भारत की दो बेटियाँ, जिन्होंने विश्व मे फहरा दिया तिरंगा

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 28 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। स्विट्जरलैण्ड में खेले जा रहे बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भारतीय महिला खिलाड़ी पुरसला वेंकट सिंधु यानी पी. वी. सिंधु ने देश को पहला स्वर्ण पदक (GOLD MEDAL) दिला कर इतिहास रच दिया। इतना ही नहीं, सिंधु इस टूर्नामेंट में 2 कांस्य और 2 रजत पदक भी जीत चुकी हैं। कुल मिला कर सिंधु ने वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप में भारत का तिरंगा गाड़ कर 136 करोड़ लोगों का दिल जीत लिया है। सिंधु अब स्वदेश लौट चुकी हैं, परंतु क्या आप जानते हैं कि हैदराबादी गर्ल पी. वी. सिंधु ने जिस टूर्नामेंट यह ‘पंच पदक’ सफलता हासिल की है, उसी टूर्नामेंट में एक गुज्जू गर्ल ने भी एक इतिहास रचा है ?

आप सोच रहे होंगे कि स्विट्जरलैण्ड में कौन-सी गुजराती महिला खिलाड़ी पहुँच गई और उसने ऐसा क्या कारनामा किया, जो सिंधु की सफलता की चमक को भी फीका कर दे ? उत्तर है मानसी जोशी, जो पैरा एथेलीट हैं। सिंधु ने 25 अगस्त को जिस दिन बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडल जीत कर इतिहास रचा, उससे चंद घण्टे पहले ही गुज्जू गर्ल मानसी जोशी ने स्विट्ज़रलैण्ड में इसी टूर्नामेंट के तहत खेली जा रही पैरा वर्ल्ड पैडमिंटन चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीत कर इतिहास रचा था।

खेल मंत्री ने नियम बदले, PM ने बधाई दी

पी. वी. सिंधु और मानसी जोशी दोनों पर ही भारत को गर्व है। इसीलिए तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पी. वी. सिंधु से मुलाकात कर उन्हें शानदार उपलब्धि के लिए बधाई दी, तो दूसरी तरफ खेल मंत्री किरण रिजिजू ने पैरा वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप में 12 पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को न केवल सम्मानित किया, अपितु नियम बदल कर पहली बार इन खिलाड़ियों को नकद धनराशि पुरस्कार स्वरूप भी दी।

इतना ही नहीं बुधवार सुबह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ट्वीट कर पैरा बैडमिंटन चैम्पियनशिप में जीत दर्ज करने वाले सभी खिलाड़ियों को बधाई दी। मोदी ने ट्वीट कर कहा, ‘130 करोड़ भारतीयों को पैरा बैडमिंटन दल पर बहुत गर्व है। इस दल ने बीडब्ल्यूएफ पैरा वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप 2019 में 12 पदक जीते। पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाई, जिनकी सफलता अत्यंत खुशी देने वाली और प्रेरणादायी है। इनमें से हर खिलाड़ी असाधारण है।’

अलग है सिंधु और मानसी की कहानी

सिंधु और मानसी दोनों ही सम्पन्न परिवारों से आती हैं, परंतु दोनों में एक बड़ा फर्क़ है। सिंधु शारीरिक रूप से सम्पूर्ण स्वस्थ खिलाड़ी हैं, जबकि मानसी एक विकलांग खिलाड़ी हैं। मानसी के पिता मुंबई स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र में सेवारत् थे। मानसी ने छह वर्ष की आयु में अपने पिता के साथ बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था, परंतु वर्ष 2011 में एक ऐसी दुर्घटना हुई, जिसने मानसी के बैडमिंटन खिलाड़ी बनने के सपने को ज़ोरदार चोट पहुँचाई। दरअसल मानसी अपने दुपहिया वाहन से कहीं जा रही थी, तभी पीछे से ट्रक ने ज़ोरदार टक्कर मारी। इस भीषण दुर्घटना में मानसी का बायाँ पैर काटना पड़ा। 50 दिनों तक मानसी अस्पताल में भर्ती रहीं, परंतु उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अस्पताल से छुट्टी मिलते ही मानसी ने तय किया कि वे अपने सपने को दम नहीं तोड़ने देंगी। इस हादसे के बाद मानसी ने कृत्रिम पैर लगवाया और खेलना शुरू किया। इसके बाद मानसी ने हैदराबाद में सिंधु के गुरु पुल्लेला गोपीचंद की अकादमी में प्रशिक्षण लेना शुरू किया और अपने सपनों को उड़ान दी।

कौन हैं मानसी जोशी ?

मानसी जोशी मूलत: राजकोट-गुजरात की निवासी हैं। बचपन से ही बैडमिंटन खिलाड़ी बनने के सपने संजोए मानसी ने स्कूल और जिला स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल की, परंतु 2011 के उस हादसे के बाद मानसी को पैरा बेडमिंटन खिलाड़ी बनने पर विवश होना पड़ा। मानसी ने 2015 में इंग्लैण्ड में आयोजित पैरा वर्ल्ड चैम्पियनशिप में मिक्स्ड डबल्स का रजत पदक जीता, जो उनका पहला बड़ा पदक था। 2015 से ही मानसी ने गोल्ड का लक्ष्य तय कर लिया था और यह लक्ष्य तीन साल बाद 25 अगस्त, 2019 को हासिल हो सका। मानसी ने स्विट्ज़रलैण्ड में चल रहे वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप में पी. वी. सिंधु के गोल्ड मेडल जीतने से कुछ घण्टे पहले ही गोल्ड मेडल जीतने का अपना सपना पूरा किया। फाइनल में मानसी के सामने गुजरात की ही पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी पारुल परमार थीं। पारुल ढेपिंडिंग चैम्पियन (गत विजेता) थीं, परंतु मानसी ने महिला एकल में SL3 के इस फाइनल में अपने ही राज्य की पारुल को मात दे दी। एसएल3 वह कैटेगरी है, जिसमें उन खिलाड़ियों को शामिल किया जाता है, जिनके एक या दोनों लोअर लिंब्स काम नहीं करते और जिन्हें चलते या दौड़ते समय संतुलन बनाने में परेशानी होती है। मानसी ने 2017 में दक्षिण कोरिया में आयोजित पैरा वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भी कांस्य पदक जीता था।

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