क्या आप जानते हैं एशिया की सर्वश्रेष्ठ एथलीट चुनी गईं मैरी कॉम को किसने बनाया बॉक्सर ?

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अहमदाबाद 29 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। लगता है भारत अपने पुराने गौरवशाली दौर में लौट रहा है, जब इसे ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाता था। आज भारत हर क्षेत्र में अपनी कामयाबी का डंका बजा रहा है। फिर वह अंतरिक्ष की दुनिया हो या खेल जगत। भारत ने उन सभी क्षेत्रों में अपनी कामयाबी दर्ज कराई है, जिनमें उसे कभी पश्चिमी दुनिया पिछड़ा हुआ मानती थी। अब अखबारों के पन्नों पर केवल राजनीति, उससे जुड़े नेताओं या उनके तथाकथति घोटालों की ख़बरों से हट कर भी कुछ ऐसी ख़बरें प्रकाशित हो रही हैं, जिन पर हर भारतवासी को गर्व हो सके। आज भारत की उपलब्धियों के भी चर्चे हर ओर आम नज़र आते हैं।

वैसे तो खेल जगत में अक्सर क्रिकेट की ख़बरें सुर्खियाँ बँटोरती हैं, परंतु पिछले कुछ दिनों से क्रिकेट से इतर भी कई खेलों में भारत और उसके खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर भारत और उसके तिरंगे की शान बढ़ा रहे हैं। इनमें अधिकांश तो भारत की वह बेटियाँ हैं, जिन्होंने न केवल अपने पिछड़ेपन को पीछे छोड़ा, बल्कि भारत को पूरी दुनिया में सम्मान दिलाया। फिर चाहे वह पुरसला वेंकट सिंधु यानी पी. वी. सिंधु हों या पैरा एथलीट मानसी जोशी या हिमा दास। यहाँ यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि सिंधु ने गत 25 अगस्त को ही बैडमिंटन वर्ल्ड (BWF) फेडरेशन वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया, तो इसी चैम्पियनशिप के तहत आयोजित पैरा वर्ल्ड पैडमिंटन चैम्पियनशिप में मानसी जोशी ने सिंधु से चंद घण्टे पहले ही स्वर्ण पदक जीत कर एक नया इतिहास रचा। असम की हिमा दास ने भी जुलाई महीने में पदकों की श्रृंखला जीत कर इतिहास रचा था और जुलाई से लेकर अब तक 6 स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं।

अब मैरी कॉम ने बढ़ाया भारत का गौरव

खेल जगत में बेटियों के गौरवशाली प्रदर्शन के बीच बुधवार को एक और बिग गुड न्यूज़ आई, जब एशियन स्पोर्ट्सराइटर्स यूनियन (AIPS ASIA) ने प्रसिद्ध भारतीय मुक्केबाज मैरी कॉम को सर्वश्रेष्ठ एशियन एथेलीट घोषित किया। मलेशिया में आयोजित एक समारोह में मैरी कॉम को एशिया की सर्वश्रेष्ठ महिला एथलीट चुना गया। यह उनकी कामयाबी का एक और पड़ाव है जो उनके समर्पण और कड़ी मेहनत का परिणाम है। इस समारोह में खेल से जुड़े कई दिग्गज़ खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया। पुरुष खिलाड़ी में दक्षिण कोरिया के फुटबॉल ह्यूंग मिन सोन को यह सम्मान दिया गया। साथ ही एशियन स्पोर्ट्सराइटर्स यूनियन ने कतर फुटबॉल टीम को पुरुष वर्ग का सर्वश्रेष्ठ टीम और जापान फुटबॉल टीम को महिला वर्ग की सर्वश्रेष्ठ टीम के रुप में चुना। सेलेनगोर के मुख्यमंत्री वाईएबी तुआन हाजी अमिरुद्दीन ने सभी विजेताओं को ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया। स्पोर्ट्सराइटर्स यूनियन ने पहली बार इस कार्यक्रम का आयोजन किया था इसका लक्ष्य एशियाई एथलीटों के प्रदर्शन को मान्यता देना और उन्हें सम्मानित करना था।

https://twitter.com/AipsAsia/status/1166222016959041538?s=20

कौन है वह शख्स, जिसने मैरी कॉम को बॉक्सर बनाया ?

