भारत की इस ताक़त को देख कर दंग रह गई दुनिया

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 1 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। दुनिया में हर क्षेत्र में भारतीय श्रेष्ठ प्रदर्शन करके दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। खेल के मैदान में भी अब दुनिया भारत की ताक़त और जलवा देख रही है। भारत ने क्रिकेट, टेनिस, बॉलीवॉल, फुटबॉल, बेडमिंटन और चेस जैसे खेलों में तो अपना दम दुनिया को दिखाया ही है। अब कुश्ती के मैदान में भी दुनिया भारतीय पहलवानों की ताक़त और तकनीक देख कर अभिभूत हो रही है। इस साल भारत ने वर्ल्ड रेसलिंग चैम्पियनशिप में एक सिल्वर और चार ब्रॉन्ज़ मेडल सहित कुल 5 मेडल हासिल किये। इस टूर्नामेंट में यह भारत का अभी तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इसमें कई विदेशी कोच भारतीय खिलाड़ियों के स्टेमिना और ताक़त से हैरान दिखे।

भारत के लिये खास रही WWC

कज़ाकिस्तान के नूर सुल्तान में आयोजित हुई इस साल की वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप भारत के लिये कई मायनों में खास रही। देश के अखाड़ों में तैयार होकर निकले भारतीय रेसलर्स ने दुनिया के मैट पर ऐसे-ऐसे दाँव-पेच लगाये कि देखने वाले सभी लोग दंग रह गये। इस चैंपियनशिप में भारत ने 5 मेडल तो जीते ही, एक मात्र राहुल अवारे को छोड़ कर बाकी सभी ने यानी दीपक पूनिया, रवि कुमार दहिया, बजरंग पूनिया और महिला रेसलर विनेश फोगाट ने ओलंपिक का कोटा भी हासिल किया। इस चैंपियनशिप में दीपक पूनिया ने 86 कि.ग्रा. की कैटेगरी में सिल्वर मेडल प्राप्त किया, जबकि रवि कुमार दहिया ने 57 कि.ग्रा., राहुल अवारे ने 61 कि.ग्रा., बजरंग पूनिया ने 65 कि.ग्रा. और विनेश फोगाट ने 53 कि.ग्रा. की कैटेगरी में ब्रॉन्ज़ मेडल हासिल किये। एक मात्र राहुल अवारे ओलंपिक का टिकट हासिल नहीं कर पाये।

भारतीय रेसलर दीपक पूनिया
भारतीय रेसलर बजरंग पूनिया
भारतीय रेसलर राहुल अवारे
भारतीय महिला रेसलर विनेश फोगाट
भारतीय रेसलर सुशील कुमार

इस चैंपियनशिप के आयोजन से पहले देश को बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट से ही मेडल जीतने की सबसे ज्यादा उम्मीदें थी। क्योंकि उन्होंने कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में देश को गोल्ड मेडल दिलाया है, परंतु इस टूर्नामेंट का अंत होते-होते भारत को ऐसे रेसलर मिले, जिनसे भारतीय फैंस अब ओलंपिक में मेडल जीतने की उम्मीद कर सकते हैं। इन रेसलर्स में सबसे बड़ा नाम बनकर उभरे हैं जूनियर वर्ल्ड चैंपियन दीपक पूनिया। क्योंकि दीपक पहली बार ही सीनियर टूर्नामेंट में उतरे थे और पहली बार में ही उन्होंने ऐतिहासिक जीत हासिल करके देश को सिल्वर मेडल दिला दिया। मेडल के साथ ही उन्होंने ओलंपिक का कोटा भी हासिल कर लिया। 19 साल के इस खिलाड़ी ने हर मैच में हर बार पूरे दबदबे के साथ जीत हासिल की और दुनिया को दिखा दिया कि कोई उन्हें बच्चा समझने की भूल न करे।

