VIDEO : ‘कोई नसीबदार नहीं होता, नसीब बनाना पड़ता है कड़ी मेहनत से’ मिलिए गुजरात के सबसे युवा IPS से

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 23 जुलाई 2019 (युवाPRESS)। लोग कहते हैं कि ‘आप बहुत नसीबदार (भाग्यशाली) हो, तो मैं कहूँगा यह सत्य नहीं है। मेरी नज़र में सत्य यह है कि कोई व्यक्ति नसीब अपने साथ लेकर नहीं आता है, अपना नसीब व्यक्ति को खुद बनाना पड़ता है, कड़ी मेहनत करके।’ यह कहना है गुजरात के सबसे युवा IPS सफिन हसन मुस्तफा अली का।

कौन है सफिन हसन ?

उत्तर गुजरात के बनासकांठा जिले की पालनपुर तहसील के कणोदर गाँव के रहने वाले सफिन हसन के पिता मुस्तफाअली एक इलेक्ट्रिशियन हैं और दिन में जो भी इलेक्ट्रिशियन का जो भी काम मिलता, वह करते थे और शाम को चाय और अंडे का ठेला लगाते थे। जबकि माता हाउस वाइफ हैं। खुद सफिन बताते हैं कि एक समय उनके माता-पिता दोनों ही डायमंड इंडस्ट्री में काम करते थे, परंतु उनके जीवन में एक ऐसा भी समय आया कि मंदी के कारण उन्हें अपनी नौकरियाँ छोड़नी पड़ी और तब पिता ने इलेक्ट्रिशियन का काम तथा चाय और अंडे का ठेला लगाकर गुजारा किया। सफिन की मां भी लोगों के घरों में खाना पकाने का काम करके परिवार की आजीविका चलाने में पति की मदद करती थी।

बचपन में ठान लिया था बनना है IAS

सफिन ने एक लोकप्रिय कार्यक्रम जिंदगी विथ सफिन के दौरान बताया कि उन्होंने खुद अपनी मां के साथ मिलकर अपना घर बनाया था, क्योंकि उनके पास इतने भी पैसे नहीं थे कि वह मजदूरों को देकर उनसे घर बनवा सकें। सफिन के अनुसार जब वह अपने घर की आर्थिक स्थिति और परिवार की परेशानियों को देखते थे तो उन्हें अपने सपने को साकार करने के लिये दुगुनी मेहनत करने का हौसला मिलता था और वह ज्यादा लगन से पढ़ाई करते थे।

अपने स्कूल में वह पढ़ाकू बच्चे के रूप में मशहूर थे। सफिन के मुताबिक जब वह 10 साल के थे, तब स्कूल में लाल लाइट वाली गाड़ी में आए कलेक्टर का मान-सम्मान देखकर उन्होंने मन ही मन गांठ बाँध ली थी, कि उन्हें भी आईएएस बनना है। उन्होंने कक्षा 10 तक की पढ़ाई गाँव में रहकर पूरी की। उनके अंक और आर्थिक परिस्थिति देखकर पालनपुर की स्कूल ने उनकी कक्षा-11 और 12 की फीस माफ कर दी। अब उनके पास इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिये कॉलेज की फीस भरने के पैसे नहीं थे, तब उनके सगे-सम्बंधियों ने आर्थिक मदद की और जो पैसे कम पड़ते थे, उसके लिये खुद सफिन ने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। कॉलेज की पढ़ाई कंपलीट करने के बाद सफिन के पास UPSC की क्लास जॉइन करने के पैसे नहीं थे, तब गाँव के एक दम्पति हुसैनभाई और जरीनाबेन ने उन्हें पैसे दिये और दिल्ली भेजा।

कड़ी मेहनत और लगन ने दिलाई सफलता

सफिन ने जून-2016 में GPSC और UPSC की तैयारी शुरू की और 2017 में दोनों की परीक्षा दी। यह सफिन की कड़ी मेहनत और लगन का ही परिणाम था कि एक ही वर्ष में उन्होंने दोनों परीक्षाएँ पास कर ली। उन्होंने GPSC में पूरे देश में 34वीं और UPSC में 570वीं रैंक प्राप्त की। सफिन के अनुसार UPSC MAIN का चौथा पेपर सुबह 9 बजे था, जिसके लिये वह 8.30 बजे घर से टू-व्हीलर पर निकले थे, परंतु रास्ते में उनका टू-व्हीलर स्लिप हो जाने से उनके घुटने, कोहनी और सिर में चोटें लगी, फिर भी सफिन को कोई मलाल नहीं हुआ, बल्कि इस बात की खुशी हुई कि उसका दाहिना हाथ सलामत है, जिससे वह परीक्षा का पेपर लिख पाएगा। यूपीएससी का पेपर लंबा होने से हाथ में दर्द न हो, इसलिये घायल अवस्था में भी वाहन चलाकर दूर पेन-किलर लेने के लिये गये और समय पर परीक्षा केन्द्र पर पहुँचकर परीक्षा पूरी की। छह पेपर देने के बाद एमआईआर कराने पर पता चला कि घुटने का लिगामेंट टूट गया है, उसका ऑपरेशन करवाना होगा, परंतु सफिन ने इंटरव्यू के बाद ही ऑपरेशन कराया। 23 मार्च को यूपीएससी का इंटरव्यू था, उससे पहले 20 फरवरी को उनके शरीर में WDE काउंट घटकर 30 हजार तक आ गये थे। शरीर में इन्फेक्शन था, लगातार बुखार था। इसके बावजूद 15 मार्च को अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद दिल्ली पहुँचकर एक सप्ताह में इंटरव्यू की तैयारी की और इंटरव्यू में पूरे देश में सेकण्ड हाइएस्ट मार्क्स प्राप्त किये।

गुजरात कैडर के आईपीएस सफिन की 2 वर्ष की ट्रेनिंग शुरू

सफिन की 2 वर्ष की आईपीएस की ट्रेनिंग शुरू हो चुकी है। हालाँकि वह आईएएस बनना चाहते थे, इसलिये वह यूपीएससी की पुनः परीक्षा देंगे, जिसकी तैयारी भी उन्होंने शुरू कर दी है। 2 वर्ष की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद सफिन गुजरात में ही पुलिस बल में पूर्णकालीन आईपीएस अधिकारी के रूप में कार्यरत् होंगे।

सफिन के मुख से सुनिए सफलता की दास्तान….

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