प्रियम गर्ग : माँ ने दम तोड़ा, पिता ने साथ छोड़ा, पर मामा ने बना दिया क्रिकेटर

Written by

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 4 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारतीय क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर हर युवा क्रिकेटर की पहली पसंद हैं। कई युवाओ ने तो सचिन के खेल से प्रभावित होकर क्रिकेट को अपना करियर बना लिया है। उन्हीं युवकों में से एक हैं प्रियम गर्ग (Priyam Garg), जिन्हें भारतीय अंडर 19 क्रिकेट टीम की कमान सौंपी गई है। प्रियम गर्ग का कहना है, ‘सचिन तेंदुलकर की बल्लेबाज़ी देख कर ही मैं क्रिकेटर बना हैं। मैं आज जो कुछ भी हूँ, सचिन तेंदुलकर की वज़ह से हूँ। अगर मैं सचिन की बल्लेबाज़ी नहीं देखता, तो कभी इतना आगे नहीं आ पाता। मैं अपने हर मैच से पहले सचिन की बल्लेबाज़ी को याद करता हूँ, जो मुझे रन बनाने के लिए ताक़त देती है।’ प्रियम गर्ग का ये भी कहना है, ‘मैं भारत को पाँचवीं बार अंडर 19 वर्ल्ड कप जिताना चाहता हूँ। हम 4 बार चैंपियन बन चुके हैं और मैं अपने सीनियर खिलाड़ियों के पदचिन्हों पर ही चलना चाहता हूँ।’

प्रियम गर्ग (Priyam Garg) ने अपने अब तक के करियर में 11 फर्स्ट क्लास मैच खेले हैं और 67.83 के बेहतरीन औसत से 814 रन बनाए हैं। प्रियम गर्ग उन चंद क्रिकेटरों में से एक हैं, जिन्होंने अंडर 14, अंडर 16 और रणजी ट्रॉफी में 2-2 दोहरे शतक बनाये हैं। अब जब साउथ अफ्रीका में अंडर 19 वर्ल्ड कप 2020(U-19 Cricket World Cup 2020) होने जा रहा है, प्रियम को टीम की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी सौंप दी गई है। वह टीम के कप्तान चुने गए हैं। यह टूर्नामेंट दक्षिण अफ्रीका में 17 जनवरी से शुरू होगा। फाइनल 9 फरवरी को खेला जाएगा। भारत का पहला मुकाबला श्रीलंका से 19 जनवरी को होगा। प्रियम गर्ग हिंदुस्तान के उभरते हुए स्टार क्रिकेटर हैं। प्रियम ने अब तक जितने भी मैच खेले हैं, उनमें उन्होंने अपने टैलेंट का लोहा मनवाया है, परंतु उनका जीवन बहुत ही संघर्षपूर्ण रहा है। आइए जानते हैं प्रियम गर्ग की क्रिकेट कहानी।

प्रियम गर्ग का जन्म 30 नवंबर, 2000 को उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुआ। इनके पिता नरेश गर्ग एक दुग्ध विक्रेता और ड्राइवर हैं। 11 वर्ष की आयु में ही प्रियम की माँ चल बसीं। पिता ने ही प्रियम का पालन-पोषण किया और माँ-बाप दोने का प्यार दिया। उस समय प्रियम गलियों में क्रिकेट खेला करते थे। तभी उन्हें स्टेडियम में क्रिकेट खेलने की सोची और अपने पिता से इच्छा जताई। घर की माली स्थिति को देखते हुए पिता ने उन्हें गली में ही क्रिकेट खेलने को कहा। प्रियम के मामा को जब ये बात पता चली, तो उन्होंने सबसे पहले तो प्रियम को गली में क्रिकेट खेलते देखा। प्रियम की लगन और उनके खेल से मामा इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने प्रियम को उनके परम् अर्थात् क्रिकेटर बनने के लक्ष्य तक पहुँचाने की ठान ली। मामा ने प्रियम का दाखिला मेरठ के विक्टोरिया स्टेडियम में करा दिया। 12 वर्षीय प्रियम रोज़ अपने घर से 20 किलोमीटर दूर कंधे पर किट बैग लटकाए बस में स्टेडियम जाने लगे। प्रियम अपनी कड़ी मेहनत के दम पर ज़ल्द ही अंडर 14 टीम में चुन लिए गए, जिसमें उन्होंने दो बार दोहरा शतक बनाया। उसके बाद प्रियम ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

प्रियम ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत 19 सितंबर, 2018 को खेले गए विजय हजारे ट्रॉफी टूर्नामेंट के मैच से की, जिसमें उन्होंने दोहरा शतक बनाया था। उसके बाद प्रियम ने 1 नवंबर 2018 को रणजी ट्रॉफी टूर्नामेंट खेला। दिसंबर-2018 में त्रिपुरा के खिलाफ मैच के दौरान उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपना पहला दोहरा शतक बनाया। 21 फरवरी, 2019 को सैयद मुश्ताक़ अली ट्रॉफी-2018 में उत्तर प्रदेश के लिए खेलते हुए प्रियम ने T-20 मैचों में खेलने की शुरुआत की। अगस्त-2019 में उन्हें 2019-20 की दलीप ट्रॉफी के लिए इंडिया ग्रीन टीम में नामित किया गया। अक्टूबर 2019 में उन्हें 2019-20 देवधर ट्रॉफी के लिए इंडिया-सी के टीम में नामित किया गया था।

Article Categories:
Sports

Comments are closed.

Shares