30 अक्टूबर, 2013 : जब सचिन ने 9 वर्षीय शैफाली को ‘लड़का’ बनने पर विवश कर दिया…

Written by

अहमदाबाद 3 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत में क्रिकेट को लेकर अभूतपूर्व दीवानगी है। यद्यपि क्रिकेट नहीं, अपितु हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल है, परंतु भारत के हर बच्चे से लेकर युवा जीवन में कोई खेल भले न खेले, क्रिकेट अवश्य खेलता है और कई बार तो गली से लेकर कई स्तर तक होने वाली प्रतियोगिताओं में श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए यह सपना भी संजोने लगता है कि वह भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बने। ख़ैर, यह सपना देखते तो सब हैं, परंतु साकार बहुत कम लोग कर पाते हैं। अधिकांश लोग टेलीविज़न पर और बहुत-बहुत तो स्टैडियम में जाकर क्रिकेट मैच देख कर ही संतोष मान लेते हैं।

भारत में क्रिकेट की इस दीवानगी के कारण ही जहाँ एक ओर 49 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान हैं, तो छोटे-मोटे मैदानों की संख्या 1000 से ऊपर है। इन मैदानों पर जब भी कोई घरेलू या अंतरराष्ट्रीय मैच होता है, तो स्टेडियम दर्शकों से खचाखच भरे होते हैं। इन्हीं स्टैडियमों में एक नाम है चौधरी बंसीलाल क्रिकेट स्टेडियम। यह स्टेडियम हरियाणा के रोहतक में है और यहाँ पहला क्रिकेट मैच वर्ष 2006 में खेला गया था। 8 हजार दर्शक क्षमता वाला यह स्टेडियम अक्टूबर-2013 से पहले तक तो देश के अन्य स्टेडियमों की तरह एक साधारण स्टेडियम था, परंतु 27 से 30 अक्टूबर, 2013 के दौरान इस चौधरी बंसीलाल क्रिकेट स्टेडियम में रणजी ट्रॉफी प्रतियोगिता के अंतर्गत मुंबई व हरियाणा टीमों के बीच हुए मैच के बाद यह स्टेडियम विशेष बन गया, क्योंकि यही वह मैच था, जब भारत में क्रिकेट के भगवान के रूप में प्रसिद्ध मास्टरब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने अपना अंतिम घरेलू मैच खेला था।

8 हजार की भीड़ से उभरा ‘शैफाली’ नामक सितारा

चौधरी बंसीलाल क्रिकेट स्टेडियम में 27 से 30 अक्टूबर, 2013 के दौरान मुंबई-हरियाणा टीमों के बीच खेले गए मुक़ाबले को देखने के लिए 8 हजार दर्शकों की भीड़ उपस्थित थी। इसी भीड़ में एक 9 वर्षीय बालिका शैफाली वर्मा भी थी, जो मैच देखने आई थी। 27 अक्टूबर, 2013 को टॉस जीत कर मुंबई ने फील्डिंग करने का निर्णय किया, तो हरियाणा की टीम बैटिंग करने उतरी। मुंबई की घातक गेंदबाजी के आगे हरियाणा की टीम पहली पारी में केवल 134 रनों पर सिमट गई। मुंबई भी अपनी पहली पारी में दमदार प्रदर्शन नहीं कर सकी और उसके सभी खिलाड़ी हरियाणा से 2 रन अधिक यानी 136 रन बना कर पैवेलियन लौट गए, जिसमें अंतिम घरेलू मैच खेल रहे सचिन तेंदुलकर 10 मिनट क्रीज़ पर रहे और 7 गेंदों में केवल 5 रन ही बना सके। हरियाणा ने दूसरी पारी में सभी विकेट बना कर 241 रन बनाए, जिसके चलते 2 रन की लीड के चलते मुंबई को यह मैच जीतने के लिए दूसरी पारी में 240 बनाने का लक्ष्य मिला। दूसरी पारी में 240 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए मुंबई की टीम ने पहला विकेट 1 रन पर ही गँवा दिया, परंतु इसके बाद के. आर. पवार (47) और अजिंक्य रहाणे (40) ने स्थिति को संभाला, परंतु 87 के स्कोर पर रहाणे आउट हो गए और अंतिम घरेलू मैच खेल रहे सचिन तेंदुलकर मैदान पर आए। सचिन अभी पूरी तरह सेट भी नहीं हुए थे कि 109 के स्कोर पर पवार भी चलते बने। अब क्रीज़ पर सचिन और ए. एम. नायर थे, परंतु सारा दारोमदार सचिन पर था। सचिन ने इस मैच की दूसरी पारी और अपने घरेलू मैच की अंतिम पारी में 296 मिनट तक क्रीज़ पर रह कर 175 गेंदों पर 79 रन बना कर मुंबई को निर्णायक जीत की ओर अग्रसर कर दिया। वह दिन था 30 अक्टूबर, 2013 का, जब सचिन मैदान पर सधी हुई पारी खेल रहे थे और दर्शकों की भीड़ में पिता संजीव वर्मा के साथ आई शैफाली ‘सचिन सचिन’ के नारे लगा रही थी। सचिन की इस पारी का 9 वर्षीय शैफाली पर इतना गहरा प्रभाव पड़ा कि उसने क्रिकेटर बनने का संकल्प कर लिया।

