ग्लोबल बिजनेस समिट में क्या बोले वित्तमंत्री अरुण जेटली

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Global Business Summit

Global Business Summit कार्यक्रम

हम सभी जानते हैं कि 2014 के लोकसभा चुनावों में अधिकतम सीटें भारतीय जनता पार्टी को मिल चुकी हैं। अब देखना यह होगा कि क्या बीजेपी यह करिश्मा दोबारा दोहरा पाती है कि नहीं। Global Business Summit कार्यक्रम में वित्त मंत्री अरुण जेटली से जब यह सवाल किया गया, तो इन्होने ने इसका जवाब बड़ी ही चतुराई के साथ दिया। इन्होने कहा कि दिल्ली में ऐनालिस्ट जो आकलन करते हैं उसका देश से संबंध नहीं है। पहले वे लोग हमें 150 सीटे देते थें, फिर जब कुछ हालात सुधरा तो 180। वोटिंग के बाद भी वे लोग हमें 220 से अधिक नहीं देते थें, लेकिन भारत के लोग दिल्ली में रहने वाले ऐनालिस्ट से बहुत ज्यादा समझदार है। इसके बाद जब इनसे सवाल किया गया कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ करना अच्छा है या नहीं तो इन्होने जवाब दिया कि यह देशहित के लिए अच्छा होगा। अलग अलग चुनाव कराने में देश का काफी खर्च होता है। एक साथ चुनाव कराने में देश का काफी धन और समय बचेगा।

पीएनबी फ्रॉड का मामला

चौथे ग्लोबल समिट में जब वित्तमंत्री अरुण जेटली से पीएनब महाघोटाले के बारे में पूछा गया, तो इन्होने जवाब दिया कि बड़े फ्रॉड को लेकर अलर्ट नहीं होना एक चिंता का विषय है। बैंको में हो रहे फ्रॉड के लिए नेताओ को जवाबदेह माना जा रहा है जबकि इसके लिए कोई भी रेग्युलेटर को दोषी नहीं मान रहा है। इस प्रकार के फ्रॉड को रोकने के लिए रेग्युलेटर्स का भी जवाबदेही तय करना पडे़गा। उन पर भी तीसरी आंख से नजर रखनी पडेगी। बता दें कि पीएनबी में घोटाला होने के बाद, कुछ दूसरे मामले जैसे रोटोमैक और ओबीसी बैंक में हेराफेरी का मामला सामने आ चुका है। इससे पहले भी वित्तमंत्री ने बैंक फ्रॉड मामले में मैनेजमेंट को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। वैसे इस मामले में जो भी दोषी पाया जायेगा उस पर सख्त कारवाई की जायेगी। किसी को भी छोड़ा नहीं जायेगा।

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल बिजनेस समिट (Global Business Summit) में शुक्रवार को कहा था कि मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहूंगा कि यह सरकार आर्थिक मामलों से जुड़ी अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कारवाई कर रही है, करेगी और करती रहेगी। जनता के पैसे का अनियमित अर्जन को यह सिस्टम कभी भी स्वाकार नहीं करेगी। इसके साथ ही मैं आप से एक अपील करना चाहता हूं कि विभिन्न फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस में नियम और नीयत यानि एथिक्स बनाए रखने की जिम्मदारी जिन लोगों को दी गई है, वो अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा से निभाये, खास करके वो लोग जिन्हे जिम्मेदारी दी गई है।

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