मैंगते चंग्नेइजैंग मैरी कॉम (M C MARY KOM) यानी मैरी कॉम को भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मैग्निफ़िसेंट मैरी के नाम से भी जाना जाता है। छह बार विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप का ख़िताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला बॉक्सर यानी मैरी कॉम वैसे किसी परिचय की महोताज नहीं। उनके जीवन पर पर एक फिल्म ‘मैरी कॉम’ भी बन चुकी है, जिसमें उनके जीवन-संघर्ष को बड़ी बारीकी से दर्शाया गया है। इसके बाद तो मैरी कॉम के बारे में हर आम आदमी यह जान गया कि कैसे भारत से लगभग कटे हुए रहने वाले पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर के एक छोटे से कस्बे कांगाथेई से निकलकर मैरी कॉम आज कामयाबी की बुलंदियों पर विराजमान हैं, परंतु क्या आप जानते हैं कि बुलंदियों के इस शिखर के धरातल पर मैरी कॉम के साथ कौन खड़ा था ? मैरी कॉम को खेल जगत की चोटी पर पहुँचाने में किसका योगदान है ? कौन हैं मैरी कॉम का मार्गदर्शक, जिसने उन्हें मुट्ठियाँ बांध कर देश का नाम रोशन करने की प्रेरणा दी। भारतीय बॉक्सिंग का सबसे बड़ा और ‌सफल नाम मैरी कॉम तो लाखों लोगों की प्रेरणा हैं, परंतु वह कौन है, जो उनकी प्रेरणा है ?

17 दिसम्बर, 1998 ने बदली मैरी कॉम की दुनिया

आइए हम बताते हैं आपको उस शख्स के बारे में। वह शख्स कोई और नहीं, बल्कि मैरी कॉम के ही राज्य मणिपुर से आने वाले डिंग्को सिंह हैं। इम्फाल पूर्व जिले के सुदूरवर्ती सेकता गाँव में 1 जनवरी, 1979 को जन्मे डिंग्को सिंह खेल खुद भी किसी परिचय का मोहताज नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने मात्र 19 साल की आयु में वह कारनामा किया, जिसने करोड़ों भारतीयों का दिल जीत लिया। वह दिन था 17 दिसम्बर, 1998 का और इसी दिन डिंग्को सिंह ने जो उपलब्धि हासिल की, उसने मैरी कॉम को बॉक्सिंग की दुनिया में आने के लिए प्रेरित किया।

दरअसल थाईलैण्ड स्थित बैंकॉक में 7 से 17 दिसम्बर, 1998 के दौरान लैंड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित बैंटमवेट मुक्केबाजी प्रतियोगिता का फाइनल मैच 17 दिसम्बर, 1998 के दिन खेला गया था और इस मुक़ाबले में डिंग्को सिंह ने उज़्बेकिस्तान के प्रसिद्ध मुक्केबाज तैमूर तुल्याकोव को हरा कर गोल्ड मेडल जीता था। उस मुकाबले में स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही डिंग्को सिंह को प्रतियोगिता का सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज भी घोषित किया गया। जब डिंग्को सिंह बैंकॉक में अपने मुक्कों की बरसात करते हुए स्वर्ण पदक हासिल कर रहे थे, तब मैरी कॉम कक्षा 6 की छात्रा थीं और उनकी आयु 15 वर्ष थी। मैरी कॉम डिंग्को के धारदार खेल से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने बॉक्सिंग को ही अपना कैरियर बनाने का संकल्प लिया। बॉक्सिंग के लिए उन्होनें स्कूली की पढ़ाई तक छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। बॉक्सिंग के प्रति उनकी लगन और ज़िद ने ही उन्हें आज विश्व चैंपियन बनाया है।

उपलब्धियों और पुरस्कारों से लबरेज़ मैरी कॉम

वैसे तो मैरी कॉम कई प्रतिष्ठित खेल पुरस्कारों से सम्मानित की जा चुकी हैं। वर्ष 2003 में अर्जुन अवॉर्ड, वर्ष 2009 में राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड मिल चुके हैं। वर्ष 2010 में उन्हें पद्म श्री और 2013 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। मैरी एकमात्र महिला बॉक्सर हैं, जिन्होंने पहले वर्ल्ड चैम्पियनशिप में सात पदक जीते हैं। 25 नवंबर 2018 को अपना छठा गोल्ड जीता। अब मैरी कॉम को एशिया की सर्वश्रेष्ठ महिला एथलीट चुना गया है। यह उनकी कामयाबी का एक और पड़ाव ही है, जो उनके समर्पण और कड़ी मेहनत का परिणाम है।

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