भारतीय रेसलर्स की ताक़त से प्रभावित दुनिया

भारतीय पहलवानों ने अपनी ताक़त, तकनीक, रणनीति और जोश से दुनिया के दिग्गजों को पटखनी ही नहीं दी, बल्कि विरोधियों को, उनके कोच और मैच देखने के लिये आये दर्शकों को भी खूब प्रभावित किया। हालांकि देश की सबसे बड़ी पहचान बन चुके सुशील कुमार इस बार कोई कमाल नहीं कर पाये, परंतु बाकी रेसलर्स के प्रदर्शन ने दुनिया के अखाड़े में भारत के तिरंगे की शान बनाये रखी।

  • स्क्रोल की रिपोर्ट के अनुसार रूस के कोच ने भारतीय खिलाड़ियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि, भारत की रेसलिंग में बहुत सुधार हुआ है, पहले उनकी पहचान केवल सुशील कुमार थे, परंतु अब भारत के कई रेसलर्स दुनिया के मंच पर उभर रहे हैं।
  • सेमी फाइनल मुकाबले में भारत के स्टार रेसलर बजरंग पूनिया का सामना करने वाले मेजबान कज़ाकिस्तान के दौलत नियाजबेकोव के कोच ने बजरंग की तारीफ करते हुए कहा कि वे कमाल के रेसलर हैं, छह मिनट के मुकाबले में उनकी ताक़त देखने लायक थी। उनके जैसा स्टेमिना दुनिया के किसी भी रेसलर में नहीं है।
  • भारत को ब्रॉन्ज मेडल दिलाने वाले रवि कुमार दहिया भले ही सेमी फाइनल में हार गये, परंतु उन्होंने भी अपने खेल से विरोधियों को भी उनका फैन बना लिया। सेमी फाइनल में रवि को हराने वाले रूस के विश्व चैंपियन रेसलर जौर उगएव ने माना कि ओलंपिक में रवि मेडल के बड़े दावेदार होने वाले हैं, क्योंकि उनके अंदर जिस तरह की ताक़त है, वह किसी भी बड़े रेसलर को मात दे सकते हैं।

ताक़त के साथ तकनीक में भी अव्वल

बदलते समय के साथ भारतीय खिलाड़ियों की ताक़त के साथ-साथ तकनीक भी प्रभावी साबित हुई है। एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली महिला पहलवान विनेश फोगाट ने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में पहली बार मेडल हासिल किया है। उन्होंने भी विरोधियों को संदेश दिया है कि भारतीय रेसलिंग का अंदाज़ बदल रहा है और वह पहले से बेहतर हो रही है। विनेश के मुकाबले के बारे में बात करते हुए कमेंटेटर रॉबर्ट्स सैली ने कहा था कि विनेश के एंगल और मूव्स लाजवाब हैं। वे ताक़त के साथ-साथ अच्छा डिफेंस कर रही हैं, जो जरूरी भी है। सामान्यतः ऐसा देखने को नहीं मिलता है। विनेश भारत की ओर से ओलंपिक कोटा हासिल करने वाली पहली महिला रेसलर हैं। इस रेसलर ने साबित कर दिया है कि देश में रेसलिंग केवल दंगल और सुल्तान जैसी फिल्मों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अब ओलंपिक मेडलिस्ट से लेकर वर्ल्ड नंबर के खिलाड़ियों को मात देकर पोडियम तक पहुँच चुकी है।

भारतीय रेसलरों ने दुनिया में भारतीय रेसलिंग का स्तर इतना ऊँचा कर दिया है कि बजरंग पूनिया जैसे रेसलर दुनिया के स्टार बन चुके हैं। उनका ऑटोग्राफ और उनके साथ तस्वीर लेने के लिये फैंस होटल और स्टेडियम के बाहर उनका इंतज़ार करते हैं। राहुल अवारे ने भी मेडल हासिल करके जता दिया है कि भारत में कितनी प्रतिभा है, जिसका वर्ल्ड मैट पर उतरना अभी बाकी है और जल्द ही रेसलिंग की दुनिया में भारत का बोलबाला होगा। टोकयो में आयोजित होने वाले ओलंपिक-2020 में बेशक भारतीय पहलवान दुनिया के खिलाड़ियों के लिये बड़ी चुनौती बनने वाले हैं और साथ ही ओलंपिक में मेडल जीतने के प्रबल दावेदार भी होंगे।

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