Israel Palestine Conflict: जानें मुस्लिम देश क्यों करते हैं इजरायल को नापसंद ?

Written by
Israel Palestine Conflict

इजरायली (Israel) प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू (Benjamin Netanyahu) आजकल भारत दौरे पर हैं। इस दौरे से भारत और इजरायल के संबंध नई ऊंचाई पर पहुंचने की संभावना जतायी जा रही है। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते किए गए हैं, जिससे दोनों देशों को फायदा होगा। लेकिन बता दें कि इजरायल के किसी भी बड़े नेता का यह 15 साल बाद पहला भारत दौरा है। इससे पहले साल 2003 में इजरायल के तत्कालीन पीएम एरियल शेरोन (Ariel Sharon) पहली बार भारत दौरे पर नई दिल्ली आए थे। गौरतलब बात है कि भारत और इजरायल के बीच आज संबंध भले ही मजबूत हो, लेकिन दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध सिर्फ 25 साल पहले स्थापित हुए हैं। दरअसल इससे पहले भारत ने इजरायल के अस्तित्व को मान्यता ही नहीं दी थी और इजरायल-फलस्तीन विवाद (Israel Palestine Conflict) में फलस्तीन का साथ दिया।

बताते चलें कि कई अरब देश तो आज भी इजरायल के अस्तित्व को नकारते हैं। तो आखिर क्या वजह है कि अरब देश और पूरी दुनिया के मुस्लिम, इजरायल से इतने खफा क्यों हैं ? इस सवाल का जवाब जानने के लिए थोड़ा इतिहास में झांकना पड़ेगा।

कैसे हुई इजरायल-फलस्तीन विवाद (Israel Palestine Conflict)की शुरुआत

बता दें कि 14वीं शताब्दी से लेकर 19वीं शताब्दी के मध्य तक पूरे मध्य-पूर्व (Middle-East) में शक्तिशाली ऑटोमन साम्राज्य (Ottoman Empire) का शासन रहा। इस दौरान मौजूदा इजरायल का अस्तित्व नहीं था। 19वीं सदी के मध्य तक ऑटोमन साम्राज्य काफी कमजोर हो चुका था। इसी बीच सन् 1890 के करीब यहूदी लोगों में अपना खुद का एक देश बनाने की भावना जागी। दरअसल इसके पीछे भी एक वजह है। गौरतलब है कि यहूदी लोग उस वक्त पूरी दुनिया के देशों में फैले हुए थे। वहीं यूरोप के कई देशों में यहूदी लोगों का बड़े पैमाने पर नरसंहार किया गया। जिसके बाद थियोडोर हर्जल नाम के एक यहूदी के नेतृत्व में यहूदी लोगों के मन में भी ये भावना जागी कि उनका भी एक देश होना चाहिए।

अब यह सोचने वाली बात हो सकती है कि यहूदी लोगों ने अपना देश बनाने के लिए फलस्तीन की धरती को ही क्यों चुना ? दरअसल आज से करीब 3000 साल पहले फलस्तीन की धरती पर यहूदी साम्राज्य था और कह सकते हैं कि फलस्तीन से ही यहूदी धर्म की शुरुआत हुई। यही वजह रही कि पूरी दुनिया में सताए जा रहे यहूदियों ने फलस्तीन की ओर पलायन शुरु कर दिया।

Israel Palestine Conflict

ब्रिटेन ने भड़काया विवाद

जब यहूदी लोगों का धीरे-धीरे फलस्तीन की ओर पलायन हो रहा था। इसी दौरान प्रथम विश्वयुद्ध (First World War) शुरु हो गया। इसी समय शक्तिशाली ब्रिटेन, इजरायल-फलस्तीन की बहस में कूद पड़ा। जिसके तहत ब्रिटेन ने एक समझौते के तहत फलस्तीन को यहूदियों का देश मान लिया। वहीं दूसरी तरफ अरब देशों को भी यह वादा कर दिया कि फलस्तीन पर अरब देशों को दे दिया जाएगा। बस यही वो वक्त था, जब इजरायल-फलस्तीन विवाद (Israel Palestine Conflict) को हवा मिल गई। प्रथम विश्व युद्ध के बाद फलस्तीन ब्रिटेन के प्रभाव में आ गया। यही वो वक्त था, जब फलस्तीन में यहूदियों की संख्या तेजी से बढ़ी और फलस्तीन की कुल जनसंख्या में से 30% यहूदी जनसंख्या हो गई।

जब फलस्तीन में यहूदियों की संख्या बढ़ने लगी तो साल 1936 में वहां के स्थानीय अरब लोगों ने यहूदियों के खिलाफ लड़ाई छेड़ दी। लेकिन यहूदियों की मदद से ब्रिटेन सरकार ने इन विरोध प्रदर्शनों को दबा दिया। कुछ समय बाद द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) शुरु हो गया। जिसमें जर्मनी में यहूदियों का बहुत बड़े पैमाने पर नरसंहार किया गया। हालात ये थे कि कहा जाता है कि इस दौरान जर्मनी में 40 लाख के करीब यहूदियों को मौत के घाट उतारा गया। जब हालात इस कदर डरावने हो गए तो पूरी दुनिया से यहूदी भागकर इजरायल पहुंच गए।

