2/3 B.Tech बेरोजगार क्यों ?

why engineers remain unemployed

Why engineers remain unemployed ?

बेरोजगारी की समस्या मुंह बाए खड़ी है। खासकर Engineers की हालत बहुत ज्यादा खराब है। AICTE की डेटा के मुताबिक 60 फीसदी Engineers का Campus placement नहीं हो रहा है। पिछले 5 सालों के डेटा पर गौर करें तो Engineering colleges का प्लेसमेंट 50 फीसदी रहा है। इसी वजह से   2016-17 में 51 फीसदी B.Tech seats खाली रही थी। देश की 3291 इंजीनियरिंग कॉलेजों का Strength (In terms of number) करीब 15.5 लाख है।इन सब वजहों को ध्यान में रखते हुए AICTE ने उन सभी कॉलेजों को Wind up करने को कहा है जिनमें पिछले पांच सालों से 70 फीसदी से ज्यादा सीटें खाली रही हैं।

2015-16 में इंजीनियरिंग की करीब 15.5 लाख सीटें थी

2015-16 में पूरे देश के करीब 30 लाख छात्रों ने Science में 12 वीं बोर्ड की परीक्षा पास की। 2015-16 में इंजीनियरिंग की करीब 15.5 लाख सीटें थी। इस हिसाब से Science stream का हर छात्र अगर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करता है तो दो छात्रों को 1 सीट के लिए compete करना होगा जो ना के बराबर है। दूसरी तरफ MBBS और दूसरी पढ़ाई के लिए एक साल में 1 लाख सीट है। 1990-91 में पूरे देश में B.Tech and M.Tech सीटों की संख्या करीब  87 हजार थी। 2017-18 में यह बढ़ कर 16.62 लाख पर पहुंच गया।

Poor quality  की वजह से नहीं हो रहा Placement

Placement नहीं होने की सबसे बड़ी वजह Poor quality है। Industry expert के मुताबिक ज्यादातर स्टूडेंट्स basics भी नहीं जानते हैं। एक तरफ Automation की वजह से skilled employee को नौकरी नहीं मिल रही है ऐसे में वे degree holder इंजीनियर को नौकरी के लिए काबिल नहीं पाते हैं। Recruiters का कहना है कि 80 percent of engineering graduates are not employable.

2000 में Coder की जबरदस्त मांग थी

Experts का कहना है कि 2000 में इंजीनियरिंग फील्ड बूम पर था। इंडस्ट्री को लाखों की संख्या में Coder की जरूरत थी। उस समय भारत में Private engineering college ना के बराबर थी। इंडस्ट्री को जितने Professionals की जरूरत थी Government engineering college उस डिमांड को पूरा करने में पीछे रह रही थी। Demand and Supply gap की वजह से Private sector stepped in. एक्सपर्ट्स का ये भी कहना है कि अगर Private institute नहीं खुलते तो भारत में IT सेक्टर इतना मजबूत नहीं हो पाता। इंडस्ट्री जब बूम कर रहा था तो Coder की बहुत ज्यादा डिमांड थी इसलिए कॉलेज से निकलने वाले छात्रों को आसानी से नौकरी मिल जाती थी लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।

Global recession के  बाद Economy is in stationary mode

Engineering students की जो हालत है वह अचानक से पैदा नहीं हुआ है। इंडस्ट्री के experts लगातार चेतावनी देते रहे कि जिस रफ्तार से Private institute खुल रहे हैं उस पर निगरानी की सख्त जरूरत है। तमाम रिपोर्ट में कहा गया कि Engineering college की गुणवत्ता लगातार घटती जा रही है लेकिन सरकार ने इस समस्या पर कभी ध्यान नहीं दिया। 2008 में जब Global recession आया तो अमेरिका और यूरोप का विकास पूरी तरह से थम गया जिसका असर पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दिया। आज भी हम उसकी मार से ऊबर नहीं पाए हैं। हालांकि सरकार और AICTE की तरफ से कई अहम फैसले लिए गए हैं। इन फैसलों का क्या असर होता है यह आने वाला वक्त बताएगा।

 

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