराह हो रहे हैं। हमारे देश में कई जगह हुए दंगों में, सोशल मीडिया पर फैलाया गया झूठ सबसे बड़ा कारण बना। इतना ही नहीं तकनीक की मदद से इतिहास की गलत व्याख्या की जा रही है, जिसका देश की युवा पीढ़ी पर बुरा असर हो रहा है।

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दुष्प्रचार  के साथ साथ आतंकी और सांप्रदायिक गुटों द्वारा भी सोशल मीडिया का खूब इस्तेमाल किया जा रहा है। दुनिया भर के नौजवानों को सोशल मीडिया के बहाने से बरगलाकर आतंकी बनाया जा रहा है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि पूरी दुनिया की सरकारें इस दुष्प्रचार पर चाहकर भी रोक नहीं लगा पा रही हैं।

तनाव का स्तर बढ़ा

इंसान स्वभाव से प्रकृति के साथ रहने के लिए बना है। लेकिन सोशल मीडिया और तकनीक के आगमन के बाद इंसान प्रकृति से दूर होता जा रहा है। इसका असर यह हुआ है कि इंसान आज मशीनी जीवन जी रहा है, जहां शांति और ठहराव जीवन से गायब हो गया है। इसके फलस्वरुप जीवन में तनाव का स्तर बढ़ा है, जिससे नई नई बीमारियां पैदा हो रही हैं। तनाव के कारण इंसान कुंठा में जी रहा है और ये कुंठा कभी कभी खतरनाक तरीके से बाहर निकलती है। आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं और अमेरिका में होने वाली गोलीबारी की घटनाएं इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं।

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बता दें कि सोशल मीडिया के हमारे जीवन में बढ़ते  दखल का ही नतीजा है कि हम सोशल मीडिया के आदि होते जा रहे हैं और अब यह आदत बाकायदा बीमारी बनती जा रही है। जिसके इलाज के लिए कई देशों में डी-एडिक्शन क्लीनिक भी खुल गए हैं।

फायदे भी अनेक

 

ऐसा नहीं है कि सोशल मीडिया के सब नुकसान ही हैं, इसके फायदे भी बहुत हैं। आज के समय में कम्यूनिकेशन के क्षेत्र में क्रांति आ गई है, लोग सेकेंड से भी कम समय में पूरी दुनिया में कहीं भी एक दूसरे से संपर्क साध सकते हैं और यह सोशल मीडिया की मदद से ही संभव हुआ है। सोशल मीडिया आज युवाओं समेत सभी लोगों को अपना टैलेंट दिखाने का सबसे बड़ा मंच बन चुका है। वहीं पुराने समय में हम खबरों के लिए अखबार और न्यूज चैनलों पर निर्भर थे, लेकिन सोशल मीडिया के आगमन के बाद हम कभी भी और कहीं भी देश में चल रहीं खबरों से अपडेट रह सकते हैं।

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कम्यूनिकेशन के अलावा बिजनेस के लिए भी सोशल मीडिया वरदान साबित हो रहा है। लोग अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया का बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया मनोरंजन का भी बड़ा माध्यम बनकर उभरा हैं, जहां लोग मनोरंजन के साथ-साथ लोगों से कम्यूनिकेट भी कर सकते हैं और कई उपयोगी जानकारी भी पा सकते हैं।

निष्कर्ष

बहरहाल हमने सोशल मीडिया के फायदे भी गिनाएं और नुकसान भी, ऐसे में सवाल उठता है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जाए या नहीं ? इस पर हमारा कहना है कि सोशल मीडिया आधुनिक समय की जरुरत है, इसलिए इससे दूरी बनाना तो बिल्कुल भी अक्लमंदी नहीं कही जा सकती। लेकिन इसके नुकसान से बचने के लिए हमें खुद पर नियंत्रण करना जरुरी है। मतलब हमें सोशल मीडिया के इस्तेमाल को सीमित करने की जरुरत है, ताकि हम इससे होने वाले नुकसान से भी बचे रहें और इसके फायदे भी हमें मिलते रहें।

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