आज वर्ल्ड टीबी डे हैं, इसलिए इसके प्रति जागरूक बने, टीबी को दूर भगाऐं

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World Tuberculosis Day

नई दिल्ली: आज वर्ल्ड टीबी डे (World Tuberculosis Day) हैं इसलिए पुरे संसार में आज के दिन टीबी की जानकारियों का साझा करने का दिन है। यू तो हमें इस रोग के बारे में पता होना चाहिए क्योंकि इसकी जानकारी के अभाव के करण ही यह रोग अधिक फैलता है। टीबी अर्थात ट्यूबरक्लोसिस एक संक्रामक रोग होता है और इसको क्षय रोग भी कहा जाता है। यह एक ऐसा रोग है जिससे लगभग 1.5 मिलियन लोगों की मृतु हर साल हो जाती है। यह रोग हमारे देश में बहुत ही खतरनाक रूप ले चुकी है। इस रोग का इस प्रकार से फैलने का सबसे प्रमुख कारण, इसके प्रति लोगों को जानकारी का अभाव होना है।

वर्ल्ड टीबी डे (World Tuberculosis Day) क्यों मनाया जाता है? 

वर्ल्ड टीबी डे पूरे विश्व में 24 मार्च को मनाया जाता है। इसको मनाने का धय बस इतना है कि इसके बारे में अधिक से अधिक जानकारियां लोगों तक पहुंच जाये। वर्ल्ड टीबी डे (World Tuberculosis Day) को विश्व के सबसे बड़े स्वास्थ्य संगठन WHO (world health organisation) का समर्थन प्राप्त है। भारत में इस रोग के फैलने का मुख्य कारण इस रोग के प्रति लोगों का सचेन न होना तथा रोग के शुरुआती दौर में इसके इलाज में गंभीर न होना है।

World Tuberculosis Day मनाने का मकसद यह है कि इस रोग के प्रति लोगों में जागरूकता फैले। देखा जाये तो टीबी रोग को लाइलाज बीमारी नहीं है मगर यदि इसके इलाज में सावधानी न बरती जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। इस रोग के रोकथाम के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों की ओर से काफी प्रयास किया जा रहा है। इस समय सरकारी अस्पतालों में इसका इलाज मुफ्त है।

World TB Day

बेड़े शहरों में बढ़ता प्रदूषण टीबी का मुख्य कारण

दिल्ली जैसे बड़े शहरों में टीबी रोग होने का मुख्य कारण बढ़ता हुआ प्रदूषण माना जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया भार में एड्स के बाद मौतों की संख्या में टीबी ही है। भारत सरकार ने 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने का सपना रखा है। इसके तहत उत्तर प्रदेश में 3 खोज अभियान किये जा चुके हैं और इन 3 चरणों में 433 टीबी से पीड़ित व्यक्ति का पता चला जिसको देखकर यह ज्ञात हुआ कि इन मरीजों को पता नहीं था कि उन्हों यह खरतरनाक बीमारी हो चुकी है। ये अनजाने में अपने परिवार और आसपास के इलाके में टीबी के विषाणु पैला रहे थें।

टीबी रोग का बैक्टीरिया शरीर के जिस भाग में होता है, वहा का टीश्यू परी तरह से नष्ट हो जाता है। जिसके कारण उस अंग का काम करना बंद हो जाता है। यदि यह रोग फेफड़ों में हो जाता है तो फेफड़ा धीरे धीरे काम करना बंद कर देता है, ठीक इसी तरह से यकृत में यह रोग हो तो यकृत अपना काम करना बंद कर देता है। यदि यह रोग हड्डी में हो तो हड्डी अपने जगह से गल जाती है।

टीबी रोग के प्रकार

टीबी रोग कई प्रकार के होते हैं जैसे – इनटेस्टाइन टीबी, सरवाइकल टीबी, मेनिनजाइटिस टीबी, हड्डियों के टीबी और जेनेटिक टीबी आदि। इनको ठीक रूप से पहंचानने के लिए यह जिस भाग में होता है इसका टेस्ट कराना पड़ता है। इस रोग में माइकोबैक्टीरिया के कीटाणु फैलते हैं जो सीधे तौर पर फैफड़े को प्रभावित करते हैं।

टीबी रोग के लक्षण

दो सप्ताह या उससे अधिक दिन तक खांसी है तो वह टीबी रोग हो सकता है।
यदि खांसी के साथ खून आ रहा है तो टीबी हो सकती है।
यदि भूख कम लगे और इसके साथ वजन कम हो रहा है और खांसी भी हो तो टीबी हो सकता है।
अगर ठंड लगकर पसीने के साथ बुखार आ रहा हो और साथ में खांसी हो तो वह टीबी का लक्षण हो सकता है।
जब किसी व्यक्ति को काफी दिनों तक खांसी हो और इसके साथ ही शरीर में गांठे भी देखने को मिले तो वह टीबी रोग हो सकता है।

युवाप्रेश का सुझाव:- यदि किसी को टीबी हो जाये अथ्वा उसके ऊपर दिये किसी तरह के लक्षण प्रतीत हो तो उसे कम से कम 6 महीने तक इसका उपचार करवाते रहना चाहिए। टीबी रोग से पूरी तरह से मुक्ति पाने के लिए इसके कोर्स को पूरा करें, बीच में न छोड़े।

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Health · News · Sports & Health

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