Smart Phones: बच्चों को बना रहा मानसिक रोगी

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आज दुनिया भर में करीब 7 अरब लोग रहते हैं, जिनमें से करीब 6 अरब लोग फोन का इस्तेमाल करते हैं। इस तरह कह सकते हैं कि Smart Phones हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन गए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्मार्ट फोन हमें मानसिक रोगी (Mental Patient) बना रहे हैं। खासकर हमारी युवा पीढ़ी Smart Phones के साइड इफेक्ट का सबसे ज्यादा शिकार हो रही है।

एक रिसर्च के मुताबिक जो बच्चे, स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करते हैं, वो एक दिन में औसतन 80 बार अपना फोन चेक करते हैं। NBC NEWS की एक खबर के मुताबिक आज की युवा पीढ़ी कई मानसिक बीमारियों से घिरी हुई है और इसका सबसे बड़ा कारण स्मार्ट फोन का इस्तेमाल है। मनोविज्ञानियों के अनुसार, आज की युवा पीढ़ी Smart Phone के कारण Virtual World को काफी ज्यादा अहमियत देती है, जिस वजह से कई बार युवा अपनी जान को जोखिम में डालकर कई ऐसे काम करते हैं, जो उन्हें सोशल मीडिया पर ज्यादा लाइक दिलाए और फेमस कर दें। लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि यह एक तरह की मेंटल प्रॉब्लम है, जो युवाओं को बुरी तरह से प्रभावित कर रही है।

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वहीं स्मार्ट फोन आने के बाद से युवाओं में तनाव और खुदकुशी की घटनाएं भी काफी बढ़ गई हैं। एक रिसर्च के अनुसार, दुनियाभर के युवा अपना ज्यादातर समय मोबाइल फोन्स पर बिता रहे है, जिस कारण वह समाज से दूर होते जा रहे हैं। इसका असर उनके सामाजिक जीवन पर पड़ रहा है और वह एकाकीपन (Loneliness) के शिकार हो रहे हैं। The American Academy of Pediatrics ने बाकायदा चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि छोटे बच्चों को खासकर स्मार्ट फोन से दूर रखें।

जैसा कि हम सभी ने देखा होगा कि यदि कोई बच्चा रो रहा है और हम उसे फोन पकड़ा दें तो वह चुप हो जाता है। हम यह सोचकर खुश हो जाते हैं कि बच्चा चुप हो गया, लेकिन असलियत में यह आदत आपके बच्चे का मानसिक और शारीरिक विकास रोक सकती है। रिसर्च के मुताबिक बचपन में बच्चों को स्मार्ट फोन देने से वह चिड़चिड़े और गुस्सैल हो सकते हैं। रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि मां-बाप भी बच्चों के सामने ज्यादा फोन का इस्तेमाल ना करें।

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हाल ही में ग्रेटर नोएडा में एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। जिसमें एक महिला और उसकी बेटी की बेरहमी से हत्या कर दी गई। पुलिस जांच में पता चला कि महिला और उसकी बेटी की हत्या किसी ओर ने नहीं बल्कि उसके खुद के 15-16 वर्षीय बेटे ने ही की है। जब हत्या के कारण का खुलासा हुआ तो सभी चौंक गए। दरअसल लड़के के पिता ने उससे उसका स्मार्ट फोन छीन लिया था, जिस पर वह अधिकतर समय मोबाइल गेम्स खेलता रहता था। फोन छीने जाने से वह इतना गुस्सा हुआ कि किसी बात पर उसने अपनी मां और बहन की हत्या कर दी। बहरहाल इस मामले की जांच जारी है। यहां इस घटना का जिक्र इसलिए किया गया है कि बताया जा सके कि बच्चों की मानसिकता स्मार्ट फोन के इस्तेमाल से किस कदर बिगड़ रही है। ब्लू व्हेल जैसे खतरनाक गेम्स भी इस खतरे की अगली कड़ी है, जिसमें बच्चों को आत्महत्या के लिए उकसाया जाता है।

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बहरहाल यह फेहरिस्त लंबी है, जिसका निचोड़ यह है कि जहां मोबाइल फोन ने कम्यूनिकेशन के फील्ड में क्रांति ला दी, वहीं स्मार्ट फोन अब हमारी युवा पीढ़ी को बीमार कर रहे हैं। हालांकि इसके नुकसान बताने का उद्देश्य ये नहीं है कि स्मार्ट फोन का इस्तेमाल बंद कर दिया जाए, लेकिन यह जरुर कह सकते हैं कि इसका सीमित इस्तेमाल ही हमारे हित में है।

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Health · Science

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