‘खेलोगे, कूदोगे बनोगे खराब..’ की मानसिकता कितनी सही ?

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india perform poorly in Olympics

ऐसी क्या वजह है कि 130 करोड़ की आबादी होने के बावजूद हम इंटरनेशनल एथलीट को पैदा नहीं कर पा रहे हैं जो ओलंपिक खेलों में भारत का मान बढ़ा सके। एक तरफ क्रिकेट की दुनिया में हमने दर्जनों महान खिलाड़ियों को तैयार किया है और भारतीय टीम हर फॉर्मेट पर टॉप पर है। लेकिन दूसरे स्पोर्ट्स की बात करें तो हम गिनती में भी नहीं हैं। हमारे एथलीट बड़ी मुश्किल से क्वालीफाई कर पाते हैं।

बच्चों को खेल में करियर बनाने की आजादी नहीं

हम इस बात से सहमत हैं कि भारत एक स्पोर्ट्स नेशन नहीं है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ओलंपिक मेडल की लिस्ट में हमारा नाम सबसे नीचे हो। स्पोर्ट्स को लेकर आम भारतीय की सोच अजीब है। हिंदी में मशहूर कहावत है “खेलोगे-कूदोगे बनोगे खराब, पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नवाब”। मतलब हमारे माता-पिता की ऐसी सोच है कि अगर बच्चे स्पोर्ट्स पर ध्यान देंगे तो उनका भविष्य अंधेरे में होगा। बच्चे को जिंदगी में क्या बनना है यह फैसला भी माता-पिता ही लेते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो अधिकतर माता-पिता बच्चों पर अपना फैसला थोपते हैं।

Olympics के लिहाज से सुविधाओं का अभाव

बात अगर ओलंपिक में प्रदर्शन को लेकर करे तो अपने देश में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। ओलंपिक मेंडल की दौड़ में जो देश काफी आगे है, उनका कहना है कि ओलंपियन पैदा नहीं होते हैं बल्कि तैयार किए जाते हैं। सालों तक एक एथलीट को तराशना पड़ता है जिसके बाद उससे उम्मीद की जाती है कि वह मेडल जीत कर देश का नाम रोशन करेगा।

Sports के लिए कम बजट

ओलंपिक में जितने स्पोर्ट्स खेले जाते हैं उसके बारे में हम पूरी तरह से जानते भी नहीं हैं। अपने देश में खेल मंत्रालय भी सुस्त तरीके से काम करता है। खेल मंत्रालय की तरफ से जरूरी मदद मुहैया नहीं हो पाता है। खेल के लिए हमारा बजट भी कम है। हमारी जनसंख्या भले ही 130 करोड़ है लेकिन कितने खिलाड़ियों को हम तैयार कर रहे हैं यह बेहद अहम है।

ग्रामीण इलाके में छिपी है संभावनाएं, तलाशने की जरूरत

ग्रामीण इलाके में एथलीट की कमी नहीं है, उनमें संभावनाओं का अपार भंडार है लेकिन उन्हें मौका तक नहीं मिल पाता है। खेल मंत्रालय को इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है। ग्रामीण इलाके के एथलीट को जब कभी मौका मिला है उन्होंने अपने प्रदर्शन का लोहा मनवाया है। देश-विदेश में नाम भी रोशन किया है। इसलिए खेल मंत्रालय को चाहिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में छिपे अपार संभावनाओं को खोज निकाले और उन्हें प्रशिक्षित करे।

हरियाणा से सीख सकते हैं कि एथलीट को क्या चाहिए

आज की तारीख में सबसे ज्यादा एथलीट हरियाणा से आ रहे हैं। इसकी कोई वजह तो होगी ? इसके पीछे  सबसे बड़ी वजह है कि हरियाणा में संसाधनों को स्पोर्ट्स के हिसाब से विकसित किया गया है। खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर सरकार भी गंभीर है। सरकार की तरफ से उन्हें हर तरह की मदद मिलती है। खिलाड़ियों को कोचिंग के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं है। बेहतर सुविधा होने के चलते हरियाणा के बच्चे स्पोर्ट्स में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। अगर कोई बच्चा स्पोर्ट्स में अपना करियर बनाना चाहता है तो उनके माता-पिता उनका मनोबल ऊंचा करते हैं। हार और जीत खेल का हिस्सा होता है लेकिन ये भी सच है कि जीत हमें खुशी और गौरव देती है लेकिन हार से हमें निराशा होती है।

 

 

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Sports · Sports & Health

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