जब शैफाली के लिए लड़की होना बन गया ‘श्राप’ !

हम जिस 9 वर्षीय शैफाली वर्मा की बात कर रहे हैं, वह भारत की महिला क्रिकेट टीम की सबसे कम आयु में टी-20 क्रिकेट में डेब्यू करने वाली खिलाड़ी बन चुकी हैं। शैफाली ने गत 24 सितंबर, 2019 को गुजरात के सूरत में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीज आयोजित टी-20 क्रिकेट मैच से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया है, परंतु इस उपलब्धि तक पहुँचने में शैफाली को भारी संघर्ष करना पड़ा। 28 जनवरी, 2004 को हरियाणा के रोहतक में जन्मी शैफाली के पिता संजीव वर्मा जूस की एक दुकान चलाते हैं। जब सचिन की पारी देखने के बाद शैफाली पर क्रिकेट खेलने का ज़ुनून चड़ा, तो पिता संजीव ने भी उनका साथ दिया और उन्हें लेकर रोहतक क्रिकेट स्टेडियम पहुँचे, परंतु क्रिकेट अकादमी ने लड़की होने के कारण उन्हें ऐडमिशन देने से मना कर दिया। पिता ने अन्य कई क्रिकेट अकादमियों में भी जाकर शैफाली के प्रशिक्षण के लिए याचनाएँ कीं, परंतु रोहतक में ऐसी कोई अकादमी नहीं थी, जो लड़कियों को क्रिकेट का प्रशिक्षण देती हो। अब पिता ने प्रण ले लिया कि वे शैफाली को क्रिकेट खिलाड़ी बना कर ही दम लेंगे। उन्होंने एक युक्ति आज़माई। संजीव वर्मा ने बेटी शैफाली के बाल कटवा दिए और उसे लड़के के रूप में प्रस्तुत कर एक क्रिकेट अकादमी में एडमिशन करवा दिया। शैफाली लड़की थी, परंतु प्रशिक्षण के दौरान उसे अपने से अधिक मज़बूत लड़कों के साथ अभ्यास करना पड़ रहा था। इसी कारण शैफाली को कई बार चोटें भी लगी, परंतु हर चोट उनमें एक नया उत्साह भरती और क्रिकेट के प्रति उनका प्रेम और बढ़ाती।

साउथ अफ्रीका के विरुद्ध खेला पहला महिला टी-20 मैच

अंततः वह दिन आ ही गया, जब शैफाली वर्मा का भारतीय क्रिकेट महिला टीम में चयन हुआ और 24 सितंबर, 2019 को गुजरात के सूरत में हुए दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध खेले गए महिला टी-20 इंटरनेशनल मैच में 15 वर्ष की शैफाली ने डेब्यू कर लिया। यद्पि शैफाली इस पहले मैच में केवल 4 गेंद ही खेल पाईं, परंतु सिरीज़ के 1 अक्टूबर को हुए दूसरे मैच में शैफाली ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 33 गेंदों में 46 रन बनाए और जता दिया कि उनमें क्रिकेट का भरपूर कौशल्य है। शैफाली का कहना है, ‘अपने पहले मैच में डक (शून्य रन पर आउट) हो जाने के बाद मैं थोड़ा रिलेक्स महसूस कर रही थी। सीनियर प्लेयर्स मेरे पहले मैच के बाद मुझे सपोर्ट कर रहे थे और मुझे ख़ुशी है कि मैंने दूसरे मैचे में टीम की जीत में योगदान दिया।’ महिला क्रिकेट खिलाड़ी डेनियर वायट और मिथाली राज शैफाली को क्रिकेट का भावी सुपरस्टार मान रही हैं।

Article Categories:
News · Sports

Comments are closed.

Shares