Israel Palestine Conflict

इजरायल (Israel) का उदय

द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) के बाद जब अधिकतर यहूदी भागकर फलस्तीन पहुंच गए तो वहां स्थानीय अरब लोगों और यहूदियों में टकराव हो गया। हालात बेकाबू होते देख ब्रिटेन ने यहां से अपने हाथ खींच लिए और मामला यूनाइटेड नेशन (United Nations) में पहुंच गया। इस पर साल 1947 में यूनाइटेड नेशन (UN) ने फलस्तीन का बंटवारा कर दिया और जिन इलाकों में मुस्लिम आबादी थी, वह हिस्सा फलस्तीन के पास रहा और जिस इलाके में यहूदी आबादी बहुसंख्यक थी, वो हिस्सा इजरायल कहलाया। जबकि राजधानी यरुशेलम में मिश्रित आबादी थी, इसलिए यरुशलम (Jerusalem) को अन्तर्राष्ट्रीय शहर घोषित कर दिया गया और दोनों देशों को यरुशलम पर समान अधिकार दिया गया।

पहला अरब-इजरायल युद्ध

अब जब यूनाइटेड नेशन ने फलस्तीन का बंटवारा किया और इजरायल बनाया तो इस स्वभाविक तौर पर इस फैसले से अरब देशों में नाराजगी होनी ही थी। यही वजह रही कि इजरायल के अस्तित्व में आते ही साल 1948-49 में मिस्त्र, सीरिया, इराक और जॉर्डन जैसे अरब देशों ने इजरायल पर हमला कर दिया। इन अरब देशों की कोशिश थी कि इजरायल पर हमला कर उसका अस्तित्व (Israel Palestine Conflict) ही खत्म कर दिया जाए। लेकिन हकीकत में हुआ इसके बिल्कुल उल्टा और इजरायल ने अरब देशों को युद्ध में हरा दिया। जिसका नतीजा ये हुआ कि इजरायल की सीमा में काफी इजाफा हो गया, वहीं फलस्तीन के कई इलाकों पर जॉर्डन और मिस्त्र का कब्जा हो गया। एक तरह से कह सकते हैं कि इस युद्ध के बाद फलस्तीन का अस्तित्व समाप्त ही हो गया।

Israel Palestine Conflict

दूसरा अरब-इजरायल युद्ध

चूंकि इजरायल और अरब देशों के रिश्तें बुरी तरह से खराब थे। यही वजह थी कि मिस्त्र, जॉर्डन और सीरिया ने मिलकर एक बार फिर से इजरायल पर हमला कर दिया। इस युद्ध को 6 Day War के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह लड़ाई सिर्फ 6 दिन चली थी और इस युद्ध में एक बार फिर से अरब देशों की बुरी हार हुई। जिसके बाद मिस्त्र, सीरिया और जॉर्डन के कई हिस्सों पर भी इजरायल का कब्जा हो गया। इसके बाद साल 1973 में मिस्त्र और सीरिया ने इजरायल से अपने हिस्सों को वापस पाने के लिए एक बार फिर से इजरायल पर हमला किया। इस लड़ाई को Yom Kippur War के नाम से जाना जाता है। इस लड़ाई के बाद मिस्त्र और इजरायल में एक समझौता हुआ। जिसके तहत इजरायल ने मिस्त्र के जीते हुए हिस्सों पर अपना कब्जा हटा लिया। इसके एवज में मिस्त्र ने इजरायल को एक अलग देश के रुप में मान्यता दे दी। इसके बाद अन्य अरब देशों ने, हालांकि इजरायल को अलग देश के रुप में मान्यता नहीं दी, लेकिन एक तरह से इजरायल के अस्तित्व को छिपे मन से स्वीकार कर लिया।

Israel Palestine Conflict

आज भी फलस्तीन के कुछ संगठन जैसे PLO(Palestine Libration Organisation) और हमास आदि इजरायल के खिलाफ लड़ाई छेड़े हुए हैं। पिछले कुछ सालों में इजरायल में हिंसा का दौर भी आया है, जिसमें काफी संख्या में यहूदी और फलस्तीनी लोगों की मौत हुई है। इन हिंसक घटनाओं में 1987-93 का दौर और साल 2000-05 का दौर शामिल रहा। बहरहाल दोनों ही तरफ से छिट-पुट हिंसा की घटनाएं आज भी बदस्तूर जारी हैं। लेकिन आज तक इजरायल-फलस्तीन विवाद (Israel Palestine Conflict) का हल नहीं हो पाया है। यही वजह है कि आज भी दुनियाभर के मुस्लिम देश इजरायल को नापसंद करते हैं।

Article Categories:
News · Youth Corner · Yuva Exclusive

Leave a Reply

Shares