ऐसे कैसे पूरा होगा AIDS free India का सपना ?

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Condom ads ban

सरकार ने संस्कारी आदेश देते हुए  Condom के Advertisement पर  सुबह 6 बजे से लेकर रात के 10 बजे तक रोक लगा दी है। Information and Broadcasting Ministry (सूचना और प्रसारण मंत्रालय) ने  Condom के Advertisement को लेकर आ रही शिकायतों के चलते यह फैसला दिया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि Condom के Advertisement में अश्लीलता काफी बढ़ गई है जिससे बच्चों पर बुरा असर पड़ रहा है।

Condom के Advertisement पर रोक को लेकर बहस

Condom के प्रचार पर रोक को लेकर बहस छिड़ गई है। जो लोग रोक के खिलाफ हैं उनका कहना है कि इससे AIDS और Abortion के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम को धक्का लगेगा। Condom का इस्तेमाल ना करने की वजह से ही AIDS फैल रहा है और भारत 21 लाख AIDS मरीजों के साथ विश्व में तीसरे स्थान पर है। देश में Abortion का कारोबार भी तेजी से बढ़ रहा है जबकि अपने देश में यह गैर कानूनी (Illegal) है। हमे नहीं भूलना चाहिए कि देश की आबादी 130 करोड़ से ज्यादा है। आबादी पर रोक लगाने के लिए भी Condom को लेकर लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।

Condom का सालाना कारोबार 800 करोड़ का है

हम जागरूक हुए हैं जिसकी वजह से AIDS के हजारों मरीज आम जिंदगी जी रहे हैं। पढ़े-लिखे लोग इस बात को समझते हैं कि AIDS छूने से नहीं फैलता है, यह छुआछूत की बीमारी नहीं है। जागरूकता फैलाने के लिए सरकार की तरफ से हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं। यह जागरूकता का ही नतीजा है कि भारत में Condom का सालाना कारोबार 800 करोड़ का है।

कंटेट को लेकर सवाल उठाना लाजिमी

हालांकि इस बात से बिल्कुल भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि  हेल्थ इंडस्ट्री Condom को गर्भ निरोध के आधार पर नहीं बेच रहा है। Condom के साछ fantasy को जोड़ दिया गया है जिसकी वजह से इसका कंटेट अश्लील (Obscene) हो चुका है।  Advertisement के कंटेट पर सुधार के बजाए इसके प्रसारण पर रोक कितना जायज है ? इस पर सोचने की जरूरत है। एक स्टडी के मुताबिक भारत में 14-16 साल के बच्चे पहली बार सेक्स करते हैं। ऐसे में उन लोगों को Condom को लेकर जागरूक करना ज्यादा जरूरी है।

AIDS free India by 2030 का मिशन

यह भारत की सामाजिक विडंबना है कि सैनेटरी नैपकिन पर बनी फिल्म “फुल्लू” को एडल्ट सर्टिफिकेट दिया गया। सर्टिफिकेट देने वाली संस्था CBFC को सोचना चाहिए कि सैनेटरी नैपकिन को लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता और जरूरत 14-16 साल की बच्चियों में होती है। यह फिल्म उनके फायदे के लिए उनको खास तौर पर दिखाई जानी चाहिए थी। हमें नहीं भूलना चाहिए कि अगर AIDS free India by 2030 का मिशन पूरा करना है तो, इस तरह के बैन से बचने की जरूरत है।

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Health · News · Sports & Health

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