भारत के सुपरपॉवर बनने की राह में ये है सबसे बड़ा रोड़ा !

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Population Explosion

भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। दुनिया में निवेश के नजरिए से हमारा देश सबसे बेहतर जगहों में से एक है। हमारी कई इंडस्ट्री आज दुनिया की रफ्तार के साथ कदमताल कर रही हैं। लेकिन इन सब के बावजूद भारत से गरीबी, अशिक्षा, सांप्रदायिकता जैसी बीमारियां अभी तक दूर नहीं हो सकी हैं। इन समस्याओं की तह में जाएं तो पता चलेगा कि इनका मूल कारण हमारी बढ़ती जनसंख्या (Population Explosion) है। आप भी कहीं ना कहीं हमारी इस बात से सहमत होंगे, लेकिन हम अपने इस लेख में विस्तार से आपको इसका कारण बताएंगे। तो शुरु करते हैं…

गरीबी (Poverty)

भारत में गरीबी की बात करें तो साल 2012 के भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक देश में आज भी 22 % जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करती है। वहीं World Bank की साल 2011 की रिपोर्ट के मुताबिक तो यह आंकड़ा 23.6% है। गौरतलब बात ये है कि ये सरकारी आंकड़े हैं और सही आंकड़े इससे कहीं ज्यादा हो सकते हैं। ऐसा नहीं है कि हमारे नीति-नियंता हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं, लेकिन हर साल सरकार जितने लोगों को रोजगार, घर आदि की सुविधा देकर गरीबी रेखा से निकालती है, उतने ही नए या कहें कि उससे भी ज्यादा लोग फिर से गरीबी रेखा के नीचे आ जाते हैं। दरअसल तेजी से बढ़ती जनसंख्या (Population Explosion) के कारण सरकार की कोशिशें सफल नहीं हो पा रही हैं और अगर ऐसा ही चलता रहा तो शायद कभी सफल भी ना हों ?

Population Explosion

बेरोजगारी (Unemployment)

बेरोजगारी भी भारत की बड़ी समस्या है। भारत को एक युवा देश कहा जाता है, जिसकी करीब 60 प्रतिशत आबादी 30 साल से कम है। अब चूंकि कामगार आबादी बड़ी है तो नौकरियों के अवसर भी बड़े होने चाहिए, लेकिन हकीकत ये है कि इस मामले में हम पीछे हैं। सरकारें चाहकर भी रोजगार के पर्याप्त मौके पैदा नहीं कर पा रही हैं। एक और जहां भारत की इस युवा आबादी को देश की तरक्की के लिए वरदान माना जा रहा है, वहीं अगर इस युवा आबादी को रोजगार के मौके ना मुहैया कराए गए तो यही वरदान अभिशाप भी बन सकता है। जैसा कि हाल कि हरियाणा के जाट आरक्षण मुद्दे, गुजरात के पाटीदारों के हिंसक आंदोलन में देखने को भी मिला, जिसमें युवाओं में भारी गुस्सा दिखाई दिया और यही हिंसा का कारण भी बना।

Population Explosion

पर्यावरण की बर्बादी

अब देश की आबादी घनी है और लगातार बढ़ती ही जा रही है तो ऐसे में उनके रहने और खाने के लिए भी जगह, अनाज की जरुरत होगी ही। इस मांग का असर यह हो रहा है कि लोगों के रहने के लिए बड़े स्तर पर जंगलों की कटाई हो रही है। इससे जंगली जानवरों के रहने की जगह कम हो रही है जिससे इंसानों और जानवरों में टकराव की घटनाएं सुनने को मिल रही हैं। साथ ही इतनी बड़ी आबादी का पेट भरने के लिए धुंआंधार तरीके से फसलों की बुवाई हो रही है, जिससे मिट्टी की ऊपजाऊ क्षमता प्रभावित हो रही है।

इसके अलावा ज्यादा फसल लेने के चक्कर में खेती में रसायनों का इस्तेमाल बढ़ता ही जा रहा है। जिसका असर इंसानी स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। नई नई बीमारियां अस्तित्व में आ रही हैं। ऊपर से तुर्रा ये है कि हमारे देश में एक तो मेडिकल सुविधा सीमित है और जो है भी वह इतनी महंगी है कि आम आदमी की पहुंच से दिनों-दिन बाहर होती जा रही है।

जंगलों की कटाई पर्यावरण के लिए खतरनाक होती जा रही है। जिसका असर हमें सूखे, बाढ़ के रुप में देखने को मिल रहा है। बिहार और नॉर्थ ईस्ट में हर साल आने वाली बाढ़, बुंदेलखंड का सूखा पर्यावरण को हो रहे नुकसान के सबसे बड़े उदाहरण हैं।

