लाखों Ethical Hackers की जरूरत, बनाएं इसको पेशा

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नई दिल्ली। Hacking और Cyber Crime ने पूरी दुनिया की नींद उड़ा रखी है। पूरे विश्व में इंटरनेट यूजर की संख्या बढ़ रही है। बात अगर भारत की करें तो वर्तमान में करीब 45 करोड़ इंटरनेट यूजर हैं। । NASCOM की रिपोर्ट के मुताबिक 2020 तक भारत में इंटरनेट यूजर की संख्या करीब 70 करोड़ हो जाएगी। डिजिटल इंडिया प्रोग्राम पीएम मोदी की महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक है। इस प्रोग्राम के तहत पूरे देश में फाइबर ऑप्टिकल का जाल बिछाया जा रहा है। देश की करीब 2.5 लाख पंचायतों को इंटरनेट से जोड़े जाने का काम जारी है। इस प्रोग्राम के तहत अब तक करीब 1 लाख पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर की जाल बिछाई जा चुकी है। आने वाले कुछ सालों में 2.5 लाख पंचायतों तक इंटरनेट की पहुंच होगी।

1.7 करोड़ रोजगार के अवसर

इंटरनेट की उपयोगिता हमारी जिंदगी में जितनी बढ़ेगी हमें उसी स्तर तक साइबर सिक्योरिटी की जरूरत भी होगी। इस लिहाज से देखा जाए तो साइबर सिक्योरिटी के फील्ड में नौकरी की बहुत बड़ी संभावनाएं हैं। तमाम रिपोर्ट के आधार पर अगले कुछ सालो में साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में करीब 1.7 करोड़ साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल की जरूरत होगी। इनमें सबसे ज्यादा जरूरत और मांग ट्रेंड एथिकल हैकर की होने वाली है।

Cashless Economy के लिए साइबर सिक्योरिटी बहुत अहम

साइबर फिल्ड के एक्सपर्ट की माने तो अगर समय रहते साइबर सिक्योरिटी पर ध्यान नहीं दिया गया तो डिजिटल इंडिया और कैशलेस इकोनॉमी का भविष्य खतरे में होगा। साइबर हमले की वजह से हमारा सबकुछ दांव पर लग सकता है। यूजर अपने बैंक अकाउंट डिटेल्स से लेकर पर्सनल सीक्रेट्स तक अपने मेल और फोन में लॉक करके रखते हैं। हर सरकारी और गैर सरकारी जगहों पर “आधार” को जरूरी बना दिया गया है। ऐसे में अगर साइबर अटैक होता है तो हमारी पहचान और सीक्रेट दुनिया के सामने होगी। यह संवेदनशील मामला है।

Cyber Security को लेकर कानून बनाने की जरूरत

अभी तक साइबर सिक्योरिटी को लेकर अपने देश में कोई कानून भी नहीं है। साइबर सिक्योरिटी का अपने देश में क्या हाल है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश की 70 फीसदी ATM मशीनें विंडो ऑपरेटिंग सिस्टम पर चल रही है। मई 2017 में हुए साइबर अटैक के बाद मजबूरी में सुरक्षा के चलते सभी ATM को बंद करना पड़ा था। अक्टूबर 2016 में साइबर अटैक की वजह से अलग-अलग बैंकों के 32 लाख ATM कार्ड की जानकारी चोरी हो गई थी। जनवरी 2017 में एकबार फिर से भारतीय बैंकों को निशाना बनाया गया था। इस हमले के बाद बैंकों ने अपने ग्राहकों से पासवर्ड बदलने को कहा था। इन्हीं सब वजहों से बैंकों ने लाखों कस्टमर को पुराने डेबिट कार्ड को नए डेबिट कार्ड से बदलने की बात कही थी। एक्सपर्ट के मुताबिक भारत का बैंकिंग सेक्टर साइबर सिक्योरिटी के नजरिए से काफी कमजोर है।

Cyber Crime को लेकर जागरूकता फैलाने की जरूरत

साइबर अटैक को लेकर तमाम एक्सपर्ट अपनी राय देते रहते हैं, अपने लेख और कॉलम के जरिए लोगों को जागरूक करने की कोशिश करते हैं। लेकिन रिपोर्ट की माने तो देश की 65 फीसदी कंपनियों के पास साइबर अटैक से सावधान वाले प्रोग्राम नहीं है। अगर साइबर अटैक हो जाए तो 90 फीसदी ऐसी कंपनियां हैं जिनके पास बचने के लिए काउंटर सिस्टम जैसा कुछ नहीं है।

परमाणु हमले से भी खतरनाक है Cyber Attack

साइबर अटैक को अगर परमाणु हमले जैसा खतरनाक बताएं तो गलत नहीं होगा क्योंकि इसमें दुश्मन दुनिया के किसी भी कोने से आपको निशाना बना सकता है। साइबर अटैक की कोई सरहद नहीं है। अटैक करने वाला हमारे लिए फिजिकल थ्रेट नहीं है। सबकुछ वर्चुवल वर्ल्ड का हिस्सा है।

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