ऐसी सोच से ही बदलेगी दुनिया

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आज पूरी दुनिया धरती के बढ़ते तापमान से चिंतित है, लेकिन इसके बावजूद इसे रोकने के लिए जरुरी कदम उठाने में कोताही बरती जा रही है। लेकिन कुछ लोग हैं, जो अपने छोटी छोटी कोशिशों से इस दुनिया को बचाने की कोशिशों में लगे हुए हैं। ऐसे ही एक शख्स हैं गुजरात के रहने वाले मनसुखभाई प्रजापति।

कौन हैं मनसुखभाई प्रजापति

मनसुखभाई प्रजापति एक उद्यमी हैं, जो कि बिजली के बिना चलने वाले फ्रिज और नॉन स्टिकी तवे के अविष्कारक है। एक पल को आपको लगेगा कि ऐसे तो कई उद्ममी होंगे, जो फ्रिज और नॉन स्टिकी तवे का निर्माण करते होंगे तो मनसुखभाई में ऐसा क्या खास है, जो आज हम उनकी चर्चा कर रहे हैं। बता दें कि मनसुखभाई के बनाए हुए फ्रिज मिट्टी के होते हैं, जो कि बिना बिजली के चलते हैं। इस फ्रिज को मनसुखभाई ने “मिट्टीकूल” नाम दिया है।आज जब दुनिया ग्लोबल वॉर्मिंग की समस्या से जूझ रही है तो मनसुखभाई का यह अविष्कार बेहद अहम हो जाता है।

प्रकृति की तरफ लौटने का प्रयास

बता दें कि मौजूदा इलेक्ट्रिक फ्रिज धरती के बढ़ते तापमान को बढ़ाने वाले सबसे अहम कारकों में से एक है। साथ ही फ्रिज में रखी जाने वाली चीजें कुछ समय बाद अपना प्राकृतिक स्वाद खो देती हैं। लेकिन मनसुखभाई के बनाए गए फ्रिज मिट्टीकूल की खासियत है कि इसमें रखी गई सब्जियां आराम से 4-5 दिन चलती है और उनका प्राकृतिक स्वाद भी बरकरार रहता है। सबसे अहम बात है कि यह आम फ्रिज के मुकाबले काफी सस्ता है, जो कि भारत जैसे देश में जहां ग्रामीण आबादी बड़ी तादाद में है, वहां यह फ्रिज काफी मायने रखता है।

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कैसे हुई शुरुआत

मनसुखभाई का जन्म गुजरात के राजकोट में मोरबी इलाके में हुआ था। मिट्टी के पारंपरिक बर्तन बनाने का उनका पारिवारिक काम था। इसलिए वह बचपन से ही इस कला की ओर रुझान रखते थे। मनसुखभाई ने परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए जल्दी ही पढ़ाई छोड़ दी थी। लेकिन अपनी मेहनत और रचनात्मकता के दम पर मनसुखभाई ने आज यह मुकाम पाया है।

मनसुखभाई ने मिट्टी के उपकरण बनाने की शुरुआत साल 1988 में ही कर दी थी। लेकिन साल 2001 में गुजरात में आए भयंकर भूकंप में उन्हें बड़ा नुकसान हुआ। इसके बाद साल 2002 में मनसुखभाई ने Grassroots Innovation Augmentation Network (GIAN) की मदद से मिट्टीकूल रेफ्रीजरेटर का निर्माण किया और आज उनकी कंपनी नॉन स्टिक तवा और दैनिक जरुरतों के कई उपकरणों का निर्माण कर रही है। अपनी इन कमाल की खोजों के लिए मनसुखभाई को कई अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है।

बता दें कि भारत में मनसुखभाई की तरह ही कितने प्रतिभाशाली लोग भरे पड़े हैं। जो अपने अनूठे अविष्कारों से देश ही नहीं दुनिया को बदलने की ताकत रखते हैं। अब यहां पर सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करे ताकि इनके उपयोगी अविष्कार लोगों तक पहुंच सकें और चाहे छोटे स्तर पर ही देश और दुनिया में बदलाव तो आए।

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