Population Explosion

Global Warming

ग्लोबल वॉर्मिंग के लिए भी हमारी बढ़ती जनसंख्या (Population Explosion) ही जिम्मेदार है। दरअसल आज इंसानों को सुविधा की इतनी आदत पड़ चुकी है कि वह शायद ही उनके बिना रह सके, जैसे- एसी, फ्रिज, कारें आदि। जैसा कि सभी जानते हैं कि ये भी उपकरण ग्लोबल वॉर्मिंग के लिए कितने जिम्मेदार हैं। वहीं बढ़ती आबादी की मूलभूत जरुरतों को पूरी करने के लिए प्राकृतिक संसाधनों जैसे कोयला, प्राकृतिक गैस आदि का दोहन भी बढ़ गया है। अब इसके नुकसान ग्लोबल वॉर्मिंग या कहें कि क्लाइमेट चेंज (Climate Change ) के रुप में सामने आ रहे हैं।

सांप्रदायिक टकराव

भारत जैसे देश में बढ़ती आबादी का एक और नुकसान है, जैसा हम जानते हैं कि भारत में कई धर्म, संप्रदाय और जाति के लोग रहते हैं। अब चूंकि देश में गरीबी बहुत है तो सरकारी सुविधाओं को पाने के लिए मारामारी होना आम बात है। अब ये मारामारी देश में सांप्रदायिक टकराव को भी न्यौता दे रही है। हमारे नेता बढ़ती आबादी का ठीकरा एक संप्रदाय विशेष पर फोड़कर अपनी जिम्मेदारी से तो बच रहे हैं, लेकिन समाज में कटुता का जहर घोल रहे हैं। इसी का असर है कि देश में सांप्रदायिक और जातिगत टकराव की घटनाएं आए दिन सुनने को मिल रही हैं।

Population Explosion

बस यही है Population Explosion का उपाय !

अब जब बढ़ती जनसंख्या (Population Explosion) के नुकसानों पर चर्चा हो गई तो फिर सवाल उठना लाजमी है कि इसका समाधान क्या हो ? कुछ लोग कहते हैं कि 1 से ज्यादा बच्चे पैदा करने पर रोक लगा देनी चाहिए, लेकिन चीन के उदाहरण से समझा जा सकता है कि यह नीति भी काम नहीं करने वाली। बता दें कि कुछ साल पहले चीन ने 1 से ज्यादा बच्चे पैदा करने पर रोक लगा दी थी, लेकिन उसका असर ये हुआ कि वहां लिंग-भेद बढ़ गया। मतलब लड़के पैदा करने के लिए लड़कियों को गर्भ में ही मारा जाने लगा और समाज में लड़कों की संख्या बढ़ गई और लड़कियों की कम हो गई। इस उदाहरण से समझा जा सकता है कि भारत में भी यह नीति सवालों के घेरे में रहेगी।

तो, जहां तक हमारी समझ कह रही है कि बढ़ती जनसंख्या (Population Explosion) का समाधान सिर्फ शिक्षा (Education) ही हो सकती है। खुलकर बताएं तो, जिस राज्य में शिक्षा की दर ज्यादा है वहां फर्टिलिटी रेट (Fertility Rate) कम पाया गया है। अब सवाल उठेगा कि फर्टिलिटी रेट क्या है ? बता दें कि फर्टिलिटी रेट अगर किसी राज्य का 2 हो तो उसका मतलब है कि उस राज्य की महिलाएं अपने जीवन में औसतन 2 बच्चे पैदा करती हैं। माना जाता है कि यदि बच्चे पैदा हो रहे हैं तो 2 लोग मर भी रहे हैं। इससे राज्य की जनसंख्या स्थिर रहती है। लेकिन जिन राज्यों में शिक्षा की दर कम है, वहां फर्टिलिटी रेट भी ज्यादा पाया गया है, मतलब बच्चे ज्यादा पैदा हो रहे हैं, जिसका सीधा असर जनसंख्या बढोत्तरी के रुप में देखने को मिल रहा है।

इसलिए कह सकते हैं कि जैसे ही पूरे देश में शिक्षा का स्तर बढ़ेगा फर्टिलिटी रेट अपने आप कम हो जाएगा। लेकिन यूपी, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे विशाल राज्यों में शिक्षा की दर काफी कम है, यही कारण है कि देश की जनसंख्या बढ़ाने में इन राज्यों का बड़ा योगदान है।

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