जब पेपर बेचने वाला पेपर में छा गया

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सफलता के क्या राज हैं ? इस सवाल के जवाब में सफल व्यक्ति कहते हैं कि There is no secret to success. It’s result of hard work, determination and learning from failures. कुछ लोग सफल होते हैं लेकिन कुछ लोग सफल होकर सैकड़ों लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत बन जाते हैं। बेंगलुरू के N. शिवा एक ऐसे ही होनहार युवा हैं जिन्होंने कड़ी मेहनत और लगन की बदौलत खुद को देश के प्रीमियर बिजनेस स्कूल का हिस्सा बनाया। आज वे IIM-C के छात्र हैं। IIM-C जाने से पहले तक N. शिवा अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए पेपर बेचा करते थे।

 स्कूल फीस भरने के लिए पेपर बेचने का काम शुरू किया

अपने संघर्ष की कहानी बताते हुए N शिवा कहते हैं कि मैं सुबह 4 बजे उठ जाता था और साइकिल से घर-घर जाकर पेपर डिलीवर करता था। यह काम मैं तब से कर रहा हूं जब मैं क्लास 6 में था। स्कूल दिनों को याद करते हुए शिवा कहते हैं कि जब मैं क्लास 9 में पढ़ रहा था तो स्कूल फीस नहीं देने की वजह से मुझे स्कूल आने से रोक दिया गया था। लेकिन मैं पढ़ना चाहता था। तब मैंने पेपर लेने वाले एक कस्टमर से कहा कि मुझे पैसों की जरूरत है क्योंकि फीस नहीं भरने के चलते मुझे स्कूल आने से रोक दिया गया है। उन्होंने मेरे बारे में स्कूल में पता किया तो उन्हें पता चला कि मैं अपने क्लास का टॉपर हूं। वे मुझसे काफी प्रभावित हुए और उन्होंने पूरे साल की फीस भर दी। उसके बाद भी उन्होंने हमेशा मेरी मदद की।

काम करते हुए पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था

N. शिवा पुराने दिनों को याद कहते हुए कहते हैं कि जब मैं बोर्ड में था तब मैंने वेंडर ब्वॉय का काम शुरू किया और जल्द ही मैंने अपनी एजेंसी खोल ली। बचपन से काम करने की वजह से मुझमें बिजनेस का हुनर है। काम करते हुए पढ़ाई जारी रखना मेरे लिए आसान नहीं था। सुबह 4-6 बजे तक मैं पेपर डिलीवर करता था फिर मैं स्कूल के लिए तैयार होता था। सुबह के कई क्लासेज मैं सोते हुए गुजारता था।

खुद आगे बढ़ें और लोगों को भी आगे बढ़ाएं

शिवा कहते हैं मैं जिंदगी के सबसे कठिन दौर से गुजर चुका हूं। मैंने कभी हिम्मत नहीं हारी और मुझे पूरा भरोसा था कि मेरा सपना जरूर सच होगा। वे आगे कहते हैं कि पढ़ाई पूरी करने के बाद मुझे सबसे पहले अपने परिवार को संभालना है। मम्मी-पापा को स्थाई करने के बाद मैं एक चैरिटेबल इंस्टीट्यूट खोलना चाहता हूं। आज मैं जो कुछ हूं, क्योंकि एक शख्स ने मुझपर कभी भरोसा किया था और मुझे पढ़ाई जारी रखने में हर तरह से मदद की। अगर मैं अपनी जिंदगी में 10 लोगों की भी मदद कर पाया तो मुझे बहुत खुशी होगी। देश के युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे खुद भी आगे बढ़ें और अपने साथ दूसरे लोगों को भी आगे बढ़ाएं। जब तक देश के युवा इस तरह से नहीं सोचेंगे हमारा देश विकास नहीं कर सकता है।

 

 

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Youth Corner · Youth Icons

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