बदल रहा Saudi Arabia, ये हैं बदलाव की अहम वजह !

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Saudi Arabia

मध्य-पूर्व (Middle East) का प्रमुख देश सऊदी अरब (Saudi Arabia) आजकल बदलाव के दौर से गुजर रहा है। दरअसल सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान धीरे-धीरे सऊदी अरब की छवि को बदलने का प्रयास कर रहे हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार को पहली बार सऊदी अरब में महिलाओं ने स्टेडियम में बैठकर फुटबॉल मैच का लुत्फ लिया। बता दें कि सऊदी अरब में वहाबी इस्लाम को मानने वाले लोग रहते हैं और वहाबी इस्लाम में महिलाओं पर काफी पाबंदियां होती है। लेकिन क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में अब महिलाओं को कुछ आजादी दी जा रही है।

Saudi Arabia में महिलाओं को मिल रही आजादी

स्टेडियम में महिलाओं के प्रवेश के साथ ही सऊदी सरकार महिलाओं को और भी आजादी देने पर विचार कर रही है। सऊदी अरब (Saudi Arabia) के प्रमुख शहर जेद्दाह में एक कार शोरूम खोला गया है, जो पूरी तरह से महिलाओं के लिए समर्पित है। गौरतलब है कि इसी साल जून महीने में सऊदी अरब की महिलाओं को कार चलाने का अधिकार भी मिल जाएगा। इससे पहले महिलाओं के कार चलाने पर पाबंदी थी। दरअसल सऊदी अरब सरकार अब अपनी इकॉनोमी को तेल के साथ-साथ पर्यटन पर आधारित बनाना चाहती है। यही वजह है कि अब सरकार वहां की महिलाओं को कई अधिकार देकर दुनिया में अपनी इमेज सुधारना चाहती है।

क्या है इस बदलाव की वजह

जैसा कि सभी जानते हैं कि सऊदी अरब (Saudi Arabia) में दुनिया के सबसे ज्यादा ऑयल रिजर्व हैं, जिस वजह से पूरी दुनिया में होने वाले तेल के निर्यात में सऊदी अरब का हिस्सा सबसे ज्यादा होता है। लेकिन पिछले कुछ समय से अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट आयी है। साल 2014 में जहां तेल के एक बैरल की कीमत 112 डॉलर थी, वही अब घटकर सिर्फ 45 डॉलर पर पहुंच गई है। यही वजह है कि सऊदी अरब की सरकार का बजट घाटा काफी बढ़ गया है।

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Oil Based इकॉनोमी

सभी जानते हैं कि सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था Oil Base है और उसकी सारी कमाई तेल से होती है। चूंकि अभी तक तेल महंगे दामों पर बिकता रहा है, इस वजह से सऊदी सरकार अपने नागरिकों के सभी खर्चे खुद उठाती आयी है। 70 प्रतिशत नौकरियां सऊदी अरब में सरकार देती है और वो भी अच्छी सैलरी पर। अब तेल के दाम गिरने से सरकार को आम जनता के खर्चे चलाने में परेशानी हो रही है। खबर है कि सऊदी अर्थव्यवस्था को हाल के सालों में 360 बिलियन डॉलर का घाटा उठाना पड़ा है। हालात ये हैं कि सऊदी सरकार ने इस्लामिक ऑयल बॉन्ड इश्यू करके पहली बार 9 बिलियन डॉलर का कर्ज लिया है।

Saudi Arabia में युवा जनसंख्या बनी परेशानी

आमतौर पर युवा जनसंख्या किसी भी देश के लिए अच्छी बात मानी जाती है। लेकिन सऊदी अरब (Saudi Arabia) के लिए यह एक समस्या बन गई है। दरअसल सऊदी में 65 प्रतिशत जनसंख्या 30 साल से कम है और आने वाले सालों में सऊदी अरब को 20 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा करनी होगी। अब एक ऐसे देश में जहां तेल के अलावा दूसरी इंडस्ट्री डेवलेप नहीं हो पायी है, वहां इतनी बड़ी संख्या में युवाओं के लिए नौकरियां देना परेशानी की बात तो है ही। चिंता की बात ये है कि अब सऊदी अरब की जनता भी आराम पसंद हो गई है। जिससे निपटने में सरकार को पसीने छूट सकते हैं।

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शाही खर्चे

सऊदी सरकार को जहां जनता की चिंता है, वहीं उसके शाही सदस्यों के खर्चे भी सरकार के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। सऊदी अरब (Saudi Arabia) के शाही परिवार में करीब 15000 सदस्य हैं। खास बात ये है कि इन सदस्यों का शाही खर्च सालाना करीब 2 बिलियन डॉलर है, जो कि 30 देशों की GDP से भी ज्यादा है।

सेना का भारी बजट

सऊदी अरब दुनिया की सबसे मजबूत सेनाओं में गिनी जाती है। बता दें कि सऊदी अरब का रक्षा बजट दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा बजट है। इसके अलावा सऊदी अरब सरकार दुनियाभर में इस्लाम के प्रचार प्रसार के लिए हर साल बड़ी मोटी रकम खर्च करती है।

अब जब देश की इकॉनोमी बैठ रही है, ऐसे हालात में देश को चलाना किसी के लिए भी टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। यही कारण है कि सऊदी अरब में बदलाव देखने को मिल रहे हैं। गौर करने वाली बात है कि जिस तरह से दुनिया अब तेल पर अपनी निर्भरता घटा रही है, तो आने वाला वक्त सऊदी अरब जैसे देशों के लिए और भी मुश्किल हो सकता है। मध्य पूर्व में दुबई ही ऐसा देश है, जिसने तेल पर अपनी निर्भरता को खत्म कर दिया है और पर्यटन पर शिफ्ट कर दिया है। आज के समय में दुबई की इकॉनोमी का सिर्फ 1 प्रतिशत हिस्सा तेल से आता है। अब सऊदी अरब भी दुबई के नक्शे-कदम पर चलना चाहता है, ताकि आने वाले मुश्किल वक्त का सामना किया जा सके।

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