Steve Jobs की Inspirational “Connecting the Dots” स्टोरी

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Steve Jobs

Steve Jobs हमारी जेनरेशन के चुनिंदा महान Inventors, बिजनेसमैन में से एक हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर तकनीक को नया आयाम दिया। शायद यही कारण है कि स्टीव जॉब्स युवा पीढ़ी में खास जगह रखते हैं। स्टीव जॉब्स का ही विजन था, जो उनके द्वारा खड़ी की गई एप्पल (Apple) कंपनी आज टेक्नोलॉजी की सिरमौर बन चुकी है। लेकिन इस लेख में हम स्टीव जॉब्स की उपलब्धियों की नहीं बल्कि उनकी प्रसिद्ध Connecting the Dots नामक कहानी की चर्चा करेंगे, जो कि उन्होंने Stanford University में दिए एक व्याख्यान के दौरान बतायी थी। दरअसल Connecting the Dots स्टीव जॉब्स के जीवन की अपनी कहानी है। यह कहानी उनके जीवन की 3 अलग-अलग घटनाओं का अनुभव है, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दी।

Steve Jobs

पहली कहानी

पहली कहानी स्टीव जॉब्स के जन्म से जुड़ी है। दरअसल स्टीव की असली मां (Biological Mother) एक युवा, गैर-शादीशुदा महिला थी। इस वजह से वह स्टीव जॉब्स को खुद नहीं पालना चाहती थी। ऐसे में स्टीव की मां ने उन्हें गोद देने के बारे में सोचा, लेकिन उनकी शर्त थी कि स्टीव को गोद लेने वाले लोग ग्रेजुएट हों, ताकि स्टीव जॉब्स भी भविष्य में ग्रेजुएट हो सकें। खैर परिस्थितियां ऐसी बनी कि स्टीव जॉब्स को गोद लेने वाले दंपत्ति हाईस्कूल तक ही मुश्किल से पढ़े थे, लेकिन उन्होंने स्टीव की Biological मां को वादा किया कि वह स्टीव को कॉलेज जरुर भेजेंगे।

इसके बाद स्टीव की जिन्दगी अपनी रुटीन से चलती रही। अपने वादे के मुताबिक स्टीव के माता-पिता ने स्टीव का Reed College में एडमिशन कराया। लेकिन स्टीव का मन पढ़ाई में नहीं लगा। ऐसे में स्टीव ने अपने माता-पिता की गाढ़ी कमाई को कॉलेज की फीस पर बर्बाद कराने के बजाए पढ़ाई छोड़ना बेहतर समझा। हालांकि कॉलेज से ड्रॉप आउट होने के बावजूद स्टीव जॉब्स कॉलेज आते रहे और किसी तरह से कॉलेज में अपनी पसंद की क्लास भी करते रहे। इसी दौरान स्टीव जॉब्स ने अपने कॉलेज में “कैलीग्राफी”(Calligraphy) सीखी। जिसका स्टीव जॉब्स ने अपने पहले बनाए कम्प्यूटर मैकिनटोश (McIntosh) में इस्तेमाल किया। कह सकते हैं कि मैकिनटोश में कैलीग्राफी तकनीक के इस्तेमाल के कारण ही मौजूदा दौर के कम्प्यूटर्स में इतने सारे फोन्ट उप्लब्ध हैं। स्टीव जॉब्स का मानना था कि उनका कॉलेज ड्रॉप आउट करने का फैसला सही साबित हुआ, जिसने उनके जीवन में बड़ा अहम रोल निभाया।

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दूसरी कहानी

स्टीव जॉब्स की दूसरी कहानी उनके एप्पल से निकाले जाने की कहानी है। स्टीव जॉब्स ने 20 साल की उम्र में अपने एक साथी के साथ मिलकर एप्पल कंपनी की शुरुआत की थी। एक गैराज से शुरु की गई एप्पल कंपनी 10 साल बाद 2 बिलियन डॉलर और 4000 कर्मचारियों की कंपनी बन चुकी थी। इसी बीच स्टीव ने एक ऐसे इंसान को अपनी कंपनी में अहम पद पर नियुक्त कराया, जो बाद में उन्हीं के खिलाफ हो गया। दोनों के बीच वैचारिक मतभेद हुए और स्टीव जॉब्स को उन्हीं की कंपनी से निकाल दिया गया। स्टीव जॉब्स ने बताया कि एप्पल से निकाले जाने के बाद वह काफी समय तक दुखी रहे। लेकिन आखिरकार उन्होंने फिर से हिम्मत जुटायी और 2 नई कंपनियां खड़ी की। ये कंपनियां थी NEXT और Pixal। दोनों ही कंपनियां काफी सफल रही और बाद में एप्पल ने NEXT को खरीद लिया और इस तरह से स्टीव जॉब्स फिर से एप्पल का हिस्सा बन गए। बता दें कि एप्पल के मौजूदा उत्पादों में NEXT की टेक्नोलॉजी का ही इस्तेमाल किया जाता है। इस घटना पर स्टीव जॉब्स का कहना है कि अगर उन्हें एप्पल से नहीं निकाला जाता तो शायद वह NEXT और Pixal जैसी दिग्गज कंपनियों का निर्माण ही न कर पाते।

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तीसरी कहानी

स्टीव जॉब्स की तीसरी कहानी मौत की फिलॉसफी पर आधारित है। जाब्स ने बताया कि जब वह अपने काम और अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में व्यस्त थे, तभी उन्हें पता चला कि उन्हें कैंसर हो गया है और अब वह सिर्फ 3-6 महीने के मेहमान हैं। स्टीव जॉब्स को लगा कि उनकी जिन्दगी शायद यहीं खत्म हो जाएगी, लेकिन सौभाग्य से उनका कैंसर ठीक हो गया और वह बच गए। (हालांकि बाद में उनकी मौत फिर से हुए कैंसर के कारण ही हुई)

कैंसर से जिंदा बचने पर स्टीव जॉब्स ने कहा कि मौत, जिन्दगी का सबसे बड़ा अविष्कार है, जो पुराने को खत्म कर नया रचता है। इसलिए हर दिन यह सोचकर जिए कि आज आपकी जिन्दगी का आखिरी दिन है और वो हर काम करें जो आप करना चाहते हैं। स्टीव के अनुसार, मौत सबसे बड़ा सच है, जिसे स्वीकार करके ही हम जिन्दगी को सही ढंग से जी सकते हैं।

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स्टीव जॉब्स की यह कहानी सबसे प्रेरणादायी कहानियों में से एक है, जिसने आज तक लाखों लोगों को जिन्दगी में कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित किया है और आज भी लाखों करोड़ो लोगों को प्रेरित कर रहा है। आखिर में स्टीव जॉब्स का वह वाक्य, जो उनकी जिन्दगी का मूलमंत्र था...Stay Hungry, Stay Foolish…

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