मोदी राज में इस तरह STARTUP और STANDUP हुआ INDIA : दुनिया में उमड़ रहा प्यार, देश में मिल रहा रोजगार

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सैकड़ों लोग बने BOSS, तो हजारों लोगों को मिला JOB

आलेख : विनीत दुबे

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत के ऐसे पीएम हैं जो नये विचारों को अमल में लाने के लिये जाने जाते हैं। वह सुविधाओं का मॉर्डनाइलेशन करने के पक्षधर हैं। देश में उनका एक बड़ा प्रशंसक वर्ग भी है, जो उन्हें फॉलो करता है। पीएम मोदी ने 2014 में केन्द्र की सत्ता में आने के बाद 15 अगस्त-2015 को स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में ‘STARTUP INDIA और STANDUP INDIA’ का नारा बुलंद किया था। देश के युवाओं ने भी उनके इस आह्वान पर प्रभावी ढंग से अमल किया। परिणामस्वरूप आज दुनिया भर में भारतीय स्टार्टअप का बोलबाला है और भारतीय उत्पादों की लगातार माँग बढ़ रही है।

स्टार्टअप-स्टैण्डअप के नये विचारों को साकार करने का नारा देने के पीछे पीएम मोदी का उद्देश्य था कि देश का आर्थिक विकास हो और युवाओं को भी रोजगार मिले। पीएम की यह पहल युवाओं को उद्यमी और उद्योगपति बनने के अवसर दे रही है। पीएम का यह नारा भी खूब बुलंद हुआ है और उद्देश्य भी सफल हो रहा है, क्योंकि दुनिया भर में भारतीय स्टार्टअप्स अपनी विशेष पहचान बना रहे हैं और भारतीय उत्पादों की माँग भी तेजी से बढ़ रही है। ऊबर जैसे स्टार्टअप से प्रेरणा लेकर ओला तथा ऐसी ही अन्य कंपनियाँ न सिर्फ सफलता की ऊँचाइयों को चूम रही हैं, बल्कि युवाओं को रोजगार के विकल्प भी दे रही हैं।

व्यवसाय प्रक्रिया आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री के संगठन द नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एण्ड सर्विसेज़ कम्पनीज़ (NASSCOM) के अनुसार भारतीय स्टार्टअप ईको-सिस्टम दुनिया में पाँचवें नंबर पर है। वर्ष 2014 में स्टार्टअप के माध्यम से लगभग 65,000 लोगों को रोजगार मिला, वहीं 2015 में यह संख्या बढ़कर 80,000 तक पहुँच गई। 2014 में 805 स्टार्टअप शुरू हुए थे, 2015 में यह आँकड़ा बढ़कर एक हजार के पार हो गया था। 2016 में लगभग 1200 स्टार्टअप शुरू हुए। नैस्कॉम की रिपोर्ट के अनुसार 2020 तक स्टार्टअप की संख्या 11,500 तक पहुँच सकती है और इनके माध्यम से रोजगार के ढाई लाख अवसर पैदा हो सकते हैं।

दुनिया भर में स्टार्टअप की प्रगति पर नज़र रखने वालेस संस्थान STARTUPBLINK की ओर से जारी 2019 की स्टार्टअप इको-सिस्टम रैंकिंग में 100 देशों में से भारत 17वें स्थान पर है, जो कि पिछले वर्ष यह 37वें स्थान पर था। यह रैंकिंग 1000 शहरों तथा 100 देशों के स्टार्टअप इको-सिस्टम को ध्यान में रखता है। भारत के मुकाबले चीन 27वें स्थान पर है। भारतीय स्टार्टअप इको-सिस्टम में बंगलुरु, नई दिल्ली और मुंबई मुखर शहर हैं।

स्टार्टअप शुरू करने के लिये शुरुआती बजट कम से कम 10 लाख रुपये से लेकर 100 करोड़ रुपये तक हो सकता है। यदि आपका आइडिया अच्छा है तो आपको फंडिंग करने वाले लोग मिल जाते हैं। देश के बड़े बिज़नेसमैन से लेकर वेंचर कैपिटलिस्ट आपके स्टार्टअप में पैसा लगा सकते हैं। इनसे पैसा जुटाने के लिये आपको उन्हें अपने बिज़नेस का पूरा प्लान और उसकी स्ट्रैटजी बतानी होगी, क्योंकि कोई भी व्यक्ति आपके स्टार्टअप में निवेश करने से पहले आपके पोटेंशियल की जाँच करता है। फंडिंग के सबसे बड़े उदाहरण हैं टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा। टाटा अभी तक 15 से अधिक स्टार्टअप में निवेश कर चुके हैं।

भारतीय स्टार्टअप द्वारा बनाये गये उत्पादों की दुनिया में बढ़ती माँग की बात करें, तो यूएस-इण्डिया स्ट्रैटेजिक एण्ड पार्टनरशिप फोरम (USISPF) के अध्यक्ष मुकेश अघी के अनुसार भारतीय स्टार्टअप तीसरे चरण में पहुँच रहे हैं। कोडिंग और एम्युलेटिंग जैसे कॉन्सेप्ट भले ही पश्चिमी देशों में विकसित हुए हों, परंतु भारतीय स्टार्टअप भी इनमें अब पारंगत हो गये हैं। अब वे ऐसी स्थिति में हैं कि दुनिया भर के लिये सफलतापूर्वक उत्पाद बना रहे हैं। शुरुआती दौर में श्रम बल से ज्यादा कोडिंग को महत्व दिया गया और दूसरे चरण में एम्युलेटिंग पर जोर दिया जाने लगा है। अघी ने कहा कि तीसरे चरण में अब ऐसी उत्पाद कंपनियाँ सामने आ रही हैं जिन्हें दुनिया भर के लिये विकसित किया गया है। इन उत्पादों की श्रेणियों में आवाज की पहचान से लेकर साइबर सुरक्षा और हेल्थकेयर क्षेत्र तक शामिल हैं।

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