मुश्किल में फंसे लोगों की सहायता करके असली हीरो का किरदार निभा रहे अभिनेता सोनू सूद

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इस स्टोरी को लिखने में सबसे जायदा सुख इस बात का है की सोनू सूद के इस काम में कहीं भी कोई स्वार्थ नज़र नहीं आ रहा , अभिनेता Sonu Sood न तो अपनी कोई राजनीती की सीट पक्की करते नज़र आये और न ही कोई दूसरी वजह , निऱ्स्वार्थ सहयोग की मंशा से काम करते सोनू सूद केवल लोगों को उनके घर पहुंचाने की जल्दी में हैं।

भारत को ऐसे लाखों युवाओं की जरूरत है , जो वक़्त पर केवल जितना उनसे हो सकता है उतना तो जरूर करें। युवा अगर इस तरह से अपने साथी भारतियों के दर्द को पहचानकर उनके साथ खड़ा हो जायेगा तो भारत की धरती से सब दुःख दर्द मिटता नज़र आएगा। दर्द बाँटने से कम हो जाता है ख़ुशी बाँटने से बढ़ती है इसी बात को प्रमाणित करती है सोनू सूद की यह पहल!

ईश्वर ने हमें अगर हमें दूसरों से अधिक दिया है तो उससे भगवन की सौगात समझ कर समय पड़ने पर दूसरों की सहायता करके हमें भगवान् का धन्यवाद देना चाहिए , यही सफल इंसान की असली पहचान है।

आज जब कोरोना के कहर में पूरा विश्व मुश्किलें झेल रहा है , वहां भारत के प्रवासी मज़दूर और गरीब लोगों की हालात किसी से छिपी नहीं। पैसे और साधनों की कमी के चलते गरीब मज़दूरों को सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा करते देख देश में लाखों लोगो की दिल मज़दूरों की मज़बूरी को देखकर अंतर्मन से दुखी हो रहे थे। LOCKDOWN के चलते सहयता करने की चाह रखते हुए भी कुछ लोग आगे नहीं आ रहे थे।

मन और भी दुखी तब हुआ जब मीडिया में आने वाली तस्वीरों से मज़दूरों की मज़बूरी पे भी राजनीती होनी शुरू हो गयी और बड़े बड़े राजनेता बड़ी बड़ी बयानबाज़ी करने लगे , मगर सच्चाई के धरातल पे सब कुछ खाली ही था

राज्य सरकारें अपना काम तेज़ी से कर रही हैं और समाज सेवी संस्थान भी पूरा योगदान दे रहे हैं , मगर इतना काफी नहीं है , अचानक आयी यह विपदा बहुत भारी है , ऐसे में आम नागरिक के जीवन पे बहुत प्रभाव पड़ा है। एक तरफ कोरोना का कहर में लोग अपनों को अपनी आँखों के सामने खो रहे हैं और दूसरी तरफ गरीबी और मज़बूरी का अभिशाप।

ऐसे ही मुश्किल घडी में सोनू सूद गरीब और मज़बूर लोगो के लिए एक फ़रिश्ते की तरह सामने आये। आज तक जिस सोनू सूद की एक्टिंग के लिए हम सब कायल थे आज वो असली हीरो के रूप में लोगों के दिलों में राज करने लगे हैं। सेलिब्रिटी लाइफ को एक साइड पे रखकर सोनू सूद खुद लोगो के बीच में आकर उनकी सहयता करते देखे गए। यह किसी फिल्म की शूटिंग नहीं थी बल्कि रियल लाइफ में सोनू सूद प्रवासी लोगो को उनके घर पहुंचाने के लिए तत्पर देखे गए।

एक तरफ जहाँ कुछ लोग केवल सरकार पे आरोप लगाने में लोग व्यस्त थे , वही इस अभिनेता ने अपने लेवल पे जितना हो पाया उतनी लोगो की सहयता करने की कोशिश की। बस इतना ही तो समझने की जरूरत है युवा भारत को , हम अपने हिस्से की जिमेवारी तो उठाएं , हम जितना कर सकते हैं उतना तो करें, हम पूरा भारत नहीं बदल सकते मगर अपने हिस्से के भारत को तो संभालें।

कुछ दिन पहले मज़दूरों की दर्दनाक अवस्था देखकर कुछ पंक्तिया लिखीं थी :

कोई तो करे कोशिश कोई तो जिम्मा उठाये
इन गरीब मज़दूरों को सुरक्षित उनके घर पहुचाये

बस इतनी सी गलती है अपना गांव छोड़ के आये
पेट की आग बुझाने को शहर की धुप में जलने आये
नंगे पांव भूखे प्यासे पगडण्डी भी दिए भुलाये….. कोई तो करे कोशिश कोई तो जिम्मा उठाये

महामारी से बच भी जाएं
पैदल सफर यह कट भी जाये
गरीबी लाचारी से हमको बोलो कौन बचाये ?…..कोई तो करे कोशिश कोई तो जिम्मा उठाये

मेहनत करके खाने वाले हमने हाथ फैलाये न
शहरों की शौहरत वालों को जाने क्यों हम अब भायें न
पल भर में वो भूल गए बरसों जिनके बोझ उठाये….कोई तो करे कोशिश कोई तो जिम्मा उठाये

दर्द के मारे हम बेचारे हर गम हसकर सेह लेते
महामारी के मारे हैं हम दुनिया को भी कह लेते
पैदल चलते मासूमों का दर्द हम से सहा न जाये…..कोई तो करे कोशिश कोई तो जिम्मा उठाये

