COUNTDOWN : बीते जा रहे हैं दिन, कर लीजिये यह ‘कर्म’, अन्यथा देना पड़ेगा दंड

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* अगर आप इस श्रेणी में आते हैं, तो बच सकते हैं दंड से

अहमदाबाद, 17 जुलाई, 2019 (युवाPRESS)। आयकर (IT) विभाग द्वारा असेसमेंट ईयर 2019-20 के लिये आयकर रिटर्न (ITR) भरने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई-2019 सुनिश्चित की गई है। इस अंतिम तारीख तक आयकरदाताओं को आईटीआर फाइल करना आवश्यक है और यदि इसमें कोई चूक की तो वह चूक आपको काफी भारी पड़ सकती है, क्योंकि इसके लिये 10,000 रुपये तक का भारी जुर्माना चुकाना पड़ सकता है।

आयकर रिटर्न भरने में देरी का मतलब है दंड

आयकर विभाग के नियमानुसार व्यक्तिगत, हिंदू अविभाजित परिवारों तथा जिन लोगों के खातों की ऑडिटिंग की आवश्यकता नहीं है अथवा जिनकी वार्षिक आय 50 रुपये से कम है, उनके लिये आईटीआर फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई है, यदि ऐसे करदाता इस अंतिम तारीख तक आईटीआर फाइल नहीं करते हैं तो यह भूल उन्हें भारी पड़ सकती है और उन्हें 10,000 रुपये तक का भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। वैसे यदि किसी कारण से 31 जुलाई-2019 तक आईटीआर फाइल नहीं कर पाते हैं तो इसके बाद 31 दिसंबर-2019 तक आईटीआर फाइल करने पर 5,000 रुपये तक जुर्माना लगेगा। यदि यह तारीख भी चूकते हैं और 1 जनवरी-2020 से 30 मार्च-2020 तक आईटीआर फाइल करते हैं तो फिर आपको 10,000 रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ेगा। जिन लोगों की आय 5 लाख रुपये से कम है, उन्हें भी लेट फाइन के रूप में 1,000 रुपये का दंड भुगतान करना होगा।

इन लोगों पर नहीं लगेगी कोई पैनल्टी

चार्टर्ड एकाउंटेंट (CA) बताते हैं कि यदि किसी व्यक्ति की कुल वार्षिक आय बेसिक छूट की लिमिट से अधिक नहीं है, तो उसे आईटीआर देरी से फाइल करने पर भी कोई पैनल्टी नहीं लगेगी।
एक कंपनी के सीईओ के मुताबिक यदि ग्रॉस टोटल इनकम आयकर छूट की बेसिक सीमा से कम रहती है तो आयकर रिटर्न फाइल करने में देरी होने पर भी इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 234F के तहत कोई पैनल्टी नहीं लगेगी। इसी मामले में एक अन्य करदाता ने बताया कि इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 139 के तहत आईटीआर फाइल करने वालों को सेक्शन 234F के हिसाब से फाइलिंग पर दंड चुकाना पड़ता है। सेक्शन 139(1) में स्पष्ट किया गया है कि इन लोगों के लिये आईटीआर फाइल करना अनिवार्य है। इसके तहत कोई भी कंपनी या फर्म आती है तथा ऐसे लोग आ जाते हैं, जिनकी आय आकर की अधिकतम छूट की सीमा से अधिक हो।
एक अन्य करदाता ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 10(38) के तहत भत्ते पर टैक्स छूट और सेक्शन 80C से 80U तक का लाभ लेने के बाद ग्रॉस टोटल इनकम की गणना करते है तो यह मान्य नहीं है।

ITR भरने के लिये कौन-सा फॉर्म भरें

आयकर विभाग के नियमानुसार जिन लोगों की कुल वार्षिक आय 50 लाख रुपये तक है और जिनकी यह आय वेतन, एक मकान प्रॉपर्टी और ब्याज से होती है, उनके लिये ITR-1 सहज फॉर्म है। यह एक पेज का फॉर्म होता है।
इसी प्रकार अविभाजित हिंदू परिवारों (HUFs)के लिये ITR-2 फॉर्म है। यह फॉर्म ऐसे लोगों के लिये है जिन्हें किसी कारोबार या पेशे से प्रॉफिट या लाभ नहीं होता है। इस फॉर्म में करदाता को अपने निवास स्थान से जुड़ी जानकारी देनी होगी कि वित्त वर्ष 2018-19 में आप वहाँ के निवासी थे या नहीं। अथवा साधारण निवासी थे या नॉन-रेजिडेंट थे। यदि आपके पास अनलिस्टेड कंपनी के शेयर हैं तो आपको आईटीआर-2 में इसकी जानकारी देनी होगी। इस जानकारी में कंपनी का नाम, पैन नंबर, शेयरों की संख्या और आपके द्वारा खरीदे या बेचे गये शेयरों की जानकारी देनी होगी।
ITR-3 फॉर्म उन नागरिकों के लिये और अविभाजित हिंदू परिवारों के लिये है, जिन्हें किसी कारोबार या पेशे से कोई प्रॉफिट या लाभ होता है।

ITR-4 सुगम- आईटीआर-4 सुगम ऐसे लोगों के लिये है, जिनकी कारोबार या पेशे से आय हो रही है।
ITR-5 इंडीविजुअल यह फॉर्म एचयूएफ, कंपनी और आईटीआर-7 फॉर्म भरने वालों के अतिरिक्त अन्य करदाताओं के लिये है।
ITR-6 यह फॉर्म सेक्शन-11 के तहत छूट का दावा करने वाली कंपनियों के अलावा अन्य कंपनियों के लिये होता है।
ITR-7 यह फॉर्म ऐसी कंपनियों और लोगों के लिये होता है, जिन्हें सेक्शन 139(4A) या 139(4B) या 139(4C) अथवा 139(4D) या 139(4E) या 139(4F) के तहत रिटर्न भरने की आवश्यकता होती है।

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