कोई तो करे कोशिश कोई तो जिम्मा उठाये
इन गरीब मज़दूरों को सुरक्षित उनके घर पहुचाये ~आई के शर्मा

आज हज़ारों लाखों लोग देश सेवा और समाज सेवा में अपना अमूलय योगदान दे रहा है। इसी कड़ी में एक अभिनेता का इस तरह से आगे आना बेहद सराहनीय है , अभिनेता सोनू सूद आज भी Twitter और ईमेल के जरिये जयादा से जायदा लोगो की सहयता कर रहे हैं।

 

Yuva Press की पूरी टीम भारत माता के इस सपूत सोनू सूद को अपने देशवासियों को मुश्किल में सँभालने के इस योगदान के लिए आभार व्यक्त करता है, और युवा पीढ़ी के मार्गर्शन के लिए सोनू सूद हमेशा अपना योगदान देते रहेंगे ऐसी ही आशा करते हैं। 

I K Sharma मुख्य संपादक

 

प्रवासी श्रमिकों के लिए फरिश्ता बने Actor Sonu Sood

Lockdown के तीन एक्सटेंशन के साथ, कई लोग देश के अन्य शहरों में अपने घरों में वापस जाने के इच्छुक हैं। Lockdown के दौरान एक शहर से दूसरे शहर में लोग बिना किसी साधन के जा रहे हैं । जहां राज्य सरकारें प्रवासियों को घर वापस जाने में मदद करने के लिए प्रयास कर रही हैं, वहीं कुछ ने व्यक्तिगत रूप से उनकी सुरक्षित वापसी का बीड़ा उठाया है।

सोनू सूद अपने राज्यों को वापस जाने की इच्छा रखने वालों के लिए बसों की व्यवस्था करने के लिए सुर्खियों में रहे हैं। अभिनेता ने आवश्यक अनुमतियों के साथ कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में बसों की व्यवस्था की।

यात्रियों को घर भेजते हुए सोनू सूद की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, यहां तक ​​की मशहूर हस्तियों ने भी उनके प्रयासों के लिए उनका स्वागत किया है। एक सराहनीय इशारे में, सोनू सूद उन लोगों को भी जवाब दे रहा है जो उन्हें ट्वीट कर रहे हैं। वह न केवल उन्हें सांत्वना दे रहे हैं और उन्हें आश्वासन दे रहे हैं कि वह उन्हें जल्द ही घर वापस जाने में मदद करेंगे और वह उनसे ईमेल पर विवरण भेजने का आग्रह कर रहे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, कर्नाटक में 350 प्रवासियों को भेजने के बाद, सोनू सूद ने 400 लोगों के लिए यूपी और बिहार की यात्रा की व्यवस्था की।

साइना नेहवाल, सानिया मिर्जा, फराह खान और कई अन्य हस्तियों ने उनके प्रयास पर उनकी सराहना की। इससे पहले, सोनू सूद ने अपने छह मंजिला मुंबई होटल को Quarantine Centre के रूप में पेश करने और रमजान के दौरान उपवास करने वालों को भोजन प्रदान करने के लिए भी सुर्खियां बटोरी थीं।

एक साक्षात्कार में अपने प्रयासों के बारे में बात करते हुए सोनू सूद ने बताया कि हर बार जब वह राशन लेने के लिए अपने घर के बाहर कदम रखते थे, तो वे कई लोगों को दूसरे राज्यों में उनके घर पैदल वापस जाते देखते। यह देखते ही सोनू सूद ने उनसे ऐसा न करने का अनुरोध किया।

अभिनेता ने इन प्रवासी कामगारों से यह भी वादा किया कि वह किसी और चीज़ की व्यवस्था करने की कोशिश करेंगे। हालाँकि, कुछ ने बात सुनी और कुछ ने अपनी यात्रा जारी रखी। सोनू सूद ने खुलासा किया कि तब से वह इन सभी लोगों को उनके घरों में वापस भेजने के लिए कुछ उपाय कर रहे हैं।

जब सोनू सूद ने सरकार द्वारा Lockdown पर छूट के बारे में सुना, तो उन्होंने जल्दी से पुलिस, महाराष्ट्र सरकार और अन्य राज्यों की सरकार से संपर्क करना शुरू कर दिया, जहां प्रवासी श्रमिकों को भेजा जाना था। उन्होंने इन प्रवासी श्रमिकों को अपने घरों में वापस भेजने की अनुमति मांगी। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि ये लोग Red Zone से नहीं हैं और उनकी स्वास्थ्य जांच पूरी हो गई है।

सोनू सूद ने खुलासा किया कि वे खाली पेट सोने वाले लोगों को देखने के लिए सहन नहीं कर सकते थे, जबकि बाकी केक और मिठाइयाँ पका रहे थे। अभिनेता ने खुलासा किया कि कैसे वह बिना कुछ लिए उस शहर आए थे और आज उन्हें कितनी दूर तक ले आया है। उन्होंने यह भी कहा, “यदि मैं समाज को कुछ वापस नहीं दे सकता, तो यह एक अच्छा जीवन नहीं है जिसका मैं नेतृत्व कर रहा हूं। मेरे घर की सुख-सुविधाओं में रहने के दौरान ये लोग क्या कर रहे हैं, इस बारे में सोचकर मेरी रातों की नींद हराम हो गई है”।

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